यूपी में यहां नहीं मनाई जाती होली, शोक में डूब जाते हैं 28 गांवों के लोग, ये पीड़ा 700 साल पुरानी
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देशभर में होली का खुमार चढ़ने लगा है. यूपी का बृज और अवध क्षेत्र अपनी होली के लिए चर्चित रहे हैं, लेकिन यूपी में ही एक ऐसी जगह भी है, जो होली न खेलने के लिए जानी जाती है. अवध के रायबरेली जनपद के डलमऊ क्षेत्र में होली के दिन लोग शोक मनाते हैं. होली आते ही डलमऊ तहसील क्षेत्र के 28 गांव सूने पड़ जाते हैं. लोग यहां रंग से खेलने के बजाय होली वाले दिन गमगीन हो जाते हैं. इतिहासकार डॉ. आरबी वर्मा बताते हैं कि डलमऊ तहसील क्षेत्र के मुर्शिदाबाद, नाथखेड़ा, पूरे नाथू, पूरे गडरियन नेवाजगंज सहित 28 गांव में होली नहीं मनाई जाती है. इसकी वजह 700 साल पहले हुई एक घटना है.
रायबरेली. बसंत पंचमी के दिन से ही लोगों पर होली का खुमार सिर चढ़कर बोलने लगता है. पूरे देश में होली के लिए दो क्षेत्र अपनी परंपरा के लिए सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं, यूपी का बृज और अवध क्षेत्र. यहां अनोखे ढंग से होली का उत्सव मनाया जाता है. अवध के रायबरेली जनपद के डलमऊ क्षेत्र में होली के त्यौहार वाले दिन लोग शोक मनाते हैं. आज भी होली आते ही डलमऊ तहसील क्षेत्र के 28 गांव सूनसान पड़ जाते हैं. लोग यहां होली वाले दिन रंगों से खेलने के बजाय शोक मनाते हैं. इसकी वजह 700 वर्ष पहले घटित हुई घटना है.
कस्बा डलमऊ के स्थानीय निवासी सूर्य कांत मिश्रा लोकल 18 से बताते हैं कि यह घटना लगभग 700 वर्ष पुरानी है. हमारे पूर्वज बताते थे कि डलमऊ के राजा डल देव एक बार गंगा नदी में नौका विहार कर रहे थे. जौनपुर के मुगल शासक शाहशर्की की बेटी सलमा भी नदी में नौका विहार करने आई हुई थीं. महाराज डलदेव को सलमा को देखते ही मोहब्बत हो गई. वह सलमा को अपनी पत्नी के रूप में महल ले आए. यह बात मुगल शासक को नागवार गुजरी.
इसका बदला लेने के लिए उसने कई बार डलमऊ किले पर आक्रमण किया, लेकिन असफल रहा. उसके बाद मुगल शासक ने मानिकपुर के राजा माणिक चंद्र से भेद नीति के तहत राजा डल देव को युद्ध में पराजित करने के लिए गुप्त जानकारी ली. माणिक चंद्र ने उसे बताया कि होली वाले दिन राजा डल देव अपनी प्रजा और सेना के साथ जश्न मानते हैं. इस दिन आक्रमण करने पर आप इन पर विजय प्राप्त कर सकेंगे. मुगल शासक ने होली वाले दिन डलमऊ पर आक्रमण कर दिया. मुगल सेना का सामना करने के लिए राजा डल देव भी अपने 200 सैनिकों के साथ युद्ध में कूद पड़े. मुगल शासकों की 2000 सेना का डटकर मुकाबला किया, लेकिन लड़ते-लड़ते शहीद हो गए.
महिलाएं नहीं करती श्रृंगार
डलमऊ कस्बे के स्थानीय दुकानदार दीपक श्रीवास्तव बताते हैं कि यहां के सभी लोग अपने राजा की मौत पर शोक मनाते हैं. महिलाएं भी इस दिन श्रृंगार नहीं करती. होलिका उत्सव के चार दिन बाद यह डलमऊ के 28 गांवों में होली का पर्व मनाया जाता है. इतिहासकार डॉ. आरबी वर्मा बताते हैं कि डलमऊ तहसील क्षेत्र के मुर्शिदाबाद, नाथखेड़ा, पूरे नाथू, पूरे गडरियन नेवाजगंज सहित 28 गांव में होलिका उत्सव का त्योहार होली वाले दिन नहीं मनाया जाता है. इस दिन डलमऊ नगरी के संस्थापक महाराज डल देव युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें