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Shahjahanpur News: शाहजहांपुर के पुवायां क्षेत्र का पकड़िया हकीम गांव, जिसे अपनी संपन्नता के कारण ‘मिनी पंजाब’ कहा जाता है, आज प्रशासनिक अनदेखी और ग्राम प्रधान के पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण बदहाली के आंसू रो रहा है. तहसील मुख्यालय से मात्र 18 किलोमीटर दूर स्थित इस पंचायत में जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है. कीचड़ से पटी गलियां और अधूरी नालियां न केवल ग्रामीणों के लिए नरक बन गई हैं, बल्कि स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों के लिए भी हर दिन एक नई मुसीबत खड़ी कर रही हैं.
शाहजहांपुर: तहसील मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत पकड़िया हकीम आज विकास के दावों की पोल खोल रहा है. ‘मिनी पंजाब’ कहे जाने वाले पुवायां क्षेत्र का यह गांव अपनी खुशहाली के लिए नहीं, बल्कि कीचड़ से पटी गलियों और जलभराव के लिए चर्चा में है. लहलहाते खेतों के बीच बसे इस गांव में जल निकासी की व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है, जिससे ग्रामीण नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं. विडंबना यह है कि प्रशासन की नाक के नीचे ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं.
प्रधान पर पक्षपात का आरोप, गलियों में भरा गंदा पानी
ग्रामीणों का कहना है कि गांव की गलियों में पानी इस कदर भरा रहता है कि घर से निकलना दूभर हो गया है. ग्राम प्रधान पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में जमकर पक्षपात किया गया है. प्रधान ने केवल अपने चहेते लोगों की गलियों में ही निर्माण कराया है, जबकि बाकी गांव को कीचड़ के भरोसे छोड़ दिया गया है. बिना नालियों के गंदा पानी रास्तों पर जमा होकर बीमारियों को दावत दे रहा है.
गलियों के किनारे नालियां न होने से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को होती है. स्कूल जाने वाले बच्चे अक्सर इस गंदे पानी में फिसलकर गिर जाते हैं और उनके कपड़े खराब हो जाते हैं. कई बार शिकायत करने के बावजूद प्रधान और सचिव इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं. ऐसा लगता है कि हमारे हिस्से का विकास सरकारी फाइलों में ही दबकर रह गया है.
खेती में खुशहाली पर गांव में बदहाली
ग्रामीणों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुवायां क्षेत्र अपनी उपजाऊ जमीन और खुशहाली के कारण ‘मिनी पंजाब’ के रूप में मशहूर है, लेकिन हमारे गांव की हालत देखकर कोई ऐसा नहीं कहेगा. खेतों में तो हरियाली है, लेकिन गांव की गलियों में गंदगी का अंबार है. जब तहसील मुख्यालय से इतनी कम दूरी पर यह हाल है, तो दूर-दराज के इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.
प्रशासनिक अनदेखी और आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप यह भी है कि उन्होंने कई बार उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. सफाई कर्मियों के दर्शन दुर्लभ हैं और नालियां न होने से जलभराव की समस्या स्थायी हो चुकी है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही भेदभाव खत्म कर पूरी पंचायत में समान रूप से नालियों और सड़कों का निर्माण नहीं कराया गया, तो वे तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें