कप्तान के पास लीडर बनने का मौका, कितनी तैयार सूर्या-गंभीर की जुगलबंदी, कैसे लगाएंगे वेस्टइंडीज पर ‘नाकाबंदी’

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कप्तान के पास लीडर बनने का मौका, कितनी तैयार सूर्या-गंभीर की जुगलबंदी

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कोलकाता में भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला मुकाबला भी ऐसा ही एक अवसर है. यह राष्ट्रीय नायक बनने का मंच है एक अरब भारतीयों के चेहरों पर मुस्कान लाने का मौका है. यह हर मायने में एक बड़ा आयोजन होगा. क्रिकेटर ऐसे ही पलों के लिए खेलते हैं आपको ऐसे मौकों को अपनाना होता है क्योंकि ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते

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कोलकाता के ईडेन मैदान पर कप्तान के पास लीडर बनने का मौका

नई दिल्ली. किसी भी बड़े मुकाबले से पहले अभिषेक शर्मा या ईशान किशन बल्लेबाज़ी के लिए मैदान पर उतरने से ठीक पहले क्या करते हैं ये सवाल हर किसी के जेहन में उठ रहा होगा. वैसे हर बल्लेबाज़ की अपनी एक अलग दिनचर्या होती है लेकिन मूल बात एक ही है खुद को शांत रखना न कोई अनावश्यक बातचीत न कोई हाइप और न ही जरूरत से ज़्यादा तैयारी का दिखावाबस संयमित रहना और पूरी तरह अपने ज़ोन में रहना.

साल 2003 में सेंचुरियन में पाकिस्तान के खिलाफ मैच से पहले सचिन तेंदुलकर ने सिर्फ एक केला और आइसक्रीम का एक कटोरा खाया था. वे किसी से बात नहीं कर रहे थे यहां तक कि कोच जॉन राइट ने भी उन्हें अकेला छोड़ दिया था. निर्देश साफ था कि उन्हें तभी बताया जाए जब अंपायर मैदान पर खेल शुरू करने के लिए निकलें.  इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने 78 गेंदों पर 98 रन बनाए और बाकी इतिहास है.

कोच-कप्तान की अग्निपरीक्षा

आज कोलकाता में भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाला मुकाबला भी ऐसा ही एक अवसर है. यह राष्ट्रीय नायक बनने का मंच है एक अरब भारतीयों के चेहरों पर मुस्कान लाने का मौका है. यह हर मायने में एक बड़ा आयोजन होगा. क्रिकेटर ऐसे ही पलों के लिए खेलते हैं आपको ऐसे मौकों को अपनाना होता है क्योंकि ऐसे अवसर बार-बार नहीं आते यह लगभग विश्व कप का क्वार्टर फाइनल है दांव इससे बड़ा नहीं हो सकता. कोच गौतम गंभीर के लिए भी यह ऐसा मुकाबला है जिसमें उन्हें पूरी तरह नियंत्रण में रहना होगा एक भी गलती महंगी पड़ सकती है एक कोच के रूप में यही वह मैच है जो सब कुछ तय कर सकता है मसलन, क्या भारत को कुलदीप यादव को खिलाना चाहिए क्या वह वेस्टइंडीज के बड़े हिटरों को संभाल पाएंगे ऐसे फैसले ही परिणाम तय करते हैं.

फॉर्मेट के फन्नेखां है सूर्यकुमार

ईडेन में सबकी निगाहें बार बार सूर्यकुमार यादव तक ले जाएंगी क्योंकि वो दूसरे खिलाड़ियों की तरह वह कई फॉर्मेट नहीं खेलते. यह वही प्रारूप है जिसे उन्होंने अपना बनाया है और कप्तान के तौर पर यह उनका सबसे बड़ा मौका है. हर नेता विश्व कप में खुद को साबित करना चाहता है क्योंकि वहीं असली विरासत बनती है. सूर्यकुमार यह जानते हैं वे यह भी समझते हैं कि दो दिन तक उनका भाग्य पूरी तरह उनके हाथ में नहीं था भारत को दक्षिण अफ्रीका के नतीजे पर निर्भर रहना पड़ा था. जो आसान नहीं रहा होगा लेकिन अब स्थिति अलग है. अब वह अपना भाग्य खुद नियंत्रित कर सकते हैं. अगर वह तीन मैचों में परफेक्ट प्रदर्शन करते हैं तो अहमदाबाद में विश्व कप ट्रॉफी थामे नजर आ सकते हैं.

कप्तान से लीडर बनने का मौका 

सूर्यकुमार यादव एक प्रेरणादायक नेता हैं और उन्हें हंसी-मजाक पसंद है. वह मुस्कुराते हैं चुटीले अंदाज में बात करते हैं लेकिन इसके पीछे मजबूत इच्छाशक्ति छिपी है. उनका सफर आसान नहीं रहा. लंबे समय तक उन्हें नजरअंदाज किया गया लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी खुद अपने लिए दरवाजे खोले. नेतृत्व के मामले में भी उन्हें कई बार अनदेखा किया गया फिर भी वह अडिग रहे. अब उनके पास मौका है और शायद उनके जीवन के तीन सबसे महत्वपूर्ण मैच.

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