why is gujiya made during holi । होली पर गुजिया क्यों बनाई जाती है? जानिए गुजिया का पूरा इतिहास, धार्मिक मान्यता और घर पर बनाने का आसान तरीका

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होली पर गुजिया क्यों बनाई जाती है? जानिए गुजिया का पूरा इतिहास और रेसिपी

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Gujiya on Holi: होली पर गुजिया बनाने की परंपरा कई सौ साल पुरानी है. यह मिठाई नई फसल और मिठास का प्रतीक मानी जाती है. गुजिया पहले से बनाकर रखी जा सकती है, इसलिए होली पर खास होती है. मैदा, खोया और सूखे मेवे से बनी यह मिठाई हर उम्र के लोगों को पसंद आती है. घर पर आसान तरीके से स्वादिष्ट गुजिया बनाई जा सकती है.

Gujiya on Holi: होली का नाम आते ही रंग, पिचकारी, हंसी मजाक और मीठी खुशबू से भरा किचन याद आता है. जैसे ही फाल्गुन का महीना शुरू होता है, घरों में तैयारी भी शुरू हो जाती है. कोई रंग खरीद रहा होता है, कोई पापड़ और नमकीन बना रहा होता है, तो कहीं कड़ाही में घी गरम हो रहा होता है और उसमें तली जा रही होती है सुनहरी गुजिया. होली और गुजिया का रिश्ता इतना गहरा है कि बिना गुजिया के त्योहार अधूरा सा लगता है.

बच्चे प्लेट में सबसे पहले गुजिया ढूंढते हैं और बड़े लोग मेहमानों को चाय के साथ गुजिया जरूर परोसते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर होली पर ही गुजिया क्यों बनाई जाती है? क्यों यह मिठाई इस त्योहार की पहचान बन गई? होली 2026 के जश्न में गुजिया का इतिहास और बनाने की पूरी विधि जानना जरूरी हो जाता है. आइए आसान शब्दों में समझते हैं गुजिया का इतिहास, इसकी खासियत और घर पर बनाने का पूरा तरीका.

होली पर गुजिया बनाने की परंपरा का इतिहास: होली पर गुजिया का इतिहास काफी पुराना माना जाता है. कहा जाता है कि यह मिठाई उत्तर भारत में खास तौर पर बनाई जाती थी, खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार और राजस्थान में. पुराने समय में जब खेती बाड़ी मुख्य काम था, तब फाल्गुन के महीने में नई फसल घर आती थी. घर में दूध, खोया, सूखे मेवे और आटा भरपूर मात्रा में होते थे. इन्हीं चीजों से गुजिया तैयार की जाती थी.

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होली को बुराई पर अच्छाई की जीत और नई शुरुआत का त्योहार माना जाता है. ऐसे में घर में मीठा बनाकर खुशियां बांटने की परंपरा रही है. होली पर गुजिया बनाने की वजह यही है कि यह त्योहार नई फसल, मिठास और मिलन का प्रतीक है. गुजिया की मीठी भरावन रिश्तों में भी मिठास घोलने का संकेत मानी जाती है.

होली पर गुजिया क्यों होती है इतनी लोकप्रिय: गुजिया की लोकप्रियता का एक कारण यह भी है कि इसे पहले से बनाकर कई दिन तक रखा जा सकता है. होली पर लोग एक दूसरे के घर जाते हैं, मेहमान आते हैं, ऐसे में ऐसी मिठाई चाहिए जो जल्दी खराब न हो. गुजिया इस काम के लिए बिल्कुल सही है.

लोग होली पर गुजिया इसलिए भी खाते हैं क्योंकि यह त्योहार रंगों के साथ साथ स्वाद का भी त्योहार है. गुजिया की कुरकुरी परत और अंदर की मीठी भरावन हर उम्र के लोगों को पसंद आती है.

गुजिया बनाने की सामग्री: मैदा, घी, खोया या मावा, पिसी चीनी, नारियल बूरा, काजू, बादाम, किशमिश, इलायची पाउडर, तलने के लिए घी या तेल.

गुजिया बनाने की पूरी विधि. 1. आटा तैयार करना: सबसे पहले एक बड़े बर्तन में मैदा लें. उसमें 2 से 3 चम्मच घी डालें और हाथ से अच्छी तरह मिला लें. अब थोड़ा थोड़ा पानी डालकर सख्त आटा गूंध लें. इसे ढककर 20 मिनट के लिए रख दें.

2. भरावन तैयार करना: एक पैन में खोया हल्का सा भून लें. जब ठंडा हो जाए तो उसमें पिसी चीनी, नारियल बूरा, कटे हुए सूखे मेवे और इलायची पाउडर मिला दें. अच्छी तरह मिलाकर तैयार कर लें.

3. गुजिया बनाना: आटे की छोटी लोई बनाएं और उसे पूड़ी की तरह बेल लें. अब उसमें एक चम्मच भरावन रखें. किनारों पर हल्का पानी लगाएं और आधा मोड़कर बंद कर दें. कांटे से दबाकर डिजाइन बना सकते हैं या गुजिया सांचा इस्तेमाल कर सकते हैं.

4. तलना: कड़ाही में घी गरम करें. आंच धीमी रखें और गुजिया को सुनहरा होने तक तलें. बहुत तेज आंच पर न तलें, वरना बाहर से जल्दी रंग आ जाएगा और अंदर कच्ची रह सकती है.

5. ठंडा करना और सुरक्षित रखना: तली हुई गुजिया को ठंडा होने दें. फिर हवा बंद डिब्बे में रख दें. यह कई दिन तक चल सकती है.

होली 2026 पर घर में बनाएं खास गुजिया: होली 2026 के जश्न में गुजिया का इतिहास और बनाने की विधि जानना त्योहार को और खास बना देता है. जब आप अपने हाथ से गुजिया बनाते हैं, तो उसमें सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि अपनापन भी होता है. इस बार होली पर बाजार की मिठाई लाने के बजाय घर में गुजिया बनाकर देखिए, मजा दोगुना हो जाएगा.

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