दिल्ली क्राइम ब्रांच की बड़ी कामयाबी, राजस्थान और यूपी से मिले 2 दिव्यांग नाबालिग, परिवार से मिलन की खुशी आज!

Share to your loved once


क्राइम न्‍यूज. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बार फिर संवेदनशील मामलों को सुलझाने में बड़ी सफलता हासिल की है. एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट यानी AHTU की टीम ने अलग-अलग मामलों में लापता हुए दो दिव्यांग नाबालिग बच्चों को खोजकर सुरक्षित उनके परिवारों से मिला दिया. दोनों बच्चों के मिलने के बाद परिवारों में खुशी का माहौल है और पुलिस टीम की सराहना की जा रही है.

पहला मामला न्यू उस्मानपुर थाना क्षेत्र का है. यहां रहने वाला 17 साल का दिव्यांग किशोर 20 फरवरी 2024 को अचानक घर से लापता हो गया था. परिवार ने काफी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस में अपहरण और गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया गया. मामला संवेदनशील होने के कारण इसे दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को सौंप दिया गया.

एसीपी सुरेश कुमार की निगरानी में इंस्पेक्टर मनोज दहिया, एएसआई गोपाल कृष्ण और हेड कांस्टेबल प्रदीप की टीम ने जांच शुरू की. पुलिस ने बच्चे के माता-पिता से बातचीत की, स्थानीय स्तर पर पूछताछ की और बच्चे की तस्वीर सोशल मीडिया तथा कई व्हाट्सऐप ग्रुप्स में साझा की. लगातार प्रयासों के बाद टीम को अहम जानकारी मिली और किशोर को उत्तर प्रदेश के उन्नाव-कानपुर इलाके से सुरक्षित बरामद कर लिया गया.

जांच में सामने आया कि किशोर मानसिक रूप से कमजोर है और घर की परिस्थितियों के कारण वह खुद ही घर से निकल गया था. उसके पिता फैक्ट्री में काम करते हैं जबकि मां घरों में काम करती हैं. लंबे समय बाद बेटे के मिलने पर परिवार भावुक हो गया.

दूसरा मामला भलस्वा डेयरी थाना क्षेत्र का है. यहां 15 साल का दिव्यांग लड़का 30 जनवरी 2026 को लापता हो गया था. इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया. क्राइम ब्रांच की दूसरी टीम, जिसमें इंस्पेक्टर मुकेश कुमार, एएसआई अजय कुमार झा और एएसआई महेश कुमार शामिल थे, ने जांच शुरू की.

पुलिस ने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से जानकारी जुटाई और तकनीकी निगरानी के साथ तलाश अभियान चलाया. जांच के दौरान पता चला कि बच्चा किसी तरह ट्रेन में बैठकर दिल्ली से अजमेर पहुंच गया था. रेलवे पुलिस ने उसे संदिग्ध हालत में पाया, लेकिन वह अपना नाम और पता नहीं बता पा रहा था. इसके बाद उसे अजमेर के बाल कल्याण समिति के बच्चों के गृह में रखा गया था.

दिल्ली पुलिस की टीम ने वहां पहुंचकर बच्चे की पहचान की और उसे सुरक्षित अपने कब्जे में लिया. बाद में दोनों बच्चों को संबंधित थानों के जांच अधिकारियों को सौंप दिया गया, जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें परिवारों के हवाले कर दिया गया.

क्राइम ब्रांच के डीसीपी पंकज कुमार ने कहा कि नाबालिग और दिव्यांग बच्चों से जुड़े मामलों को पुलिस सर्वोच्च प्राथमिकता देती है. उन्होंने टीम की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि समय पर कार्रवाई से दो परिवारों की जिंदगी में फिर से खुशियां लौट आई हैं.

इस सफल ऑपरेशन ने एक बार फिर साबित किया कि तकनीक, टीमवर्क और लगातार प्रयास से मुश्किल से मुश्किल मामलों को भी सुलझाया जा सकता है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP