उत्तराखंड के इस मंदिर में लगती है यमराज की अदालत, मृत्यु बाद आत्मा को देना पड़ता है सभी कर्मों का हिसाब, ऐसे तय होता स्वर्ग-नरक!

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उत्तराखंड में यमराज की अदालत, आत्मा देती कर्मों का हिसाब, तय होता स्वर्ग-नरक!

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Dharmeshwar Mahadev Mandir Uttarakhand: उत्तराखंड में भगवान शिव का एक अद्भुत मंदिर है, जहां पर यमराज की अदालत लगती है. मृत्यु के बाद आत्माएं वहाां पर अपने कर्मों का हिसाब देती है. किसे स्वर्ग और किसे नरक मिलेगा? वह भी वहां तय होता है. आइए जानते हैं धर्मेश्वर महादेव मंदिर के बारे में.

उत्तराखंड में यमराज की अदालत, आत्मा देती कर्मों का हिसाब, तय होता स्वर्ग-नरक!Zoom

धर्मेश्वर महादेव मंदिर उत्तराखंड. (IANS)

Dharmeshwar Mahadev Mandir Uttarakhand: कहते हैं कि मृत्यु के बाद हर मनुष्य को अपने कर्मों का हिसाब देना होता है. जीवन में किए गए अच्छे और बुरे कर्मों के आधार पर ही मनुष्यों को अगला जन्म मिलता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मृत्यु के बाद कहां पर कर्मों का हिसाब-किताब किया जाता है? उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जहां मनुष्यों को अपने सभी कर्मों का हिसाब देना होता है. माना जाता है कि अगर जीते-जी इस मंदिर के दर्शन कर लिए जाएं तो कर्मों से हिसाब से मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं धर्मेश्वर महादेव मंदिर के बारे में.

धर्मेश्वर महादेव मं​दिर में यमराज की अदालत

धर्मेश्वर महादेव उत्तराखंड में मौजूद चौरासी मंदिर परिसर के अंदर स्थित एक चमत्कारी मंदिर है. माना जाता है कि मनुष्यों के कर्मों के हिसाब के लिए यहां यमराज की अदालत भी लगती है.

गर्भगृह में शिवलिंग का अद्भुत स्वरूप

धर्मेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में मटके के आकार के शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं, जिन्हें यमराज का ही रूप माना जाता है. मंदिर के इतिहास की बात करें तो माना जाता है कि इसी स्थल पर महाराज कृष्ण गिरि ने साधना की थी और स्थान को पवित्रस्थली बनाया था.

स्वयं साक्षात् यमराज स्वरूप हैं भगवान शिव

साक्षात् यमराज के रूप में विराजित भगवान शिव चित्रगुप्त की सहायता से मनुष्यों के कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं. मंदिर के पीछे की तरफ एक स्थान चित्रगुप्त को दिया गया है.

ऐसे तय होता है स्वर्ग और नरक

जमीन पर आपको एक काली शिला और पट्टी दिखने को मिलेगी, जिस पर पत्थर से कुछ लकीरें बनाई गई हैं. माना जाता है कि यह तरीका ही तय करता है कि मनुष्य स्वर्ग जाएगा या नरक.

अकाल मृत्यु प्राप्त आत्माएं व्यतीत करती हैं समय

इतना ही नहीं, मंदिर की कुछ दूरी पर ढाई पौड़ी नाम का स्थान बना है. ढाई पौड़ी एक ऐसी जगह है, जहां अकाल मृत्यु से मरे लोगों को अपना बाकी समय काटना होता है.

भाई दूज पर लगती है भीड़

भाई दूज के मौके पर मंदिर में विशेष भीड़ लगती है. बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना के लिए मंदिर में विशेष दर्शन के लिए आती हैं. स्थानीय मान्यता है कि जो भी मंदिर में जीते-जी दर्शन के लिए नहीं आता, उसे मरने के बाद इसी स्थल पर आकर भगवान धर्मेश्वर महादेव का सामना करना पड़ता है.

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कार्तिकेय तिवारी

कार्तिकेय तिवारी Hindi News18 Digital में Deputy News Editor के पद पर कार्यरत हैं. वर्तमान में धर्म, ज्योतिष, वास्तु और फेंगशुई से जुड़ी खबरों पर काम करते हैं. पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. डिजि…और पढ़ें

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