भारत ने पिछले 11 सालों में अपने सामर्थ्य को पहचाना है, Rising Bharat में पीएम मोदी की 10 बड़ी बातें

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि “देश की अंदरूनी ताकत” पर फोकस किया जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने पिछले 11 सालों में अपनी ताकत को पहचाना है. वह भारत मंडपम में हो रहे न्यूज18 राइजिंग भारत समिट 2026 में बोल रहे थे. पीएम मोदी ने कहा, “हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे. यह राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी. दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया और इसका नुकसान आज तक हम उठा रहे हैं. इसका ताजा उदाहरण हम ट्रेड डील में हो रही चर्चा में देख रहे हैं. कुछ लोग चौंक गए हैं कि क्या हो गया… कैसे हो गया… विकसित देश भारत से ट्रेड डील करने में इतने उत्सव क्यों है… इसका उत्तर हताशा निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत है.”

उन्होंने आगे कहा, “जनधन आधार मोबाइल की 3 शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं. जिस भारत में एटीएम भी दुनिया के विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली. जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था वह भारत डीबीटी के जरिए 24 लाख करोड़ रुपए यानी 24 ट्रिलियन रुपए ऐसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है. भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है.”

‘राइजिंग भारत’ में पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें:

* दुनिया हैरान होती है कि जिस भारत में 2014 तक करीब 3 करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वह आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गए. जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधारने की कोई उम्मीद नहीं थी वह भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया. भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेटलतीफी थी और धीमी रफ्तार से होती थी अब वंदे भारत , नमो भारत ऐसी सेमी हाई स्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है.

* एक समय था जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था. आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचान है जिस स्ट्रैंथ विदीन कि चर्चा यहां हो रही है, यह उसका ही उदाहरण है. दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है वह नजर भी बदली है.

* एआई समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था, लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया. विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े ही नहीं उतारे, बल्कि अपने वैचारिक दिवालियापन को भी एक्सपोज कर दिया. जब नाकामी की निराशा और हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चक्कर बोल रहा हो, तो देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है.

* कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है, लेकिन इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी को सामने कर दिया. कांग्रेस हमेशा ऐसा ही करती है. जब अपने पाप को छिपाना हो, तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, लेकिन जब गौरवगान करना हो, तो एक परिवार को सारा श्रेय दे देती है.

* 1984 में कांग्रेस को 39 प्रतिशत वोट और 400 से अधिक सीटें मिली थीं, और इसके बाद के चुनावों में कांग्रेस के वोट लगातार कम होते चले गए. आज कांग्रेस की हालत ऐसी है कि देश में सिर्फ चार राज्य ही बचे हैं, जहां कांग्रेस के 50 से अधिक विधायक हैं. पिछले 40 वर्षों में देश में युवा वोटरों की संख्या बढ़ती गई, और कांग्रेस साफ होती गई.

* आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं. तमिलनाडु में गरीब परिवारों के लिए 9.5 लाख पक्के घर आवंटित किए गए हैं, लेकिन इनमें से 3 लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्योंकि डीएमके सरकार गरीबों के घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं ले रही है. क्योंकि नीयत नेक नहीं है.

* सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता. सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है. वह ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है. लेकिन इतिहास के लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों ने हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को हीनता से भर दिया था. दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर यह भर दिया था कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी हैं.

* अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस में होता तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील करता. बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है. भारत अब अपने खोए हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है.

* लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध विरोध नहीं होता, बल्कि वैकल्पिक विजन होता है. इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता कांग्रेस को सबक सिखा रही है.

* बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई है. अगर नेक नीयत होती, तो गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका नहीं जाता.

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