कब शुरू हो रहा तेलुगु नववर्ष उगादी 2026? जानें शुभ समय और क्यों खास है पराभव वर्ष, क्या कहता है पंचांग?
Ugadi 2026: हर साल वसंत की खुशबू के साथ आने वाला उगादी त्योहार नई उम्मीदों, नए सपनों और नए साल की शुरुआत का संदेश लेकर आता है. दक्षिण भारत, खासकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में इस दिन का इंतजार पूरे साल रहता है. जैसे ही उगादी नज़दीक आती है, घरों में सफाई, रंगोली, आम के पत्तों की तोरण और खास पकवानों की तैयारी शुरू हो जाती है. उगादी सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहले उगादी पचड़ी और नए पंचांग का स्मरण आता है. यह सिर्फ कैलेंडर बदलने का दिन नहीं, बल्कि जीवन को नए नजरिए से देखने की प्रेरणा भी देता है. साल 2026 का उगादी खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि इस दिन से तेलुगु शक संवत 1948 और 60 साल के चक्र में आने वाला ‘पराभव’ नाम वर्ष शुरू होगा. हर नाम वर्ष जीवन के अलग अनुभव और ऊर्जा का संकेत देता है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल है-2026 में उगादी कब है? शुभ मुहूर्त क्या है? और इस दिन की परंपराएं क्या कहती हैं? आइए सरल शब्दों में सब समझते हैं.
उगादी 2026 की तारीख और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार उगादी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है. साल 2026 में यह तिथि 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है.
-प्रतिपदा तिथि शुरू: 19 मार्च सुबह 6:52 बजे
-प्रतिपदा तिथि समाप्त: 20 मार्च सुबह 4:52 बजे
त्योहार आम तौर पर सूर्योदय के आधार पर मनाया जाता है, इसलिए 19 मार्च को ही उगादी मनाना शुभ रहेगा. इसी दिन से तेलुगु नववर्ष का आरंभ होगा और नया संवत्सर ‘पराभव’ शुरू माना जाएगा.
‘पराभव’ नाम वर्ष का अर्थ
भारतीय समय गणना में 60 साल का एक चक्र होता है, जिसमें हर साल का अलग नाम होता है. उगादी के दिन नया नाम वर्ष शुरू होता है. 2026 में शुरू होने वाला ‘पराभव’ वर्ष जीवन में बदलाव, सीख और आत्मचिंतन का प्रतीक माना जाता है. ज्योतिष परंपरा के अनुसार यह वर्ष लोगों को पुराने अनुभवों से सीख लेकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.
उगादी का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व
‘युग’ का मतलब समय और ‘आदि’ का मतलब शुरुआत होता है. यानी नए समय की शुरुआत ही उगादी है. पुराणों में मान्यता है कि सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा ने इसी दिन सृष्टि की रचना शुरू की थी. इसलिए इसे सृजन और नवजीवन का प्रतीक माना जाता है. प्रकृति भी इस समय नया रूप लेती है-पेड़ों पर कोपलें, आम के बौर और सुहावना मौसम जीवन में ताजगी का एहसास दिलाते हैं. इसी कारण उगादी को प्रकृति और जीवन दोनों की नई शुरुआत का त्योहार कहा जाता है.
उगादी के दिन की पारंपरिक तैयारियां
उगादी की सुबह लोग जल्दी उठकर स्नान करते हैं और नए कपड़े पहनते हैं. घर के दरवाजे पर आम के पत्तों की तोरण सजाई जाती है और आंगन में रंगोली बनाई जाती है. यह शुभता और समृद्धि का संकेत माना जाता है. परिवार के लोग मंदिर जाकर पूजा करते हैं और नए साल के लिए मंगल कामना करते हैं. घर में विशेष पकवान बनाए जाते हैं और रिश्तेदारों को शुभकामनाएं दी जाती हैं.
उगादी पचड़ी: जीवन के छह स्वादों का संदेश
उगादी का सबसे खास व्यंजन है उगादी पचड़ी. यह छह स्वादों का मिश्रण होता है:
-नीम के फूल – कड़वाहट
-गुड़ – मिठास
-कच्चा आम – कसैलापन
-इमली – खट्टापन
-नमक – संतुलन
-मिर्च – तीखापन
यह मिश्रण बताता है कि जीवन में सुख-दुख, गुस्सा-डर, आशा-निराशा सब साथ चलते हैं. हर अनुभव को स्वीकार कर आगे बढ़ना ही जीवन की सच्चाई है. इसलिए उगादी पचड़ी सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि जीवन दर्शन का प्रतीक है.
पंचांग श्रवण की परंपरा
उगादी की शाम को पंचांग श्रवण की खास परंपरा होती है. इसमें पुरोहित या घर के बुजुर्ग नए साल का पंचांग पढ़कर सुनाते हैं. इसमें वर्षा, खेती, स्वास्थ्य, ग्रह-नक्षत्र और राशिफल से जुड़ी बातें बताई जाती हैं. लोग इसे ध्यान से सुनते हैं और आने वाले साल के लिए मानसिक रूप से तैयार होते हैं. यह परंपरा समाज में समय गणना और प्रकृति के चक्र को समझने का माध्यम भी रही है.
समाज और परिवार को जोड़ने वाला त्योहार
उगादी सिर्फ धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि रिश्तों को मजबूत करने का मौका भी है. इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं, प्रसाद बांटते हैं और नए साल की शुभकामनाएं देते हैं. कई जगह सांस्कृतिक कार्यक्रम, कवि सम्मेलन और सामूहिक भोज भी होते हैं. इस तरह उगादी लोगों को मिलजुलकर खुशियां मनाने और नए साल का स्वागत करने की प्रेरणा देता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)