272 का स्ट्राइक रेट, 31 गेंदों पर 84 रन की साझेदारी, हार्दिक-तिलक की जोड़ी ने रनों की बहती गंगा में जमकर धोया हाथ
नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर जब कोई टीम पूरी लय में होती है, तो विपक्षी गेंदबाजी आक्रमण असहाय नजर आने लगता है. वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में ज़िम्बाब्वे के खिलाफ भारत का मुकाबला कुछ ऐसा ही रहा. इसे ‘बहती गंगा में हाथ धोना’ कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि भारतीय शीर्ष क्रम से लेकर मध्यक्रम तक, हर बल्लेबाज ने मैदान के चारों ओर रनों की बारिश की लेकिन इस मैच की असली चमक बिखेरी हार्दिक पांड्या और तिलक वर्मा की जोड़ी ने, जिन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से न केवल स्कोरबोर्ड को गति दी, बल्कि ज़िम्बाब्वे के सेमीफाइनल के सपनों को भी चकनाचूर कर दिया.
मिडिल ऑर्डर का मास्टरक्लास
मैच की शुरुआत भारत के लिए ठोस रही, लेकिन असली आतिशबाजी तब शुरू हुई जब हार्दिक पांड्या और युवा सनसनी तिलक वर्मा क्रीज पर एक साथ आए. एक समय लग रहा था कि ज़िम्बाब्वे के स्पिनर भारतीय रनों की रफ्तार पर लगाम लगाने में कामयाब हो जाएंगे, लेकिन हार्दिक और तिलक के इरादे कुछ और ही थे. दोनों ने मिलकर मात्र 31 गेंदों पर 84 रनों की नाबाद साझेदारी कर डाली. इस साझेदारी ने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया.
हार्दिक पांड्या: ‘कुंग-फू’ पांड्या का अर्धशतक
हार्दिक पांड्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मंच पर उनसे बड़ा मैच फिनिशर फिलहाल भारतीय टीम में कोई नहीं है. उन्होंने मैदान पर उतरते ही बड़े शॉट्स खेलना शुरू किया. हार्दिक ने अपनी पारी के दौरान न केवल ताकत का प्रदर्शन किया, बल्कि गैप्स ढूंढने की अपनी कला का भी बेहतरीन नमूना पेश किया. उन्होंने ज़िम्बाब्वे के तेज गेंदबाजों को निशाना बनाते हुए अपना शानदार अर्धशतक पूरा किया. उनकी इस पारी ने ड्रेसिंग रूम में बैठे खिलाड़ियों और स्टैंड्स में मौजूद प्रशंसकों को झूमने पर मजबूर कर दिया.
तिलक वर्मा ने दिखाया तेवर
दूसरे छोर पर खड़े युवा तिलक वर्मा ने हार्दिक का भरपूर साथ दिया. तिलक की बल्लेबाजी में आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं दिखी। उन्होंने अनुभवी गेंदबाजों के खिलाफ ऐसे शॉट्स खेले जो उनकी परिपक्वता को दर्शाते हैं। तिलक 44 रनों पर नाबाद रहे और अपनी इस पारी में उन्होंने 4 ऐसे गगनचुंबी छक्के लगाए जिसने चयनकर्ताओं को भरोसा दिलाया कि टीम इंडिया का भविष्य सुरक्षित हाथों में है. हार्दिक के साथ मिलकर उन्होंने 270 के स्ट्राइक रेट से रन बटोरे, जो टी-20 वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में निर्णायक साबित होते हैं.
ज़िम्बाब्वे पस्त, भारत का पलड़ा भारी
इस साझेदारी के दम पर भारत ने एक ऐसा विशाल लक्ष्य खड़ा किया, जिसके नीचे ज़िम्बाब्वे की टीम दब गई. भारतीय बल्लेबाजों ने जिस तरह से परिस्थितियों का फायदा उठाया, उसने विपक्षी टीम के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया. ‘बहती गंगा में हाथ धोने’ की यह कहावत भारतीय बल्लेबाजी के गहराई को दर्शाती है, जहाँ हर खिलाड़ी मैच विजेता बनकर उभरने की क्षमता रखता है.
सुपर-8 का यह मुकाबला हार्दिक पांड्या के अनुभव और तिलक वर्मा के जोश की जुगलबंदी के लिए याद किया जाएगा. 31 गेंदों में 84 रनों की यह साझेदारी केवल आंकड़ों का खेल नहीं थी, बल्कि यह भारत के ‘अटैकिंग क्रिकेट’ के नए दौर का संदेश था.