Madhya Pradesh Congress revival plan | who is the face of Congress in Madhya Pradesh
मध्य प्रदेश में कांग्रेस का ‘बाउंस बैक प्लान’ क्या, किसे चेहरा बनाएंगे राहुल?
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Madhya Pradesh Congress revival plan: मध्य प्रदेश में लगातार चुनावी हार के बाद कांग्रेस अब अपने नए चेहरे और नई रणनीति की तलाश में नजर आ रही है. लंबे समय तक पार्टी की कमान संभालने वाले कमलनाथ के नेतृत्व मॉडल पर सवाल उठने लगे हैं. संगठन के भीतर बदलाव की मांग तेज हुई है. ऐसे में पार्टी हाईकमान प्रदेश में नए नेतृत्व, खासकर युवा और आक्रामक चेहरों को आगे लाने पर विचार कर रहा है, ताकि जमीनी स्तर पर संगठन को फिर से मजबूत किया जा सके. कांग्रेस की कोशिश है कि पुराने अनुभव और नए जोश का संतुलन बनाकर बीजेपी के मजबूत संगठन के सामने प्रभावी चुनौती पेश की जाए. आने वाले महीनों में प्रदेश नेतृत्व में बदलाव और नई जिम्मेदारियों का ऐलान पार्टी की वापसी की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है.

भोपाल: मध्य प्रदेश में विपक्षी कांग्रेस बदलाव के दौर से गुजरती दिख रही है. पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में 2023 का विधानसभा चुनाव बुरी तरह हारने के बाद पार्टी संगठन स्तर पर युवा ब्रिगेड तैयार करने के प्रयास में जुटी है. मध्य प्रदेश में बीजेपी जिस आक्रामक अंदाज में राजनीति करती रही है, कांग्रेस भी उसी अंदाज में जवाब देने वाले नेताओं को आगे बढ़ाने के मूड में नजर आ रही है. आइए मध्य प्रदेश की राजनीति में उन पांच कांग्रेसी नेताओं पर नजर डालते हैं, जिनके जरिए पार्टी अगले कुछ साल राज्य में भविष्य तलाशने की कोशिश में है.
जीतू पटवारी: चुनाव में पार्टी के महज 66 सीटों पर सिमटने के बाद राज्य में पार्टी की कमान कमलनाथ से लेकर जीतू पटवारी के हाथों में सौंपी गई है. 2023 के चुनाव में खुद पटवारी करीब 35 हजार से ज्यादा वोटों से हार गए थे. इसके बाद भी पार्टी ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाया है. राज्य में 52 वर्षीय जीतू पटवारी की पहचान आक्रामक नेता के रूप में रही है. वह राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं. मौजूदा दौर में जीतू पटवारी राज्य की मध्य प्रदेश से आने वाले उन चुनिंदा नेताओं में हैं जिनपर राहुल गांधी डायरेक्ट कनेक्टेड हैं. ऐसी चर्चा है कि जीतू पटवारी की सलाह पर ही राहुल गांधी ने यूएस-इंडिया ट्रेड डील के विरोध में आयोजित किसान चौपाल को संबोधित करने के लिए भोपाल पहुंचे थे. पहले किसान महाचौपाल हरियाणा में होनी थी, लेकिन ऐन मौके पर जीतू पटवारी ने सलाह दी कि मध्य प्रदेश ज्यादा कृषि प्रधान राज्य है. यहां किसान महाचौपाल करने पर इसका ज्यादा असर होगा. कांग्रेस की हालिया तमाम जनसभाओं पर नजर डालें तो इसपर जीतू पटवारी की छाप साफ तौर से दिखती है.
उमंग सिंघार: 52 वर्षीय उमंग सिंघार राज्य में नेता प्रतिपक्ष हैं. आदिवासी समाज से आने वाले उमंग तेज तर्रार नेता माने जाते हैं. मध्य प्रदेश में भोपाल की कुर्सी हमेशा से ही राज्य के आदिवासी तय करते रहे हैं. आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों में से 2023 में 24 पर बीजेपी जीती थी. वहीं आदिवासियों के प्रभाव वाली गैर आरक्षित 29 सीटों में से बीजेपी ने 20 पर जीती थी. आमतौर पर आदिवासी कांग्रेस के वोटर माने जाते रहे हैं. इस वोटबैंक को कांग्रेस के प्रति भरोसा एक बार फिर से बनाने के लिए उमंग सिंघार को पार्टी आगे कर रही है.
जयवर्धन सिंह: 39 वर्षीय युवा नेता जयवर्धन सिंह को भी कांग्रेस राज्य की राजनीति में आगे बढ़ाती हुई दिख रही है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह कमलनाथ सरकार में सबसे युवा मंत्री के तौर पर सेवा दे चुके हैं. इसके अलावा 2018 के चुनाव से पहले जयवर्धन की सलाह पर ही दिग्विजय सिंह ने नर्मदा यात्रा की जिसका कांग्रेस को काफी फायदा हुआ था. पिछले दिनों जयवर्धन की सांगठनिक क्षमता को आंकने के लिए पार्टी ने उन्हें कुछ दिनों के लिए जिलाध्यक्ष भी बनाया था. इसके अलावा दिग्विजय सिंह के ताकत वाले जिलों पर पकड़ बनाए रखने के लिए कांग्रेस जयवर्धन सिंह को बेहतर विकल्प मानकर चल रही है.
सचिन यादव: पिछले पांच-सात साल से राहुल गांधी ओबीसी वोटरों को लेकर काफी बातें कर रहे हैं. दूसरी तरफ बीजेपी ने भी शिवराज सिंह चौहान के बाद मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाकर इस वोटबैंक पर अपनी पकड़ मजबूत किए हुए है. ओबीसी वोटबैंक में सेंधमारी के लिए कांग्रेस मध्य प्रदेश में सचिन यादव को आगे करती दिख रही है. माना जा रहा है कि अगले कुछ समय में पार्टी इनकी जिम्मेदारी बढ़ा सकती है.
हेमंत कटारे: 40 वर्षीय हेमंत कटारे भी मध्य प्रदेश कांग्रेस में उभरते हुए नेता हैं. ब्राह्मण समाज से आने वाले हेमंत को कांग्रेस ने विधानसभा में उपनेता बनाया था. हालांकि पिछले दिनों उन्होंने यह पद छोड़ दिया है. उन्होंने पार्टी प्रमुख को पत्र भेजकर कहा था कि सदन में जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा नहीं होती है इसलिए उन्होंने यह पद छोड़ा है. हेमंत कटारे भी वह नेता हैं जिन्हें कांग्रेस आगे बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है.
कांग्रेस का जातीय समीकरण पर फोकस
मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस के उभरते नेताओं पर नजर डालें तो साफ संकेत है कि पार्टी जातीय समीकरण पर ध्यान दे रही है. दिग्विजय सिंह और कमलनाथ जैसे नेताओं के साए से पार्टी को बाहर निकालकर युवा चेहरों को आगे बढ़ाने पर फोकस दिख रहा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में जाने के बाद कांग्रेस समाज के आदिवासी, ओबीसी, फॉरवर्ड हर तबके के युवा चेहरों को आगे बढ़ाती हुई दिख रही है.
प्रवक्ताओं की टीम में भी युवा टीम
मध्य प्रदेश में पार्टी का रंग रूप बदलने के मूड में दिख रही कांग्रेस ने यहां के प्रवक्ताओं की टीम भी बदल रही है. पार्टी का मानना है कि प्रवक्ता ही मीडिया से संवाद करते हैं. ऐसे में वहां भी नये चेहरे होने का सकारात्मक प्रभाव दिख सकता है. इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की सलाह पर एक झटके में राज्य के सभी प्रवक्ताओं को कार्यमुक्त कर दिया गया है. मध्य प्रदेश में कांग्रेस प्रवक्ता बनने के लिए टैलेंट हंट प्रक्रिया से गुजरना होगा. यहां तक कि पुराने कांग्रेसी भी अगर प्रवक्ता बनना चाहते हैं तो उन्हें भी टैलेंट हंट प्रक्रिया से गुजरना होगा. पार्टी का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी चाहते हैं कि टैलेंट हंट प्रोसेस से बनने वाले प्रवक्ता टीवी डिबेट से लेकर अन्य सार्वजिनक मंचों पर ज्यादा तैयारी और मजबूत तर्कों से पार्टी का पक्ष रख पाएंगे.
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अभिषेक कुमार News18 की डिजिटल टीम में बतौर एसोसिएट एडिटर काम कर रहे हैं. वे यहां बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तसीगढ़, उत्तराखंड की राजनीति, क्राइम समेत तमाम समसामयिक मुद्दों पर लिखते …और पढ़ें