आकिब नबी की बोलती गेंदों ने कराया के राहुल को चुप, करुण नायर का भी किया शिकार, जम्मू कश्मीर इतिहास रचने की दहलीज पर
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जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने शानदार स्पेल डालते हुए कर्नाटक के शीर्ष बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा दी और मेजबान टीम का स्कोर पहली पारी में पांच विकेट पर 220 रन कर दिया. इससे जम्मू-कश्मीर की टीम ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत की ओर मजबूती से बढ़ती नजर आ रही है.

आकिब नबी डार ने फाइनल में ढाया कहर, के राहुल, करुण नायर को किया आउट
नई दिल्ली. घाटी की ठंडी हवाओं से निकला एक तेज तूफान इस समय भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े मंच पर छाया हुआ है नाम है आकिब नबी. जब दांव पर इतिहास हो, सामने कर्नाटक जैसी मजबूत टीम हो और दबाव चरम पर हो, तब असली सितारे जन्म लेते हैं. रणजी ट्रॉफी के फाइनल में नबी ने जिस अंदाज में गेंदबाजी की, उसने न सिर्फ मैच की दिशा बदली बल्कि जम्मू-कश्मीर के सपनों को भी नई उड़ान दे दी. उनकी सटीक लाइन-लेंथ, लगातार दबाव और बड़े बल्लेबाजों को झकझोर देने वाली गेंदबाजी ने यह साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक उभरते तेज गेंदबाज नहीं, बल्कि बड़े मौकों के खिलाड़ी हैं.
गुरुवार को तीसरे दिन जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी ने शानदार स्पेल डालते हुए कर्नाटक के शीर्ष बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखा दी और मेजबान टीम का स्कोर पहली पारी में पांच विकेट पर 220 रन कर दिया. इससे जम्मू-कश्मीर की टीम ऐतिहासिक रणजी ट्रॉफी जीत की ओर मजबूती से बढ़ती नजर आ रही है.
नबी ने फिर लूटा महफिल
फॉर्म में चल रहे आकिब नबी ने 14 ओवर में मात्र 32 रन देकर तीन अहम विकेट चटकाए और कर्नाटक के टॉप ऑर्डर को पूरी तरह हिला कर रख दिया. खास बात यह रही कि उन्होंने लगातार नौ ओवर का लंबा स्पेल डाला और बड़े बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका ही नहीं दिया. नबी ने सबसे पहला झटका लोकेश राहुल को आउट कर दिया, जिससे कर्नाटक पर दबाव बन गया. इसके बाद उन्होंने दो गेंदों में दो विकेट लेकर मैच का रुख ही बदल दिया. उन्होंने करुण नायर को अंदर आती शानदार गेंद पर बोल्ड किया और अगली ही गेंद पर शानदार फॉर्म में चल रहे स्मरण रविचंद्रन को आउट कर कर्नाटक को गहरे संकट में डाल दिया. मौजूदा सीजन में उनके विकेटों की संख्या 58 पहुंच गई है, जो उत्तराखंड के स्पिनर मयंक मिश्रा के 59 विकेट से सिर्फ एक कम है.
मयंक की जुझारु पारी
हालांकि अनुभवी मयंक अग्रवाल ने आखिरी सेशन में धैर्य और तकनीक का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक छोर संभाले रखा. वह 130 रन बनाकर नाबाद रहे और उन्होंने टीम को संभालने की पूरी कोशिश की. उन्हें 124 रन के स्कोर पर जीवनदान भी मिला जब उनका कैच छूट गया, जो जम्मू-कश्मीर के लिए महंगा साबित हो सकता था. अग्रवाल की जुझारू पारी के बावजूद कर्नाटक की टीम पहली पारी के आधार पर अभी भी 364 रन पीछे है और फॉलोऑन से बचने के लिए उसे 165 रन और बनाने होंगे. मौजूदा स्थिति में मैच पूरी तरह जम्मू-कश्मीर के नियंत्रण में नजर आ रहा है.
इतिहास रच सकती है जम्मू कश्मीर
रणजी ट्रॉफी में 1959-60 में पदार्पण करने के बाद जम्मू-कश्मीर की टीम पहली बार फाइनल में पहुंची है,और यह उपलब्धि ही अपने आप में ऐतिहासिक है. इस पूरे सीजन में आकिब नबी टीम के सबसे बड़े मैच-विनर बनकर उभरे हैं. अगर नबी इसी लय को बरकरार रखते हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि जम्मू-कश्मीर की इस ऐतिहासिक यात्रा के सबसे बड़े नायक वही साबित हो सकते हैं. उनकी गेंदबाजी ने न सिर्फ कर्नाटक को दबाव में डाला है, बल्कि यह भी संकेत दे दिया है कि जम्मू-कश्मीर अब इतिहास रचने से बस कुछ कदम दूर खड़ा है.