2003 के सचिन तेंदुलकर की तरह सोचो सूर्यकुमार, तभी होगा चेन्नई में बेड़ा पार, ड्रेसिंग रूम को डर के माहौल से बचना होगा

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2003 के सचिन तेंदुलकर की तरह सोचो सूर्यकुमार, तभी होगा चेन्नई में बेड़ा पार

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2003 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका में भारत को ऐसा करते देखा है.ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद सचिन तेंदुलकर को देश के प्रशंसकों से टीम के साथ खड़े रहने की अपील करनी पड़ी थी. इसके बाद भारत ने लगातार आठ मैच जीते और फाइनल तक का सफर तय किया. उस अभियान में तेंदुलकर ने 673 रन बनाकर शानदार प्रदर्शन किया था. अब किसी खिलाड़ी को तेंदुलकर जैसी भूमिका निभानी होगी और टीम को आगे लेकर जाना होगा.

2003 के सचिन तेंदुलकर की तरह सोचो सूर्यकुमार, तभी होगा चेन्नई में बेड़ा पारZoom

2003 में सचिन तेंदुलकर ने टीम का ठीक करने के लिए खुद को किया था आगे

नई दिल्ली. दबाव अब और बढ़ेगा सोशल मीडिया पर हंगामा मचेगा औरअचानक टीम की लाखों कमियां गिनाई जाने लगेंगी. भारत जैसे देश में, जहां क्रिकेट एक जुनून की हद तक पसंद किया जाता है, यह सब स्वाभाविक है. एक हार और मानो सब कुछ टूट पड़ता है ऐसे समय में भारत को मानसिक रूप से मजबूत रहने की जरूरत है. उन्हें यह समझना होगा कि यह सिर्फ एक खराब रात थी.

शानदार शुरुआत के बाद कई मिसफील्ड, दो नो-बॉल जिन पर फ्री हिट में छक्के पड़े, और अनुशासन की कमी ने भारत को भारी नुकसान पहुंचाया. बल्लेबाजी में भी जो कुछ गलत हो सकता था, वह लगभग सब गलत ही हुआ. हालांकि, सिर्फ एक चयन गलती की वजह से भारत मैच नहीं हारा. बल्लेबाजी पूरी तरह सामूहिक रूप से विफल रही और अब जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ पूरी टीम को एकजुट होकर प्रदर्शन करना होगा.

तेंदुलकर का तरीका अपनाओ सूर्या

अक्सर कहा जाता है कि मुश्किल समय ही असली चैंपियनों की पहचान बनाता है. भारत इस समय कठिन परिस्थिति में है और देश अब और असफलता बर्दाश्त नहीं करेगा और टीम से दोबारा गलती की गुंजाइश नहीं है. यही वह वक्त है जब गहराई से लड़ने की जरूरत होती है, धैर्य और जज्बा दिखाने की जरूरत होती है, और खुद को मुश्किल से बाहर निकालना होता है. हमने 2003 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका में भारत को ऐसा करते देखा है.ऑस्ट्रेलिया से हार के बाद सचिन तेंदुलकर को देश के प्रशंसकों से टीम के साथ खड़े रहने की अपील करनी पड़ी थी. इसके बाद भारत ने लगातार आठ मैच जीते और फाइनल तक का सफर तय किया. उस अभियान में तेंदुलकर ने 673 रन बनाकर शानदार प्रदर्शन किया था. अब किसी खिलाड़ी को तेंदुलकर जैसी भूमिका निभानी होगी और टीम को आगे लेकर जाना होगा. सूर्यकुमार यादव को टीम को जल्दी से फिर से संगठित करना होगा. भारत के लिए यह अब सचमुच करो या मरो की स्थिति है और टीम का हर खिलाड़ी इस बात को समझता है.

ड्रेसिंग रुम में डर की नो ‘इंट्री’

सोशल मीडिया पर भले ही आलोचना का तूफान चल रहा हो, लेकिन खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन को खुद को संभालना होगा. विश्व कप अभी खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब टीम की पीठ दीवार से लग चुकी है. एक और खराब प्रदर्शन और खिताब बचाने का सपना खत्म हो सकता है. टीम यह बात अच्छी तरह जानती है और उन्हें इसका सामना करना ही होगा सवाल भी उठेंगे. वॉशिंगटन सुंदर को खिलाया गया और अक्षर पटेल को क्यों नहीं? सोचने वाली बात है कि यह फैसला थोड़ा अजीब लगा. चयन सही होना चाहिए और अक्षर को बाहर रखने की कोई खास वजह नजर नहीं आती.क्या भारत वापसी कर सकता है? खिलाड़ियों को एक-दूसरे का साथ देना होगा और ड्रेसिंग रूम का माहौल एकजुट रहना चाहिए. ऐसा समय आया है जब गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव को आगे बढ़कर कमान संभालनी चाहिए, तो वह यही समय है उन्हें भावनाओं पर नियंत्रण रखना होगा और टीम को संतुलित बनाए रखना होगा. बतौर मुख्य कोच और कप्तान, आने वाले दो मैच उनके लिए बेहद अहम हैं और उन्हें इसके लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।

भारत को अब एक दिन के लिए खेल से थोड़ा दूर होकर दिमाग को शांत करने की जरूरत है, ठीक वैसे ही जैसे एडिलेड में 36 रन पर ऑलआउट होने के बाद टीम ने किया था. अजिंक्य रहाणे और रवि शास्त्री की अगुवाई में टीम ने मेलबर्न में ऐतिहासिक वापसी की थी. अब गौतम गंभीर और सूर्यकुमार यादव को भी वैसा ही रास्ता ढूंढना होगा. यह कहना आसान है, करना मुश्किल, लेकिन सच यही है कि यह विश्व कप है और यहां से हालात संभालने के लिए कुछ खास करना ही पड़ेगा अब देखना होगा कि अगले सात दिनों में टीम क्या कर पाती है.

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