एक पनडुब्बी का कातिल-दूसरा ब्रह्मोस से लैस महायोद्धा, नेवी को 16 दिन में मिलेंगे अंजदीप-तारागिरि; कांपेगा दुश्मन

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हिंद महासागर की लहरों पर भारतीय नेवी का राज है. साल 2026 की शुरुआत भारतीय नौसेना के लिए किसी धमाके से कम नहीं होने है. चीन और पाकिस्तान की बेचैनी बढ़ाने के लिए महज 16 दिन के अंदर नीले समंदर में भारत के दो ऐसे शिकारी उतरने जा रहे हैं जो दुश्मन की सबमरीन को गहरे पानी में ही दफन करने की ताकत रखते हैं. अगले कुछ दिनों में चेन्नई के पोर्ट से लेकर विशाखापत्तनम के तट तक भारत की स्वदेशी ताकत का लोहा पूरी दुनिया मानेगी. चाहे वो आसमान से आती मिसाइल हो या समुद्र की गहराई में छिपी दुश्मन की पनडुब्बी ‘INS तारागिरि’ और ‘INS अंजदीप’ के रडार से बच पाना अब नामुमकिन है.

1. INS तारागिरि: समंदर का अजय योद्धा

INS तारागिरि नीलगिरी क्लास (प्रोजेक्ट 17A) का चौथा गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट है जो 14 मार्च 2026 को आधिकारिक रूप से नेवी में शामिल होगा. इसे मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तैयार किया है.

· खासियत और मारक क्षमता: यह जहाज पूरी तरह से स्टेल्थ तकनीक पर आधारित है यानी दुश्मन के रडार इसे आसानी से पकड़ नहीं पाएंगे. यह ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है जो समंदर की सतह पर किसी भी जहाज को मिनटों में तबाह कर सकती है. हवा से होने वाले हमलों को रोकने के लिए इसमें बराक-8 लॉन्ग रेंज मिसाइलें और एयर डिफेंस गन लगी हैं.

· सबमरीन का काल: पनडुब्बियों के शिकार के लिए इसमें स्वदेशी टॉरपीडो वरुणास्त्र और रॉकेट लॉन्चर मौजूद हैं. 6,700 टन वजनी यह जहाज 30 नॉटिकल मील की रफ्तार से दौड़ सकता है.

· कीमत: प्रोजेक्ट 17A के तहत बन रहे इन 7 फ्रिगेट्स की कुल लागत लगभग ₹45,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ के बीच है (प्रति जहाज औसत ₹6,500-7,000 करोड़).

2. INS अंजदीप: गहराई में छिपा दुश्मन का अंत

INS अंजदीप एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) शैलो वॉटर क्राफ्ट है जो 27 फरवरी 2026 को चेन्नई पोर्ट पर नौसेना का हिस्सा बनेगा. इसका मुख्य काम तटीय इलाकों में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को ढूंढकर उन्हें नष्ट करना है.

· खासियत: यह जहाज एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और लाइटवेट टॉरपीडो से लैस है. इसमें ‘लो-फ्रीक्वेंसी वैरिएबल डेप्थ सोनार’ लगा है जो पानी के नीचे छिपी हर हरकत को पकड़ लेता है. यह 25 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है और एक बार में 3,300 किलोमीटर तक का सफर तय करने में सक्षम है.

· रक्षा कवच: इसमें 30 मिमी की नेवल गन और एडवांस्ड एएसडब्ल्यू कॉम्बैट सूट लगा है जो इसे छोटे और मध्यम स्तर के हमलों से सुरक्षा प्रदान करता है.

· कीमत: 16 एएसडब्ल्यू क्राफ्ट के लिए किए गए सौदे की कुल कीमत लगभग ₹12,600 करोड़ है यानी एक जहाज की लागत करीब ₹780-800 करोड़ बैठती है.

2026 की धमाकेदार शुरुआत का क्या है महत्व?
2026 की पहली तिमाही में इन दो बड़े युद्धपोतों का शामिल होना भारत की आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया मुहिम की बड़ी जीत है. तारागिरि जैसे फ्रिगेट्स में 75% उपकरण स्वदेशी कंपनियों के हैं. चीन जिस तरह से हिंद महासागर में अपनी पनडुब्बियों का जाल बिछा रहा है उसे देखते हुए अंजदीप जैसे एंटी-सबमरीन क्राफ्ट भारत के तटीय सुरक्षा कवच को अभेद्य बना देंगे. यह नौसेना के उस लक्ष्य की ओर बड़ा कदम है, जहां 2047 तक भारतीय नेवी पूरी तरह स्वदेशी प्लेटफॉर्म्स पर आधारित होगी.

सवाल-जवाब
INS तारागिरि और INS अंजदीप कब नेवी में शामिल होंगे?
INS अंजदीप 27 फरवरी 2026 को और INS तारागिरि 14 मार्च 2026 को नौसेना में शामिल किए जाएंगे.

प्रोजेक्ट 17A के जहाजों के नाम पहाड़ों पर क्यों रखे गए हैं?
यह नेवी की परंपरा है. प्रोजेक्ट 17 और 17A के फ्रिगेट्स के नाम भारत की पर्वत श्रृंखलाओं जैसे नीलगिरी, तारागिरि और हिमगिरि पर रखे गए हैं.

INS तारागिरि में कौन सी मुख्य मिसाइल लगी है?
तारागिरि दुनिया की सबसे घातक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ से लैस है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है.

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