हरी सब्जी नहीं तो क्या हुआ! राजस्थान की ये 5 देसी डिशें स्वाद में लाजवाब, थाली बना देंगी शाही और खास
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Rajasthani Cuisine : राजस्थान की पारंपरिक रसोई में बिना हरी सब्जियों के भी स्वाद की भरमार मिलती है. पापड़, राबोड़ी, मंगोड़ी, पिटोल और गट्टे जैसी डिशें कम सामग्री में तैयार होकर थाली को खास बना देती हैं. देसी मसालों और दही की ग्रेवी से सजी ये रेसिपी आज भी गांवों से लेकर शहरों तक स्वाद और परंपरा की पहचान हैं.
राजस्थान की पारंपरिक रसोई में पापड़ की सब्जी खास पहचान रखती है. यहां पापड़ केवल दही की हल्की मसालेदार ग्रेवी में ही नहीं, बल्कि पापड़ मेथी के रूप में भी बनाया जाता है, जिसमें सूखी मेथी और देसी मसालों का तड़का लगाया जाता है. इसमें टमाटर की ग्रेवी का इस्तेमाल नहीं होता, बल्कि दही, लाल मिर्च, हल्दी और हींग से ही इसका असली स्वाद उभरता है. कम सामग्री में बनने वाली यह सब्जी अचानक आए मेहमानों के लिए भी झटपट तैयार हो जाती है.
राबोड़ी की सब्जी मारवाड़ क्षेत्र की पारंपरिक और टिकाऊ डिश है. बेसन या मट्ठे से तैयार सूखी राबोड़ी को पहले भिगोया जाता है, फिर मसालों के साथ पकाकर गाढ़ी सब्जी बनाई जाती है. पुराने समय में जब ताजी सब्जियां आसानी से उपलब्ध नहीं होती थीं, तब यह रसोई की बड़ी जरूरत थी. इसकी हल्की खटास और देसी मसालों की खुशबू भूख बढ़ा देती है. आज भी गांवों में इसे बड़े चाव से बाजरे की रोटी के साथ खाया जाता है.
मंगोड़ी की सब्जी दाल से बनी छोटी-छोटी सूखी बड़ियों से तैयार होती है. इन्हें घी या तेल में हल्का भूनकर मसालेदार दही या प्याज की ग्रेवी में पकाया जाता है. मंगोड़ी लंबे समय तक सुरक्षित रहती है, इसलिए पहले से बनाकर स्टोर कर ली जाती थी. बारिश या गर्मी – हर मौसम में यह थाली को खास बना देती है. इसका देसी स्वाद और हल्की कुरकुराहट इसे और भी लाजवाब बना देती है.
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पिटोल बेसन से बनने वाला पारंपरिक व्यंजन है, जिसमें बेसन को मसालों के साथ पकाकर जमाया जाता है और फिर टुकड़ों में काटकर सब्जी तैयार की जाती है. इसे दही या साधारण मसालेदार ग्रेवी में पकाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और निखर जाता है. यह डिश मेहनत और धैर्य से बनती है, इसलिए खास मौकों पर बनाई जाती है. पिटोल की मुलायम बनावट और देसी मसालों का मेल इसे अलग पहचान देता है.
गट्टे की सब्जी राजस्थान की सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक डिशों में से एक है. बेसन के आटे से बने गट्टों को उबालकर काटा जाता है और फिर दही आधारित मसालेदार ग्रेवी में पकाया जाता है. इसमें सौंफ, धनिया और लाल मिर्च का खास स्वाद होता है, जो इसे अन्य सब्जियों से अलग बनाता है. बिना हरी सब्जी के भी यह पूरी थाली को संतुलित और स्वादिष्ट बना देती है. शादी-ब्याह से लेकर त्योहारों तक, गट्टे की सब्जी राजस्थान की शान बनी रहती है.