Pablo Escobar Vs Lawrence Bishnoi: crime syndicate global underworld | lawrence bishnoi want to become Indias pablo escobar | क्या लॉरेंस बिश्नोई सच में बन सकता है भारत का अगला पाब्लो एस्कोबार? सपना या भ्रम!

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Pablo Escobar Vs Lawrence Bishnoi: क्या पाब्लो एस्कोबार की तरह लॉरेंस बिश्नोई ग्लोबल टेरर सिंडिकेट की राह पर चल पड़ा है? अपराध की दुनिया में दशकों पहले एक नाम गूंजता था पाब्लो एस्कोबार का. कोलंबिया का वो ड्रग लॉर्ड, जिसने अपनी समानांतर सरकार चलाई और अमेरिका सहित पूरी दुनिया के लिए सिरदर्द बन गया. साल 1989 में फोर्ब्स पत्रिका ने एस्कोबार को दुनिया का सातवां सबसे अमीर आदमी घोषित किया था. इसकी अनुमानित निजी संपत्ति 30 अरब अमेरिकी डॉलर थी. सालों बाद भारत में भी एक नाम उसी तरह की ‘कल्ट इमेज’ और ‘ग्लोबल नेटवर्क’ की ओर बढ़ता दिख रहा है. भले ही एस्कोबार का साम्राज्य कोकीन पर टिका था और लॉरेंस का नेटवर्क जबरन वसूली, हत्या और नार्को-टेरर पर, लेकिन दोनों के काम करने के तरीके में काफी समानताएं नजर आ रही हैं. जानें दोनों में क्या-क्या समानाताएं हैं.

कोलंबिया के मेडेलिन शहर की संकरी गलियों में एक युवक बड़ा हो रहा था, जिसका नाम था पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गाविरिया. 1949 में जन्मा यह लड़का छोटे-मोटे अपराधों से अपराध की दुनिया में एंट्री लिया. कब्रिस्तान से पत्थर चुराकर नाम मिटाना और बेचना, कार चोरी. लेकिन जल्द ही उसने कोकेन के कारोबार में कदम रखा, और 1970 के दशक में मेडेलिन कार्टेल का सरगना बन गया. एस्कोबार ने अमेरिका में 80% कोकेन की सप्लाई नियंत्रित की, सालाना अरबों डॉलर कमाए और दुनिया के सबसे अमीर अपराधियों में शुमार हुआ.

लॉरेंस बिश्नोई औ पाब्लो एस्कोबार की कहानी में क्या समानताएं?

दूसरी तरफ, भारत के पंजाब के फाजिल्का जिले के एक छोटे गांव दुतारांवाली में 1993 में जन्मा लॉरेंस बिश्नोई. जिसका असली नाम बालकरण बरार था. एक किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाला यह युवक चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में कानून की पढ़ाई करने गया, जहां छात्र राजनीति में उलझा. 2011 में उसकी मंगेतर काजल की अपराधियों द्वारा आग लगाकर हत्या कर दी गई और यहीं से उसकी अपराध की दुनिया में एंट्री हुई. छोटे-छोटे झगड़ों से शुरू कर उसने गैंग बनाई जो अब 700 से ज्यादा शार्पशूटर्स वाली बन चुकी है. एक्सटॉर्शन, ड्रग्स और हथियारों की स्मगलिंग, टारगेट किलिंग्स बिश्नोई का गैंग पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली से फैला. 2022 में पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या, बॉलीवुड स्टार सलमान खान को धमकियां और बाबा सिद्दीकी का कत्ल ये सब उसके नाम से जुड़े. 2015 से जेल में होने के बावजूद वह स्मगल्ड फोनों से अपना साम्राज्य चला रहा है.

दोनों अपराध की दुनिया में कैसे आए?

दोनों की कहानियां समानताओं से भरी हैं, लेकिन स्केल अलग. एस्कोबार की तरह बिश्नोई ने भी छोटे अपराधों से शुरुआत की. एस्कोबार कार चोरी से, बिश्नोई छात्र गुटों के झगड़ों से. दोनों ने व्यक्तिगत त्रासदियों के जरिए अपराध की दुनिया में कदम रखा. एस्कोबार गरीबी से, बिश्नोई मंगेतर की मौत से. एस्कोबार ने राजनीति में घुसपैठ की, बिश्नोई ने सेलिब्रिटीज और नेताओं को निशाना बनाकर सुर्खियां बटोरीं. हिंसा दोनों का हथियार रही. एस्कोबार ने हजारों मारे, सरकार से युद्ध किया. बिश्नोई ने टारगेटेड असैसिनेशन से डर फैलाया, जैसे मूसेवाला और सिद्दीकी. लेकिन जहां एस्कोबार का साम्राज्य ग्लोबल था अमेरिका, यूरोप तक कोकेन का जाल. वहीं बिश्नोई का अभी क्षेत्रीय है, हालांकि अंतरराष्ट्रीय हो रहा है.

जानिए दोनों में क्या-क्या सामानताएं हैं?

1- जेल से साम्राज्य: एस्कोबार का ‘ला कैटेड्रल’ बनाम लॉरेंस की ‘साबरमती’

पाब्लो एस्कोबार ने अपनी मर्जी से ‘ला कैटेड्रल’ नामक जेल बनवाई थी, जहां से वह अपना पूरा कार्टेल चलाता था. लॉरेंस बिश्नोई भी पिछले कई सालों से जेल में बंद है, लेकिन जेल की दीवारें उसके लिए कभी बाधा नहीं बनीं. जेल के भीतर से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना, टीवी इंटरव्यू देना और विदेश में बैठे अपने भाई अनमोल बिश्नोई और गोल्डी बराड़ को निर्देश देना, उसे एस्कोबार की तरह एक ‘रिमोट कंट्रोल डॉन’ बनाता है.

2- ‘रोबिन हुड’ की छवि का इस्तेमाल

एस्कोबार ने कोलंबिया के गरीबों के लिए घर बनवाए और फुटबॉल मैदान दिए ताकि उसे ‘मसीहा’ समझा जाए. लॉरेंस बिश्नोई ने खुद को एक ‘राष्ट्रवादी’ और ‘धार्मिक रक्षक’ (जैसे काले हिरण मामले में सलमान खान को धमकी) के रूप में पेश किया है. वह सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को अपनी विचारधारा से जोड़ रहा है, जिससे उसे एक ‘गैंगस्टर’ के बजाय एक ‘कल्ट लीडर’ की छवि मिल रही है.

3- ग्लोबल सिंडिकेट: अंतरराष्ट्रीय चेहरा बनने की होड़

पाब्लो एस्कोबार ने अमेरिका और यूरोप तक अपना कोकीन फैलाया था. लॉरेंस बिश्नोई भी अब भारत की सीमाओं को लांघ चुका है. आज बिश्नोई गैंग के गुर्गे कनाडा, अमेरिका, अजरबैजान, पुर्तगाल और यूएई में बैठे हैं. सिद्धू मूसेवाला की हत्या से लेकर कनाडा में हुई हालिया फायरिंग और विदेशी धरती पर खालिस्तानी आतंकियों को निशाना बनाने की खबरों ने लॉरेंस को एक ‘ग्लोबल नार्को-टेरर’ चेहरा बना दिया है. वह अब केवल एक स्थानीय गैंगस्टर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है.

4- सरकार और सिस्टम को सीधी चुनौती

एस्कोबार का नारा था “Plata o Plomo” (चांदी या सीसा-यानी रिश्वत लो या गोली खाओ). लॉरेंस बिश्नोई का सिंडिकेट भी इसी तर्ज पर काम कर रहा है. बड़े बिल्डरों, गायकों और राजनेताओं को सीधे तौर पर रंगदारी के लिए धमकाना और बात न मानने पर दिनदहाड़े हत्या करना, सरकारी तंत्र को उसकी सीधी चुनौती है.

5- क्या लॉरेंस बिश्नोई ‘नया एस्कोबार’ बन चुका है?

क्राइम एंगल से देखें तो लॉरेंस बिश्नोई ‘डिजिटल युग का एस्कोबार’ बनने की दिशा में बहुत आगे निकल चुका है. जहां एस्कोबार के पास रेडियो और सैटेलाइट फोन थे, वहीं लॉरेंस के पास एन्क्रिप्टेड ऐप्स और सोशल मीडिया की ताकत है. उसका नेटवर्क अब अब अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर और गैंग के मॉड्यूल के साथ मिलकर काम करने के आरोपों से भी घिर चुका है.

अभी मेक्सिको के सबसे बड़े ड्रग माफिया एल मेंचो की हत्या की चर्चा हो रही है, जिसे सिक्योरिटी फोर्स ने मौत के घाट उतार दिया. बात अगर लॉरेंस बिश्नोई की करें तो भारत में संगठित अपराध की दुनिया में उनका नाम चर्चाओं में है. हत्या, रंगदारी, गैंग नेटवर्क से वह मीडिया की सुर्खियों में रहता है. लेकिन एस्कोबार का पैमाना अलग था. वह एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल का चेहरा था. लेकिन भारत में कानून-व्यवस्था, जांच एजेंसियां और न्याय प्रणाली कहीं अधिक सशक्त और केंद्रीकृत हैं, जिससे किसी भी अपराधी का उस स्तर तक पहुंचना अत्यंत कठिन है. लॉरेंस बिश्नोई और पाब्लो एस्कोबार की तुलना सुर्खियां जरूर बना सकती है, लेकिन जमीनी हकीकत में दोनों का पैमाना अलग है.

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