सिलबट्टे का स्वाद, सरगुजा का देसी चिकन, खुशबू ऐसी कि पड़ोसी भी पूछें रेसिपी – Chhattisgarh News
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Silbatta desi chicken sarguja style recipe : सरगुजा के गांवों में सरिता द्वारा सिलबट्टे पर पिसे मसालों से बिना केमिकल, शुद्ध देशी चिकन पारंपरिक अंदाज़ में बनता है, जिसका स्वाद और खुशबू लोगों को बार बार खाने पर मजबूर कर देती है. छत्तीसगढ़ में इसे खूब पसंद किया जाता है.
Nonveg Recipe : छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग चिकन को पारंपरिक देशी अंदाज़ में बनाना पसंद करते हैं. यहां चिकन बनाने का तरीका बिल्कुल अलग और पूरी तरह शुद्ध होता है, जो होटलों में बनने वाले चिकन से काफी अलग माना जाता है. गांवों में चिकन बनाने के लिए आज भी सिलबट्टे पर मसाले पीसे जाते हैं, जिससे स्वाद और खुशबू दोनों लाजवाब हो जाते हैं. इस देसी चिकन का रंग देखने में भले ही गहरा और चटख लगे, लेकिन इसमें किसी भी तरह का केमिकल या रंग नहीं मिलाया जाता.
यह पूरी तरह प्राकृतिक और देसी मसालों से तैयार किया जाता है. जब यह चिकन चूल्हे पर पकता है, तो उसकी खुशबू से ही मुंह में पानी आ जाता है. यही वजह है कि गांवों में लोग देशी स्टाइल चिकन को बड़े चाव से खाते हैं और इसे खास मौकों पर जरूर बनाया जाता है. इस देशी चिकन को बनाना न सिर्फ आसान है, बल्कि इसका स्वाद ऐसा होता है कि जो एक बार खा ले, वह बार-बार खाने की इच्छा करता है. आइए जानते हैं देशी स्टाइल चिकन बनाने की आसान और पारंपरिक रेसिपी
सिलबट्टे पर पिसते हैं देसी मसाले
सरिता ने लोकल 18 को बताया कि गांव में चिकन बनाने की शुरुआत मसालों से होती है. सबसे पहले हल्दी, लाल मिर्च, लहसुन, अदरक और प्याज को सिलबट्टे पर पीसा जाता है. इसी देसी तरीके से पिसे मसाले चिकन को असली स्वाद और खुशबू देते हैं, जो मिक्सर में पिसे मसालों से बिल्कुल अलग होता है.
कढ़ाही में धीमी मेहनत, तेज़ आंच का कमाल
इसके बाद कढ़ाही में तेल गर्म कर इन मसालों को अच्छी तरह भुना जाता है. जब मसाला तेल छोड़ने लगता है, तभी उसमें चिकन डाला जाता है. चिकन को तेज आंच पर लगातार भूनते हैं, जिससे वह धीरे-धीरे अपने आप लाल रंग पकड़ लेता है. यही देसी चिकन की सबसे बड़ी पहचान है.
सरिता ने बताया कि इस देसी रेसिपी में नमक हमेशा चिकन के अच्छे से भुन जाने के बाद डाला जाता है, जबकि हल्दी पहले ही मसाले में रहती है. इसके बाद थोड़ा सा पानी डालकर रस्सा तैयार किया जाता है और अंत में ऊपर से बारीक कटी हरी धनिया डाली जाती है.
बिना रंग, बिना केमिकल पूरी तरह शुद्ध देशी चिकन का स्वाद
सरिता ने साफ कहा कि इस देसी चिकन में किसी भी तरह का आर्टिफिशियल रंग या केमिकल नहीं डाला जाता. मसाले सिलबट्टे पर पिसे होते हैं और चिकन पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से पकता है, जिससे स्वाद और सेहत दोनों का पूरा ध्यान रखा जाता है
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7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें