स्वाद, सेहत और ताजगी का बेहतरीन संगम

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गाजीपुर के बाजारों में बलिया की लाल मिर्च की मांग तेजी से बढ़ रही है. व्यापारियों के अनुसार, यह मिर्च न केवल अपने आकर्षक रंग और स्वाद के कारण लोकप्रिय है, बल्कि इससे किसानों को भी फायदा हो रहा है. बलिया से रोजाना 30-40 किलो मिर्च ₹100 प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है. स्थानीय लोग इसे आचार, चटनी, मसाला पाउडर और तड़के में इस्तेमाल करते हैं. इस मिर्च में कैप्साइसिन, एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं, जो इसे सेहत के लिए फायदेमंद बनाते हैं.

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गाजीपुर. बाजारों में इन दिनों बलिया की खास लाल मिर्च अपनी चमक बिखेर रही है. ठेले पर सजी यह मिर्च न केवल देखने में आकर्षक है, बल्कि स्वाद और सेहत के मामले में भी लाजवाब है. मिश्रबाजार और महुआबाग के व्यापारियों का कहना है कि बलिया की यह लाल मिर्च न सिर्फ ग्राहकों को पसंद आ रही है, बल्कि इससे किसानों को भी सीधा लाभ मिल रहा है। स्थानीय बाजारों में सीजनल सब्ज़ियों और मसालों की बढ़ती मांग ने क्षेत्रीय खेती को नया सहारा दिया है. विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी देसी किस्में स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ पारंपरिक स्वाद और खान-पान की पहचान भी बनाए रखती हैं.

बलिया से आ रही है लाली
एक स्थानीय विक्रेता ने बताया कि वह बलिया से लगभग 20 किलोमीटर दूर से इस खास मिर्च को मंगा रहे हैं. वे रोजाना 2-3 बोरा मिर्च लाकर गाजीपुर में बेचते हैं, पिछले तीन दिनों से लगातार डिमांड बनी हुई है, जहां रोज औसतन 30 से 40 किलो मिर्च ₹100 प्रति किलो के भाव से बिक रही है.

स्वाद का खजाना – भरवां मिर्चवा और चटनी
स्थानीय लोग इसे भरवा मिर्चा आचार के लिए सबसे उपयुक्त मान रहे हैं. मिर्च को धूप दिखाकर खटाई और मसालों के साथ साल भर के लिए स्टोर किया जाता है. स्थानीय स्वाद की बात करें तो रीमा देवी कहती हैं – “एही मिर्च से घर में हमनी मिर्चवा के अचार, लाल मिर्ची के चटनी, मसाला पीस के पाउडर, भरवां मिर्चवा आ तड़का खातिर तेलो बनवले जाला, जेकर स्वाद बड़ा लाजवाब होला. इसके अलावा मिर्च का कुचला (अदरक-लहसुन के साथ) भी खूब बनाया जा रहा है.

क्या कहती है रिसर्च?
भारत में उगाई जाने वाली इस लाल मिर्च (Capsicum annuum) में कैप्साइसिन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. यह न केवल तीखापन देता है, बल्कि इसमें एंटीऑक्सीडेंट और सूक्ष्मजीवरोधी गुण भी होते हैं. यह विटामिन C, कैरोटेनॉयड्स और आवश्यक खनिजों का अच्छा स्रोत है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इसे सही तरीके से सुखाया और प्रसंस्कृत किया जाए, तो इसका रंग और तीखापन लंबे समय तक बना रहता है. भारत आज इस मिर्च के दुनिया के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है.

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Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

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