राज्यसभा जंग में आरजेडी की नई चाल से बदल जाएगा सियासी खेल! पांचवीं सीट के लिए बड़ा दांव, ओवैसी को लेना होगा फैसला
पटना. बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासत तेज हो गई है. पांच सीटों में से चार पर एनडीए की जीत पक्की मानी जा रही है, लेकिन असली मुकाबला पांचवीं सीट को लेकर है. इसी सीट के लिए RJD ऐसी चाल चलने की तैयारी में है, जिससे AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) पर समर्थन देने का दबाव बन सकता है. सूत्रों के मुताबिक राजद मुस्लिम चेहरे को आगे कर विपक्षी एकजुटता का संदेश देना चाहती है. आरजेडी के कुछ नेताओं ने इशारों में साफ किया है कि अगर साझा उम्मीदवार के तौर पर मजबूत मुस्लिम चेहरा उतारा जाता है तो AIMIM के लिए विरोध करना आसान नहीं होगा.
मुस्लिम कार्ड से बदलेगा समीकरण
आरजेडी का नया फॉर्मूला, ओवैसी की मुश्किल
मुस्लिम कार्ड खेलने का आरजेडी का दांव
राजनीति के जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ चुनावी गणित नहीं, बल्कि संदेश की राजनीति भी है. आरजेडी यह दिखाना चाहती है कि वह मुस्लिम प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता दे रही है. ऐसे में AIMIM के लिए अलग राह चुनना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. क्योंकि, राज्यसभा चुनाव जितना अंकगणित का खेल है, उतना ही रणनीति और साझेदारी का भी सवाल है.ऐसे में आरजेडी नेता का सुझाव है कि अल्पसंख्यक उम्मीदवार को साझा नाम देना अधिक फायदेमंद हो सकता है.
AIMIM का रुख और सियासी दबाव
लेकिन, दूसरी ओर पेच AIMIM ने फंसा दिया है क्योंकि पार्टी ने अपना उम्मीदवार उतारने की बात कह दी है. बता दें कि AIMIM पहले ही संकेत दे चुकी है कि वह अपना उम्मीदवार उतार सकती है. AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने अलग रुख अपनाया है. उन्होंने साफ कहा है कि उनकी पार्टी राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार देगी और इसके लिए विपक्षी दलों का सहयोग मांगा है. उनका कहना है कि अगर विपक्ष को सांप्रदायिक ताकतों को रोकना है तो सभी को साथ मिलकर काम करना चाहिए.
AIMIM भी उतरा मैदान में
अब AIMIM की दावेदारी से पिछले दिनों से उठी चर्चाओं को और बल मिला है. अब यह साफ नहीं है कि AIMIM अपना उम्मीदवार अकेले उतारेगी, या RJD और अन्य दलों के साथ समझौता कर कोई साझा नाम तय करेगी. लेकिन अगर RJD साझा नाम पर सहमति बनाकर विपक्षी दलों को साथ ले आती है तो AIMIM पर रणनीतिक दबाव बनेगा. दरअसल, ओवैसी की पार्टी बिहार में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करना चाहती है. ऐसे में यह फैसला आसान नहीं होगा कि वह अलग राह चुने या विपक्षी एकजुटता का हिस्सा बने.
हिना शहाब कौन हैं?
हिना शहाब पूर्व सांसद शहाबुद्दीन की पत्नी हैं. उनके पति शहाबुद्दीन बिहार की राजनीति में काफी चर्चित नाम रहे हैं. परिवार की राजनीतिक पहचान की चर्चा बिहार में लंबे समय से रहती आई है. हिना शहाब ने 2009 में लोकसभा चुनाव RJD के टिकट पर लड़ा था, लेकिन जीत नहीं पाईं. 2024 में वे निर्दलीय मैदान में उतरीं, लेकिन उसमें भी जीत नहीं मिली. हालांकि उनके बेटे ओसामा शहाब को 2025 के विधानसभा चुनाव में RJD से टिकट मिला और जीत भी हासिल हुई. इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण हिना शहाब का नाम राज्यसभा की पांचवीं सीट के लिए चर्चा में है.
ओवैसी को करना पड़ सकता है फैसला
राजनीति के जानकार भी मानते हैं कि राज्यसभा चुनाव संख्या बल का खेल जरूर है, लेकिन राजनीतिक संदेश भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है. पांचवीं सीट पर RJD की यह रणनीति विपक्षी खेमे की एकजुटता की परीक्षा बन सकती है. अब नजर इस बात पर है कि क्या AIMIM साझा फॉर्मूला स्वीकार करेगी या मुकाबले को त्रिकोणीय बनाएगी. बिहार की राजनीति में यह दांव आने वाले दिनों में कई नए समीकरण गढ़ सकता है, कई समीकरण बदल सकता है. अब यह देखने वाली बात होगी कि विपक्ष के दल किस तरह से समझौता और फॉर्मूला तैयार करते हैं और क्या वे सभी मिलकर हिना शहाब जैसे साझा नाम पर सहमत हो पाते हैं.