23 फरवरी को जन्मे बच्चों का कैसा रहेगा भविष्य, ग्रह-नक्षत्रों का क्या पड़ेगा प्रभाव, ज्योतिषी से जानें सबकुछ
अयोध्या: मानव जीवन में ज्योतिष शास्त्र का विशेष महत्व माना जाता है. ज्योतिषीय गणना के आधार पर ही व्यक्ति के भविष्य और कुंडली का आकलन किया जाता है. प्रतिदिन ग्रह गोचर की स्थिति में बदलाव भी होता है. जिसका प्रभाव मानव जीवन पर शुभ और अशुभ स्थिति में रहता है. ऐसी स्थिति में प्रतिदिन ग्रह गोचर के बदलाव से व्यक्ति के जीवन पर भी इसका गहरा प्रभाव रहता है. तो दूसरी तरफ इस दिन अगर किसी बच्चे का जन्म होता है तो उस बच्चे पर भी इसका प्रभाव माना जाता है. ऐसी स्थिति में आज 23 फरवरी है और आज के दिन ग्रह नक्षत्र की कैसी स्थिति रहेगी. आज के दिन जन्म लेने वाले बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ेगा. इन तमाम सवालों का जवाब आज हम आपको इस रिपोर्ट में विस्तार से बताएंगे तो चलिए जानते हैं.
23 फरवरी 2026 को जन्मे बच्चों में नेतृत्व और आध्यात्मिक झुकाव के संकेत
अयोध्या के आचार्य सीताराम दास ने बताया कि 23 फरवरी 2026 को जन्म लेने वाले बच्चों की ग्रह-नक्षत्र स्थिति के अनुसार उनका स्वभाव, व्यक्तित्व और भविष्य की संभावनाएं विशेष मानी जाएंगी. इस दिन चंद्रमा धनु राशि में स्थित रहेगा, जो कि गुरु ग्रह की राशि है. गुरु को ज्ञान, धर्म, शिक्षा और उच्च आदर्शों का कारक माना जाता है. इसलिए इस दिन जन्म लेने वाले बच्चों में स्वाभाविक रूप से नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक झुकाव देखने को मिल सकता है.
आत्मविश्वास, रचनात्मकता और नेतृत्व के संकेत
नक्षत्र की बात करें तो रात 8:07 बजे तक पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र रहेगा उसके बाद उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रारंभ होगा. पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है, जो सौंदर्य, कला, आकर्षण और रचनात्मकता का प्रतीक है.इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले बच्चे आत्मविश्वासी, मिलनसार और अपने विचारों पर दृढ़ रहने वाले हो सकते हैं.वहीं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है जो प्रतिष्ठा, नेतृत्व और दृढ़ निश्चय का प्रतिनिधित्व करता है.इस नक्षत्र में जन्मे जातक लक्ष्य के प्रति समर्पित और समाज में सम्मान पाने वाले होते हैं.
शुक्ल पंचमी और शुभ योग का संयोग, भद्रा काल में सावधानी की सलाह
तिथि शुक्ल पक्ष की पंचमी दोपहर 1:02 बजे तक रहेगी.उसके बाद षष्ठी तिथि प्रारंभ होगी. शुक्ल पक्ष में जन्म को सामान्यतः शुभ माना जाता है क्योंकि यह बढ़ती चंद्र कला का प्रतीक है, जो प्रगति और विकास का संकेत देता है. शुभ योग का निर्माण इस दिन को और भी सकारात्मक बनाता है. हालांकि दोपहर 1:56 बजे तक विष्टि करण रहेगा.जिसे भद्रा भी कहा जाता है. इसलिए उस समय महत्वपूर्ण कार्यों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. इसके बाद बव करण शुरू होगा, जो सामान्य कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है.
नामकरण के शुभ अक्षर और धनु राशि के जातकों की विशेषताएं
नामकरण के लिए यदि बच्चा पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में जन्मा है तो भू, धा, फा, ढा अक्षर से नाम रखना शुभ रहेगा. यदि जन्म उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में हुआ है तो भे, भो, जा, जी अक्षर से नाम रखना उत्तम माना जाएगा .धनु राशि के जातक सामान्यतः साहसी, आशावादी और स्पष्टवादी होते हैं. इन्हें स्वतंत्रता पसंद होती है और ये जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं. शिक्षा, प्रशासन, अध्यापन, धर्म, कानून और खेल जैसे क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर सकते हैं.