Indian Army Operation against Jaish-e-Mohammed | How Indian Army Successfully Destroyed Jaish e Mohammad Hideouts | Exclusive: कम्युनिकेशन ब्रेकडाउन और हाई-एल्टीट्यूड ठिकानों का खुलासा; एनकाउंटर के बाद जैश में ‘पैनिक मोड’
Last Updated:
जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना आंतकवाद का कमर तोड़ दिया है. इसके पीछे भारतीय सेना का आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति है. आतंकवाद के खिलाफ घाटी में सेना को इतनी बड़ी सफलता कैसे मिली? सेना कैसे अब विपरीत परिस्थिति में भी आतंकियों के खिलाफ सफल ऑपरेशन चला रही है. आखिर क्या है सेना की सफलता की असली वजह, जानें

आतंकवाद के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में सेना को कैसे मिली सफलता?
किश्तवाड़ में रविवार को जैश-ए-मोहम्मद नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है. सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के आतंकी ग्रुप से जुड़े तीन आतंकवादियों को मार गिराया है. टॉप इंटेलिजेंस सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन त्राशी-I के बाद जम्मू में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को थ्रेशहोल्ड लेवल से नीचे धकेल दिया गया है. इन मारे गए तीन आतंकवादियों में एक जैश कमांडर सैफुल्लाह बलूच था, जो घाटी में युवकों को भटकाकर आतंकवाद में धकेलने का काम करता था. वह घाटी में कई हमलों में वांटेड था.
इंटेलिजेंस सूत्रों ने News18 को बताया कि भारतीय सुरक्षा बलों ने लोकल कमांड स्ट्रक्चर और कम्युनिकेशन पर हमला किया है. इसके साथ ही डोडा-किश्तवाड़ बेल्ट में उनके दूर और ऊंचाई वाले ठिकानों पर हमला फोकस करके जैश को सफलतापूर्वक पैनिक मोड में डाल दिया है. जैश को सबसे बड़ी चोट पाकिस्तान के रहने वाले आतंकी सैफुल्लाह बलूच की मौत से लगी होगी, क्योंकि इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों के खिलाफ कई हमलों को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार एक कुख्यात घुसपैठिया बताया जाता था.
सूत्रों ने कहा कि सैफुल्लाह और उसके दो पाकिस्तानी साथियों के मारे जाने से जैश का लोकल कमांड स्ट्रक्चर बुरी तरह खत्म हो गया है. भविष्य में वे हमला करने के लायक भी नहीं बचे हैं.
आतंकवादियों के खिलाफ इंटेलिजेंस ने किया सटीक काम
सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन त्राशी-I चटरू बेल्ट के दूर-दराज के जंगली पासेरकुट इलाके में हुआ. कई एजेंसियों वाली टीम जैसे कि भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने इंटेलिजेंस से चलने वाले डेटा का इस्तेमाल करके आतंकवादियों को एक खानाबदोश झोपड़ी तक ट्रैक किया. सेना की भीषण गोलीबारी के दौरान उस झोपड़ी में आग लग गई, जिसमें कि आतंकी छिपे हुए थे. सुरक्षा बलों ने बाद में वहां से दो AK-47 राइफलों के साथ बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया.
सुरक्षा के लिए अहम कदम
रक्षा सूत्रों ने बताया कि ऑपरेशन की कामयाबी इलाके की सुरक्षा में एक अहम है. इंटेलिजेंस रिपोर्ट्स बताती हैं कि जैश के बचे हुए मेंबर पैनिक मोड में चले गए हैं, जो उनके लॉजिस्टिक और कम्युनिकेशन सिस्टम का पूरी तरह से फेल्योर होने का सबसे बड़ा सबूत है. सेना ने इस ग्रुप से उसके एडवांस्ड इक्विपमेंट छीन लिए हैं. सिक्योर अल्ट्रा सेट या सैटेलाइट फोन इस्तेमाल करने के बजाय, वे पकड़े जाने के बहुत डर से लोकल लोगों से मोबाइल फोन छीनने के पुराने तरीके पर आ गए हैं.
मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन
एक सोर्स ने कहा, ‘यह ऑपरेशन मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन, सटीक इंटेल और टेररिस्ट को जगह न देने में फॉरवर्ड डिप्लॉयमेंट के असर को दिखाता है.’ उन्होंने बताया कि इस ग्रुप के पास अब बड़े पैमाने पर हमले करने या अपना दायरा बढ़ाने की क्षमता काफी लिमिटेड हो गई है. सोर्स ने कहा कि इस साल जम्मू इलाके में जैश के 7 टेररिस्ट मारे गए हैं, जिसमें दो जैश के कमांडर भी शामिल हैं. लगातार ऑपरेशन से आंतक के खतरे को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया गया है.
ऊंचाई पर फोकस
सोर्स ने कहा कि दूर और ऊंचाई वाले ठिकानों पर फोकस करके, सिक्योरिटी फोर्स ने घुसपैठ को रोका है और अपनी मजबूती बनाए रखी है. यह स्ट्रेटेजिक कंट्रोल यह पक्का करता है कि दुश्मन एक्टर्स को अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए जरूरी जगह न मिले, जिससे जैश नेटवर्क के पास जम्मू के पूर्वी जिलों में काम करने की बहुत कम क्षमता बचे.
About the Author
दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें