टाइसन… इंडियन आर्मी का वो साइलेंट वॉरियर, जिसने आतंकियों की मांद में घुसकर मचाया कत्लेआम
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किश्तवाड़ एनकाउंटर: जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ में जारी एनकाउंटर में इंडियन आर्मी के एलीट कैनाइन वॉरियर टायसन को आतंकवादियों को ट्रैक करते समय गोली लग गई. टायसन ने जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी आदिल के सीक्रेट ठिकाने का पता लगाकर उसे खत्म करने में अहम भूमिका निभाई. आज के ऑपरेशन में गोली लगने के बाद, टायसन को इलाज के लिए उधमपुर के आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया. वह ट्रैकिंग और एक्सप्लोसिव का पता लगाने में सेना का मदद करता है.

टाइसन का उधमपुर आर्मी अस्पताल में इलाज चल रहा है.
किश्तवाड़ एनकाउंटर: किश्तवाड़ की जंगलों में आज सुबह से जारी मुठभेड़ में सेना के जवानों ने दो आंतकवादियों को मार कर कमाल तो दिखाया है लेकिन, सबसे ज्यादा चर्चा सेना के स्पेशल साइलेंट वॉरियर टाइसन की हो रही है. टाइसन ने रविवार 11 बजे सुबह से जारी मुठभेड़ में आतंकवादियों के हाइडआउट का पता लगाने में मदद किया. इस दौरान वह आतंकियों की गोली से घायल भी हो गया. मगर वह हार न मानते हुए जवानों को उनके हाइडआउट ले गया. गोली लगने से घायल टाइसन को तुरंत एयरलिफ्ट कर उधमपुर आर्मी हॉस्पिटल ले जाया गया. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक उसकी स्थिति सामान्य बनी हुई है.
सेना की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, टाइसन कई बड़े ऑपरेशनों में अपनी अहम भूमिका निभा चुका है. सर्च ऑपरेशन के दौरान संदिग्ध ठिकानों की पहचान करना, विस्फोटक सामग्री का पता लगाना और आतंकियों की मौजूदगी की सटीक सूचना देना ये सब उसकी खास ट्रेनिंग का हिस्सा है. जैश के आतंकी आदिल को मारने में टाइसन ने ही जवानों की मदद की थी. सुरक्षाबलों के साथ सबसे आगे रह कर उसने आतंकी आदिल के हाइडआउट तक पहुंचने और उसको मारने में मदद की थी.
साइलेंट किलर टाइसन
टाइसन सेना के कई बड़े ऑपरेशनों का हिस्सा रह चुका है. उसकी ट्रेनिंग का स्तर इतना हाई है कि वह संदिग्ध ठिकानों की पहचान करने, विस्फोटक सामग्री खोजने और आतंकियों की सटीक लोकेशन बताने में माहिर है. अभी कुछ ही दिन पहले की बात है, जब जैश-ए-मोहम्मद के खतरनाक आतंकी आदिल को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था. उस ऑपरेशन में टाइसन ने ही सबसे आगे रहकर सुरक्षाबलों का नेतृत्व किया और आदिल के छिपने के ठिकाने (Hideout) तक पहुंचने में मदद की थी. उसकी उसी सटीक सूचना के कारण आदिल को मारना संभव हो पाया था.
कैसे हुआ घायल
इंडियन आर्मी की 2 पैरा स्पेशल फोर्सेज़ के बहादुर K9 ट्रूपर टायसन जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के चटरू इलाके में एक काउंटर-टेरर ऑपरेशन के दौरान घायल हो गया. यह एलीट जर्मन शेफर्ड सबसे पहले टेररिस्ट के ठिकाने (धोक) की ओर बढ़ा और फायरिंग के दौरान गोली लगने से घायल हो गया. गोली लगने के बावजूद, टायसन आगे बढ़ता रहा और ड्यूटी के दौरान जबरदस्त हिम्मत और वफादारी दिखाई. उसे तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए एयरलिफ्ट किया गया. अभी उसकी हालत सुरक्षित और स्टेबल बताई जा रही है.
घायल टाइसन की तस्वीर
उधमपुर में इलाज
जख्मी होने के बावजूद टाइसन की हिम्मत नहीं टूटी. मौके पर मौजूद जवानों ने तुरंत उसे प्राथमिक उपचार दिया. उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे तुरंत सेना के अस्पताल, उधमपुर में शिफ्ट किया गया है. वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम चौबीसों घंटे उसकी निगरानी कर रही है और उसका इलाज जारी है. टाइसन का हैंडलर और उसके साथी जवान उसकी सलामती के लिए प्रार्थना कर रहे हैं.
बेजुबान वीरों का अतुलनीय योगदान
टाइसन जैसे सैन्य डॉग्स को बेहद कठोर ट्रेनिंग दी जाती है. उन्हें हाई-रिस्क परिस्थितियों में काम करने, विशेष कमांड्स को समझने और खतरनाक इलाकों में ट्रैकिंग करने के लिए तैयार किया जाता है. ये बेजुबान वीर बिना किसी डर के मौत के मुंह में भी कूद जाते हैं और अपने हैंडलर के एक इशारे पर अपनी जान की बाजी लगा देते हैं.
जल्द स्वस्थ्य होने की कामना
टाइसन की बहादुरी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि देश की रक्षा का भार केवल इंसानी कंधों पर ही नहीं, बल्कि इन बेजुबान योद्धाओं के साहस पर भी टिका है. आज पूरा देश इस ‘साइलेंट वॉरियर’ के जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है ताकि वह एक बार फिर अपने साथियों के साथ ड्यूटी पर लौट सके.
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दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें