Manglik Non-Manglik Marriage and Kundli Matching। मांगलिक और गैर-मांगलिक शादी के नियम और उपाय

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Manglik Non Manglik Marriage : शादी की बात शुरू होते ही कई घरों में एक शब्द अचानक माहौल बदल देता है “मांगलिक”. चेहरे गंभीर हो जाते हैं, सलाहें आने लगती हैं और कभी-कभी तो रिश्ता यहीं रुक भी जाता है. लेकिन क्या सच में एक मांगलिक और दूसरा गैर-मांगलिक हो तो शादी नहीं हो सकती? ज्योतिष की दुनिया इतनी कठोर नहीं है, जितना अक्सर सुनने में आता है. असल कहानी थोड़ी अलग है, थोड़ी संतुलित. हमने इस विषय पर कई ज्योतिषाचार्यों से बात की और उन परिवारों के अनुभव भी सुने जिनकी शादी इसी स्थिति में हुई. नतीजा साफ है घबराने से पहले समझना ज़रूरी है कि मांगलिक दोष है क्या, कितना है और उसका असर कितना वास्तविक है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह.

मांगलिक दोष आखिर है क्या?
ज्योतिष के अनुसार जब जन्म कुंडली में मंगल ग्रह 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होता है, तब उसे मांगलिक दोष माना जाता है. माना जाता है कि मंगल ऊर्जा, साहस और आक्रामकता का ग्रह है. वैवाहिक जीवन में इसका असंतुलित प्रभाव तनाव या मतभेद ला सकता है. लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है हर मांगलिक दोष समान नहीं होता. कई मामलों में यह दोष अपने आप कमज़ोर या निरस्त भी हो जाता है.

क्या एक मांगलिक और दूसरा गैर-मांगलिक शादी कर सकते हैं?
कुंडली की पूरी तस्वीर देखना जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार सिर्फ यह देख लेना कि एक व्यक्ति मांगलिक है और दूसरा नहीं, पर्याप्त नहीं है. असली विश्लेषण तब होता है जब दोनों की कुंडलियों को साथ रखकर देखा जाए.

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7वें भाव, उसके स्वामी, शुक्र ग्रह और नवांश (D9) कुंडली का विशेष महत्व होता है. कई बार ऐसा भी पाया गया है कि गैर-मांगलिक की कुंडली में अन्य वैवाहिक दोष होते हैं, जिससे संतुलन बन जाता है.

दिल्ली की रहने वाली पूजा और रोहित की शादी इसका उदाहरण है. पूजा मांगलिक थीं, रोहित नहीं. परिवार में चिंता थी, लेकिन विस्तार से कुंडली मिलान और उपायों के बाद शादी हुई. आज 6 साल बाद उनका वैवाहिक जीवन सामान्य और सुखद है.

कब मांगलिक दोष कमज़ोर माना जाता है?
ग्रह स्थिति से बदलता है असर
अगर मंगल अपनी ही राशि मेष या वृश्चिक में हो, या मकर राशि में उच्च का हो, तो उसका नकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है. शुभ ग्रहों की दृष्टि या युति भी दोष को कम करती है.

ज्योतिष में यह भी माना जाता है कि 28 वर्ष की आयु के बाद मंगल का प्रभाव कुछ हद तक संतुलित हो जाता है. इसलिए देर से शादी करने पर कई बार मांगलिक दोष का असर कम देखा गया है.

जब सावधानी जरूरी हो
अगर मंगल 7वें या 8वें भाव में अत्यंत मजबूत स्थिति में हो और साथ ही राहु या शनि की दृष्टि हो, तो विशेषज्ञ बिना उपाय शादी टालने की सलाह देते हैं. नवांश कुंडली में भी मंगल दोष हो तो स्थिति गंभीर मानी जाती है.

उपाय क्या हैं?
परंपरा और विश्वास का संतुलन
मंगल दोष शांति के लिए कुछ पारंपरिक उपाय किए जाते हैं जैसे कुंभ विवाह या पीपल विवाह, मंगलवार को मंगल शांति पूजा, हनुमान या शिव आराधना और महामृत्युंजय मंत्र का जाप. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि उपाय तभी सार्थक हैं जब वे सही विश्लेषण के बाद किए जाएं, केवल डर के कारण नहीं.

डर नहीं, समझदारी
एक मांगलिक और एक गैर-मांगलिक की शादी असंभव नहीं है. असली जरूरत है संपूर्ण कुंडली मिलान, ग्रहों की स्थिति की गहराई से जांच और जरूरत हो तो उचित उपाय. अधूरी जानकारी के आधार पर फैसले लेना कई बार अच्छे रिश्ते खो देने जैसा हो सकता है.

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