‘दूध-दही का खाणा, यो मेरा हरियाणा’..65 साल की दादी ने जीता डिस्कस थ्रो में सिल्वर मेडल, नेशनल में मचाया धमाल
अंबाला: हरियाणा को खेलों की धरती कहा जाता है और यहां के खिलाड़ी हर साल राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन करते हैं. आखिर हरियाणा के खिलाड़ी खेलों में शानदार प्रदर्शन क्यों करते हैं, इस सवाल का जवाब अक्सर हरियाणवी यही कहते हैं- दूध-दही का खाना, यो मेरा हरियाणा. इस कहावत को एक बार फिर हरियाणा के अंबाला जिले की रहने वाली 65 वर्षीय सुशीला कपूर ने सच साबित कर दिखाया है.
बचपन से ही खेलों का शौक
जीत चुकी हैं कई मेडल
फैमिली करती है पूरा सपोर्ट
उन्होंने बताया कि अजमेर में आयोजित नेशनल चैंपियनशिप में 22 राज्यों के लगभग 2000 खिलाड़ियों ने भाग लिया था. यह प्रतियोगिता चार दिन तक चली, जिसमें 30 वर्ष से लेकर 100 वर्ष तक की उम्र के खिलाड़ी शामिल हुए थे. डिस्कस थ्रो प्रतियोगिता में उन्हें सिल्वर मेडल मिला और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए उनका चयन भी हुआ. हालांकि पासपोर्ट न बनने के कारण वह विदेश में आयोजित प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकीं.
स्कूल में बैडमिंटन टीम की कप्तान
सुशीला कपूर का कहना है कि 30 वर्ष की आयु के बाद भी महिलाओं को अवसर मिले तो उन्हें खेलों में जरूर भाग लेना चाहिए और अपने परिवार व प्रदेश का नाम रोशन करना चाहिए. बचपन में वह अपने स्कूल की बैडमिंटन टीम की कप्तान थीं और कॉलेज के समय में भी खेलों में सक्रिय रहीं.
रोजाना करती हैं मैदान में अभ्यास
वह परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ रोजाना मैदान में अभ्यास करती हैं. उनके पति, बेटियां और नाती उन्हें पूरा सहयोग देते हैं. अब उनका लक्ष्य दोबारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भाग लेना है. इसके लिए वह कड़ी मेहनत कर रही हैं और इस बार पहले से ही अपना पासपोर्ट बनवाने की तैयारी में हैं.