Jageshwar Dham Shiv temple Uttarakhand tradition Shivalinga pujan started from here | यहां से शुरू हुई थी शिवलिंग पूजने की परंपरा, हवा भी करती है ॐ का उच्चारण, 2500 साल से ज्यादा पुराना है यह मंदिर!
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Jageshwar Dham Shiv Temple: हम सभी के मन में सवाल रहता है कि आखिर शिवलिंग की पूजा की परंपरा कब से शुरू हुई और कहां पहली बार शिवलिंग का पूजन किया गया था. उत्तराखंड के जागेश्वर मंदिर के बारे में बताया जाता है कि यहीं से पहली बार शिवलिंग पूजने की परंपरा शुरू हुई थी. यहां हवा भी ओम का उच्चारण करती है. आइए जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में…
Jageshwar Dham Shiv Temple: हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं की प्राण-प्रतिष्ठित या फिर स्वयंभू प्रतिमाओं को पूजने करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. देश के हर मंदिर में स्थापित प्रतिमा किसी ना किसी चमत्कार और आस्था से जुड़ी है, लेकिन शिवलिंग की पूजा की परंपरा कहां से शुरू हुई और क्यों शुरू हुई, इसका जवाब किसी के पास नहीं है. महादेव की देवभूमि उत्तराखंड में इसके पीछे की पौराणिक कहानी और जवाब दोनों छिपे हैं. आइए जानते हैं भगवान शिव के इस मंदिर के बारे में…
यहां रखी गई थी शिव पूजा की नींव – लोगों के बीच धारणा है कि 12 ज्योतिर्लिंग ही सबसे प्रभावी शिवालय हैं और शिव की शक्ति का प्रतीक हैं. यह बात सच भी है, लेकिन उत्तराखंड के अल्मोड़ा शहर से लगभग 40 किमी दूर भगवान शिव का ऐसा मंदिर स्थित है, जहां शिव पूजा की नींव रखी गई. हम बात कर रहे हैं जागेश्वर मंदिर की, जिसे जागृत महादेव का मंदिर भी कहा जाता है. पौराणिक मान्यताओं की मानें तो ये जागेश्वर मंदिर वही मंदिर है, जहां पहली बार स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए थे और इसी स्थान पर सप्तऋषियों ने भगवान शिव की पूजा की थी.
मंदिर के प्रांगण में 124 मंदिर – इतना ही नहीं, मंदिर के प्रांगण में 124 बड़े और छोटे मंदिर हैं, जिन्हें देखकर लगता है कि खुद देवी-देवताओं ने स्वर्ग छोड़कर इसी मंदिर में अपना स्थान लिया है. मंदिर में महामृत्युंजय मंदिर, केदारनाथ मंदिर, कुबेर मंदिर और पुष्टि माता समेत कई देवी-देवताओं के मंदिर मौजूद हैं. भक्त भगवान शिव की कृपा के साथ बाकी देवी-देवताओं की विशेष कृपा लेने के लिए दूर-दूर से मंदिर में दर्शन करने के लिए आते हैं.
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मंदिर के आसपास की ऊर्जा बहुत प्रभावशाली – मंदिर की बनावट भी अपने आप में कई रहस्य समेटे हुए है. मंदिर के शिखर ध्रुव तारे की तरफ इशारा करते हैं और घने जंगलों में जब भी हवा चलती है तो ओम की ध्वनि गूंजती है. मंदिर में दर्शन करने वाले भक्तों और ध्यान लगाने वाले साधुओं को इस ध्वनि का कई बार अहसास हुआ है. यही कारण है कि जागेश्वर मंदिर को ध्यान की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ स्थान माना गया है और विज्ञान भी इस बात को मानता है कि मंदिर के आसपास की ऊर्जा बहुत प्रभावशाली है.
2500 से ज्यादा पुराना मंदिर – मंदिर तकरीबन 2500 से ज्यादा पुराना है, और मंदिरों के पत्थरों, पत्थर की मूर्तियों और वेदों पर नक्काशी मंदिर का मुख्य आकर्षण है. मंदिर को सख्त काले चट्टान वाले पत्थर से बनाया गया है, और यही कारण है कि मंदिर आज भी मजबूती से टिका है. सावन के महीने और महाशिवरात्रि पर भक्तों की विशेष भीड़ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचती है और पूरा परिवार हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठता है.