Why Rahul Gandhi Appears in Courts | Rahul Gandhi News- सुलतानपुर से भिवंडी तक, राहुल गांधी ने ऐसा क्या किया कि कोर्ट के काट रहे हैं चक्कर
दरअसल राहुल गांधी के पुराने राजनीतिक बयान अब कानूनी मामलों के रूप में उनके सामने खड़े दिखाई दे रहे हैं. एक मामला गृह मंत्री अमित शाह पर कथित टिप्पणी से जुड़ा है तो दूसरा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर दिए गए बयान से. दोनों ही केस कई साल पुराने हैं, लेकिन अब उनकी सुनवाई तेज हो गई है. यही वजह है कि राहुल गांधी को लगातार कोर्ट में पेश होना पड़ रहा है. इन पेशियों ने राजनीति, कानून और बयानबाजी की सीमाओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है. आइए समझते हैं कि आखिर इन मामलों की पूरी कहानी क्या है.
(फाइल फोटो PTI)
- राहुल गांधी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर स्थित MP/MLA कोर्ट में पेश हुए. यह मामला साल 2018 का है, जब कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने अमित शाह को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी. इस बयान के बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा ने उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. कोर्ट के आदेश पर राहुल गांधी व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया. कोर्ट में उन्होंने जज को नमस्कार किया और करीब 20 मिनट तक सुनवाई चली. अब इस मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च को तय की गई है.
- अगले ही दिन राहुल गांधी महाराष्ट्र के भिवंडी कोर्ट पहुंचे जहां 2014 के एक मानहानि केस में उनकी पेशी हुई. यह मामला RSS को लेकर चुनावी सभा में दिए गए बयान से जुड़ा है. इस केस में उनके जमानतदार शिवराज पाटिल-चाकुरकर के निधन के बाद नया जमानतदार पेश करना जरूरी था. इसी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राहुल गांधी कोर्ट पहुंचे. इस दौरान उनके काफिले का विरोध भी हुआ और भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए. इससे राजनीतिक माहौल और गरमा गया.
राहुल गांधी को सुलतानपुर कोर्ट क्यों जाना पड़ा?
सुलतानपुर कोर्ट में राहुल गांधी की पेशी 2018 में दिए गए एक बयान से जुड़ी है. कर्नाटक चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने अमित शाह पर टिप्पणी की थी. इसे भाजपा नेता ने मानहानिकारक बताते हुए केस दर्ज कराया. कोर्ट ने कई बार पेशी के लिए कहा था और अंततः उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा. राहुल गांधी ने कोर्ट में आरोपों से इनकार किया और इसे राजनीतिक प्रेरित मामला बताया.
भिवंडी कोर्ट का मामला क्या है?
भिवंडी का केस साल 2014 का है. लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने RSS को लेकर विवादित बयान दिया था. इसके बाद आरएसएस कार्यकर्ता राजेश कुंटे ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई. चूंकि उनके पुराने जमानतदार का निधन हो गया था इसलिए कोर्ट में नया जमानतदार पेश करना कानूनी रूप से जरूरी था.
क्या ये मामले नए हैं या पुराने?
दोनों मामले काफी पुराने हैं. एक 2014 और दूसरा 2018 का है. लेकिन कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई अब तेजी से आगे बढ़ रही है. इसलिए राहुल गांधी को हाल के दिनों में लगातार कोर्ट में पेश होना पड़ रहा है.
क्या इन मामलों का राजनीतिक असर भी है?
हां, इन पेशियों का राजनीतिक असर साफ दिखाई दे रहा है. विपक्ष इसे राजनीतिक दबाव बता रहा है, जबकि सत्तापक्ष इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया कह रहा है. अदालतों के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है.
आगे राहुल गांधी को क्या करना होगा?
आगे की सुनवाई में उन्हें या उनके वकीलों को कोर्ट में कानूनी जवाब देना होगा. यदि कोर्ट आरोप तय करती है तो मुकदमा ट्रायल चरण में जाएगा. फिलहाल दोनों मामले न्यायिक प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं.
(फाइल फोटो PTI)
राजनीति और कानून के बीच फंसी बयानबाजी
राहुल गांधी के हालिया कोर्ट दौरों ने यह दिखा दिया है कि राजनीतिक बयान लंबे समय तक कानूनी चुनौतियों का कारण बन सकते हैं. चुनावी मंचों पर दिए गए बयान सालों बाद अदालतों में सवाल बनकर लौट सकते हैं. आने वाले दिनों में इन मामलों की सुनवाई न सिर्फ कानूनी बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.