इलाहाबाद उच्च न्यायालय की टिप्पणी,“तुम लोग पुलिस से घिर चुके हो” वाली एफआईआर पर पुलिस को फटकार
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बहराइच में दर्ज एक एफआईआर की भाषा और तथ्यों पर गंभीर सवाल उठाए हैं. अदालत ने कहा कि एफआईआर में फिल्मी डायलॉग और घटना के समय को लेकर स्पष्ट विरोधाभास दिखाई देता है, जो कानून के दुरुपयोग का संकेत है. कोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को दो सप्ताह में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है.

इलाहाबाद उच्च न्यायालय
इलाहाबाद. इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने आपराधिक मामलों में दर्ज की जा रही एफआईआर की भाषा और ड्राफ्टिंग को लेकर कड़ी टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि पुलिस द्वारा एक ही पैटर्न और “फिल्मी स्क्रिप्ट” जैसी भाषा का बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है, जो कानून की गंभीर प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है. मामला बहराइच जिला के जरवल रोड थाने में 22 जनवरी 2026 को दर्ज एक एफआईआर से जुड़ा है, यह एफआईआर कथित पुलिस मुठभेड़ के बाद गोहत्या के आरोप में अकबर अली और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई थी. याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एफआईआर की भाषा पर गंभीर असंतोष व्यक्त किया.
भाषा के कारण एफआईआर रद्द किए जाने योग्य
अदालत ने खास तौर पर एफआईआर में दर्ज संवादों पर आपत्ति जताई, जिनमें हिंदी फिल्मों में प्रचलित डायलॉग जैसे “तुम लोग पुलिस से घिर चुके हो, आत्मसमर्पण कर दो” शामिल थे. पीठ ने कहा कि ऐसी भाषा जमीनी हकीकत से अधिक किसी फिल्मी कहानी जैसी प्रतीत होती है. कोर्ट ने समय संबंधी एक बड़ी विसंगति भी उजागर की, एफआईआर के अनुसार घटना सुबह 10:45 बजे हुई, जबकि रिपोर्ट दोपहर 2:24 बजे दर्ज की गई. इसके बावजूद एफआईआर में यह उल्लेख है कि आरोपी ने कहा, “उजाला होने वाला है.” इस पर पीठ ने टिप्पणी की कि यदि घटना सुबह 10:45 बजे हुई, तो उस समय “उजाला होना बाकी” कैसे हो सकता है.
अदालत ने इसे गंभीर तथ्यात्मक विरोधाभास बताते हुए कहा कि यह कानून के दुरुपयोग की ओर संकेत करता है और एफआईआर को रद्द किए जाने योग्य बनाता है. खंडपीठ ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. साथ ही चेतावनी दी कि निर्देश का पालन न करने पर उन्हें अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ेगा. अदालत यह सुनवाई गिरफ्तार आरोपियों में से एक अकबर अली की याचिका पर कर रही थी, जिसमें उसने राहत की मांग की है.
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