CRPF के वे ‘ब्रह्मास्‍त्र’, जिन्‍होंने नक्‍सलियों का काम किया तमाम, एक-एक कर ढेर होते गए खूंखार माओवादी – crpf cobra force armoured vehicle platform wipe out Maoist now naxal free india

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CRPF के वे ‘ब्रह्मास्‍त्र’, जिन्‍होंने नक्‍सलियों का काम किया तमाम

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Naxal Free India: भारत में नक्‍सली दशकों से बड़ी समस्‍या रही है. नक्‍सल आतंक में सैकड़ों की तादाद में आमलोग और सुरक्षार्मी मारे जा चुके हैं. अब जाकर लाल आतंक अंत की दहलीज तक पहुंचा है. इसमें CRPF की अहम भूमिका रही है.

CRPF के वे 'ब्रह्मास्‍त्र', जिन्‍होंने नक्‍सलियों का काम किया तमामZoom

CRPF के सालों की मेहनत ने आखिरकार रंग लाया और देश अब ‘नक्‍सल मुक्‍त भारत’ की दहलीज पर खड़ा है. (फाइल फोटो)

Naxal Free India: नक्सल मुक्त भारत अभियान में सुरक्षा बलों की बढ़ती सफलता के बीच CRPF (Central Reserve Police Force ) की विशेष इकाई CoBRA (Commando Battalion for Resolute Action-कोबरा फोर्स) और उन्नत व्हीकल आर्म्ड प्लेटफॉर्म की अहम भूमिका सामने आई है. सरकार ने 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल मुक्त भारत’ का लक्ष्य तय किया है और पिछले दो वर्षों में इस दिशा में सुरक्षा बलों ने कई बड़े ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जिससे नक्सलियों के कई प्रमुख गढ़ कमजोर पड़े हैं.

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभियान को सफल बनाने में कोबरा फोर्स की रणनीतिक तैनाती बेहद प्रभावी साबित हुई है. विशेष बल को खास तौर पर दुर्गम जंगलों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में ऑपरेशन के लिए प्रशिक्षित किया जाता है. कोबरा कमांडो को विशेष रणनीति और आधुनिक तकनीक के साथ तैयार किया जाता है. इन्हें विशेष वेशभूषा और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे वे घने जंगलों और कठिन इलाकों में प्रभावी कार्रवाई कर सकें. प्रशिक्षण के लिए विशेष ट्रैक तैयार किए गए हैं, जो जंगल के रास्तों जैसी परिस्थितियों का अनुभव कराते हैं.

मॉडर्न तकनीक का इस्‍तेमाल

सीआरपीएफ के खोजी कुत्‍ते (स्निफर डॉग) भी ऑपरेशन का अहम हिस्सा हैं. ये विस्फोटक और संदिग्ध सामग्री का तेजी से पता लगाने में सक्षम हैं. इसके साथ ही उन्नत बॉम्बर डिटेक्शन डिवाइस की मदद से आईईडी और बारूदी सुरंगों को मिनटों में खोजकर निष्क्रिय किया जा रहा है. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कोबरा कमांडो विशेष सुरक्षात्मक पोशाक पहनकर अभियान चलाते हैं, जो उन्हें दुर्गम वातावरण में सुरक्षा और दक्षता दोनों प्रदान करती है.

लैंड माइंस की चुनौती से ऐसे निपटा

नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जमीन में बिछाई जाने वाली माइंस और बारूदी सुरंगें रही हैं. इनसे निपटने के लिए उन्नत व्हील आर्म्ड प्लेटफॉर्म वाहनों की तैनाती की गई है. विशेष रूप से छत्‍तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस पर इन वाहनों को तैनात किया जा रहा है और कई कैंपों में इनकी संख्या बढ़ाने की तैयारी है. इन आधुनिक वाहनों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे विस्फोट के बाद उत्पन्न होने वाले तीव्र झटकों को सहने में सक्षम हैं. सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, वर्ष 2024 में हुए एक बड़े नक्सली हमले को भी ऐसे ही एक उन्नत वाहन ने काफी हद तक विफल करने में मदद की थी. इसके अलावा अन्य आधुनिक सुरक्षा वाहन भी चरणबद्ध तरीके से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किए जा रहे हैं.

बेहतर रणनीति

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि कोबरा फोर्स की विशेष ट्रेनिंग, आधुनिक तकनीक, खोजी उपकरणों और उन्नत सुरक्षा वाहनों के संयोजन ने नक्सल विरोधी अभियान को नई मजबूती दी है. लगातार सफल ऑपरेशन और बेहतर रणनीति के चलते सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है और सरकार के नक्सल मुक्त भारत लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की जा रही है.

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Manish Kumar

बिहार, उत्‍तर प्रदेश और दिल्‍ली से प्रारंभिक के साथ उच्‍च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्‍लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें

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