Donald Trump | Trump India Tariff | Donald Trump Tariff | US Tariff | डोनाल्ड ट्रंप ने अब किस कानून के तहत लगाई नई टैरिफ, भारत को लेकर क्या है प्लान
इस फैसले के बाद ट्रंप ने नाराज़गी जताते हुए साफ कहा कि वे ‘वैकल्पिक कानूनों’ के जरिए अमेरिका के हितों की रक्षा करेंगे और अरबों डॉलर की टैरिफ वसूली जारी रखेंगे. डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में संवाददाताओं से कहा, ‘यह फैसला बेहद निराशाजनक है. विदेशी देश जो हमें लूट रहे थे, वे बहुत खुश हैं.’ उन्होंने कोर्ट के कुछ सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘मैं कुछ जजों के लिए शर्मिंदा हूं.’ हालांकि, ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनके पास ‘मजबूत विकल्प’ हैं और वे ‘अरबों डॉलर’ लेना जारी रखेंगे.
डोनाल्ड ट्रंप ने इसके साथ ही तुरंत दूसरा रास्ता अपनाया और ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश जारी कर दिया. उन्होंने बताया कि अगले पांच महीनों में विभिन्न देशों की व्यापार प्रथाओं की जांच कर अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाएंगे.
क्या है सेक्शन 122, जिसके तहत नई टैरिफ लगेगी?
सेक्शन 122 राष्ट्रपति को यह अधिकार देता है कि अगर अमेरिका को गंभीर अंतरराष्ट्रीय भुगतान संकट या बैलेंस ऑफ पेमेंट्स घाटे का सामना करना पड़ रहा हो, तो वह अस्थायी तौर पर आयात पर शुल्क लगा सकता है.
इस कानून के तहत अधिकतम 15% तक आयात शुल्क लगाया जा सकता है. हालांकि यह व्यवस्था केवल 150 दिनों तक लागू रह सकती है, लेकिन इसके लिए किसी लंबी जांच प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती. वहीं 150 दिनों से अधिक बढ़ाने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है. यानी यह एक अस्थायी लेकिन त्वरित उपाय है, जिसे अमेरिका की आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए बनाया गया था.
IEEPA से कैसे अलग है सेक्शन 122?
IEEPA का इस्तेमाल अब तक प्रतिबंध (sanctions), संपत्ति फ्रीज करने और वित्तीय लेन-देन रोकने के लिए होता रहा है. ट्रंप पहले राष्ट्रपति थे, जिन्होंने इसका इस्तेमाल व्यापक टैरिफ लगाने के लिए किया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस व्याख्या को खारिज कर दिया. इसके उलट, सेक्शन 122 सीधे तौर पर आयात शुल्क की बात करता है, हालांकि इसकी सीमा और समय-सीमा तय है.
भारत को लेकर ट्रंप का रुख क्या है?
ट्रंप ने कहा, ‘मेरा भारत के साथ संबंध शानदार है.’ उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि समझौता बरकरार रहेगा और भारत को कोई तत्काल राहत नहीं मिलेगी.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से IEEPA आधारित टैरिफ खत्म होने के बावजूद, देश-विशेष समझौते बने रहेंगे. ट्रंप ने संकेत दिया कि वैश्विक 10 प्रतिशत टैरिफ के बावजूद भारत के साथ मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन अन्य देशों पर दबाव बनाए रखने के लिए नए जांच और टैरिफ का इस्तेमाल होगा. ट्रंप ने कहा, ‘हम और तरीके अपनाएंगे, जो IEEPA से भी मजबूत हैं.’
नई ट्रंप टैरिफ की खास बातें
डोनाल्ड ट्रंप ने नई टैरिफ किस कानून के तहत लगाने का ऐलान किया है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेड एक्ट, 1974 के सेक्शन 122 के तहत 10 प्रतिशत की नई वैश्विक टैरिफ लगाने की घोषणा की है.
सेक्शन 122 क्या है और यह राष्ट्रपति को क्या अधिकार देता है?
सेक्शन 122 राष्ट्रपति को अस्थायी रूप से आयात शुल्क या कोटा लगाने की अनुमति देता है, अगर अमेरिका को गंभीर अंतरराष्ट्रीय भुगतान संकट, बैलेंस ऑफ पेमेंट्स घाटा या डॉलर पर दबाव जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा हो.
इस कानून के तहत कितनी टैरिफ और कितने समय के लिए लगाई जा सकती है?
सेक्शन 122 के तहत अधिकतम 15 प्रतिशत तक की टैरिफ लगाई जा सकती है और इसकी अवधि अधिकतम 150 दिनों तक सीमित होती है.
ट्रंप को नया कानून अपनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ लगाने का स्पष्ट अधिकार नहीं देता.
सुप्रीम कोर्ट ने IEEPA को लेकर क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि IEEPA का इस्तेमाल आपातकाल में प्रतिबंध या आर्थिक नियंत्रण के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसके तहत सीधे तौर पर टैरिफ लगाना संविधान के अनुसार सही नहीं है.
ट्रंप इस फैसले से कैसे प्रभावित हुए?
ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘निराशाजनक’ बताया और कहा कि वे टैरिफ से होने वाली आय बनाए रखने के लिए दूसरे कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करेंगे.
भारत को लेकर ट्रंप की टैरिफ नीति में क्या बदलाव हुआ है?
भारत पर लगने वाली 18 प्रतिशत टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ट्रंप ने साफ कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता पहले की तरह जारी रहेगा.
अब आगे क्या?
कुल मिलाकर, सेक्शन 122 के तहत प्रस्तावित नई टैरिफ ट्रंप की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वे अदालत की रोक के बावजूद व्यापारिक दबाव बनाए रखना चाहते हैं. भारत के लिए फिलहाल राहत यही है कि मौजूदा 18% टैरिफ में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन वैश्विक व्यापार माहौल आने वाले महीनों में और गर्म होने के संकेत साफ हैं.