Agra petha recipe at home। घर पर बनाएं आगरा पेठा जानें आसान रेसिपी

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Agra Petha Recipe: किसी शहर की पहचान सिर्फ उसकी इमारतों या इतिहास से नहीं होती, बल्कि वहां के स्वाद से भी होती है. आगरा का नाम लेते ही जहां ताजमहल याद आता है, वहीं मन में पेठे की मिठास भी घुल जाती है. दिलचस्प बात यह है कि जिसे लोग अक्सर बाजार की खास मिठाई मानते हैं, वही पेठा अब घरों की रसोई में बनकर लोगों को चौंका रहा है. सोशल मीडिया और कुकिंग वीडियो के दौर में कई लोग पारंपरिक मिठाइयों को खुद बनाना सीख रहे हैं. घर पर बना पेठा न सिर्फ ताज़ा और शुद्ध होता है, बल्कि स्वाद में भी बाजार वाले से कम नहीं लगता. खासकर त्योहार या मेहमानों के मौके पर जब घर की बनी मिठाई सामने आती है, तो उसकी बात ही अलग होती है. यही वजह है कि इन दिनों घर पर पेठा बनाने की रेसिपी तेजी से ट्रेंड कर रही है और लोग इसे अपनाकर पुराने स्वाद को नई तरह से जी रहे हैं.

घर की रसोई में लौटा आगरा का स्वाद
घर पर पेठा बनाने का ट्रेंड अचानक नहीं आया. लॉकडाउन के समय जब लोग बाहर की मिठाइयों से दूर रहे, तब कई परिवारों ने पारंपरिक रेसिपी फिर से आजमाईं. आगरा पेठा भी उन्हीं में से एक था. धीरे-धीरे लोगों को पता चला कि सही तरीका अपनाया जाए तो इसे बनाना उतना मुश्किल नहीं जितना माना जाता था. घर का पेठा बाजार से अलग इसलिए भी होता है क्योंकि इसमें मिलावट या ज्यादा रंग-सुगंध नहीं होते. यही कारण है कि हेल्थ-कॉन्शियस लोग भी अब इसे घर पर बनाना पसंद कर रहे हैं.

सही फल चुनना ही असली शुरुआत
पका पेठा क्यों जरूरी
पेठा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला फल दरअसल सफेद कद्दू जैसा होता है, जिसे पेठा फल या ऐश गॉर्ड कहा जाता है, अगर फल कच्चा या हरा हो, तो मिठाई सही नहीं बनती. पका हुआ फल ऊपर से हल्का सफेद दिखता है और अंदर के बीज नरम होते हैं. रसोई विशेषज्ञ बताते हैं कि फल की गुणवत्ता ही पेठे की पारदर्शिता और बनावट तय करती है. यही वजह है कि घर पर बनाने वालों को सबसे पहले फल चुनने पर ध्यान देना चाहिए.

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भिगोने और उबालने की प्रक्रिया से आता है टेक्सचर
1. चूने के पानी का विज्ञान
पेठे के टुकड़ों को चूने के पानी में भिगोना सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि तकनीक है. इससे टुकड़े मजबूत होते हैं और उबालने के बाद भी टूटते नहीं. करीब 10–12 घंटे भिगोने के बाद जब इन्हें धोकर उबाला जाता है, तो वे धीरे-धीरे पारदर्शी होने लगते हैं. यही वह स्टेज है जहां कई लोग गलती करते हैं, अगर उबाल कम हुआ तो पेठा कच्चा रहेगा, ज्यादा हुआ तो नरम हो जाएगा. इसलिए मध्यम से तेज आंच पर लगभग 20 मिनट उबालना सही माना जाता है.

2. चाशनी का संतुलन तय करता है मिठास
उबले हुए पेठे को चीनी की चाशनी में पकाया जाता है. चाशनी की गाढ़ाई यहां सबसे अहम होती है. जब चाशनी की आखिरी बूंद धागे की तरह गिरने लगे, तो समझिए सही स्टेज आ गया. कई घरों में इसे रातभर चाशनी में छोड़ दिया जाता है ताकि मिठास अंदर तक समा जाए. अगले दिन हल्का दोबारा पकाने से पेठा चमकदार और रसदार बनता है. यही प्रक्रिया बाजार वाले पेठे का असली राज मानी जाती है.

घर का पेठा क्यों बन रहा लोगों की पसंद
आज के दौर में लोग पैकेज्ड मिठाइयों से ज्यादा घर के विकल्प तलाश रहे हैं. घर का पेठा बनाने के पीछे कुछ साफ कारण हैं:
-शुद्ध सामग्री का भरोसा
-कम रंग और फ्लेवर
-स्वाद में ताजगी
-लंबे समय तक सुरक्षित रखने की सुविधा

दिल्ली की गृहिणी नेहा बताती हैं कि उन्होंने पहली बार त्योहार पर पेठा बनाया था और परिवार ने बाजार वाला खाना बंद कर दिया. ऐसे अनुभव सोशल मीडिया पर तेजी से साझा हो रहे हैं, जिससे यह ट्रेंड और बढ़ रहा है.

स्टोरेज और सर्व करने के टिप्स
घर पर बना पेठा अगर सूखा रखा जाए तो करीब दो महीने तक चल सकता है. इसे एयरटाइट डिब्बे में रखना जरूरी है. कई लोग इसमें केसर या गुलाब जल की हल्की खुशबू भी मिलाते हैं, जिससे स्वाद और खास हो जाता है. मेहमानों के लिए इसे छोटे पारदर्शी टुकड़ों में सर्व किया जाए तो यह मिठाई के साथ-साथ सजावट भी बन जाता है.

पारंपरिक मिठाई का नया दौर
पेठा सिर्फ आगरा की पहचान नहीं, बल्कि भारतीय मिठाई संस्कृति का हिस्सा है. आज जब लोग घर पर पारंपरिक स्वाद लौटाने की कोशिश कर रहे हैं, तब पेठा जैसी मिठाइयां नई पीढ़ी से जुड़ रही हैं.
घर की रसोई में बना पेठा इस बात का संकेत है कि परंपरा और आधुनिकता साथ-साथ चल सकती हैं. स्वाद वही पुराना है, बस बनाने का अंदाज बदल गया है.

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