‘अस्सी’ ही नहीं, तापसी पन्नू की इन 7 फिल्मों ने बदला समाज का नजरिया, 7.7 है एक की रेटिंग, 2 में है अमिताभ बच्चन
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भारतीय सिनेमा में लंबे समय तक कहानी का केंद्र पुरुष अभिनेता और बड़े बजट की भव्य फिल्में रही हैं. हालांकि, बदलते दौर के साथ हिंदी सिनेमा की दिशा में भी अहम परिवर्तन देखने को मिला है. अब महिला प्रधान फिल्मों ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है. ये फिल्में न केवल व्यावसायिक रूप से सफल हो रही हैं, बल्कि अपनी विषयवस्तु और संदेश के कारण चर्चा का विषय भी बन रही हैं.
आज तापसी पन्नू की फिल्म ‘अस्सी’ सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. ‘अस्सी’ महिला केंद्रित फिल्म है. अगर तापसी के करियर पर नजर डालें तो उन्होंने लगातार ऐसी महिला केंद्रित फिल्मों में काम किया है, जिनमें उनकी भूमिकाएं कहानी के सेंटर में रही हैं. अगर उनके करियर के पन्नों को पलटा जाए तो उन्होंने कई ऐसी महिला प्रधान फिल्में की हैं, जिन्होंने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया.
सिर्फ सिनेमाघर ही नहीं, बल्कि ओटीटी पर भी तापसी ने महिला प्रधान फिल्मों से फैंस का दिल जीता है. उनकी साल 2019 में आई ‘बदला’ ने ओटीटी पर नई लहर की शुरुआत की थी, जिसमें अपने प्रेमी के ही मर्डर केस में फंसी तापसी खुद के बेकसूर साबित करने की लड़ाई लड़ती हैं. इसमें अमिताभा बच्चन उनके साथ हैं. ‘बदला’ में उनकी एक्टिंग की जमकर तारीफ हुई थी और आईएमडीबी पर रेटिंग 7.7 थी.
‘बदला’ से पहले तापसी ने ‘पिंक’ में काम किया था, जिसका डायलॉग ‘नो मींस नो’ ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया था. फिल्म में महिलाओं की मर्जी और उनकी भावनाओं को तवज्जो दी थी और समाज की संकीर्ण धारणाओं पर प्रहार किया था. अमिताभ बच्चन का किरदार लड़कियों के लिए केस लड़ता है.
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साल 2020 में तापसी ‘थप्पड़’ को लेकर आई, जिसमें महिलाओं के साथ होने वाली घरेलू हिंसा को उजागर किया गया और बताया गया कि शुरुआत एक थप्पड़ से ही होती है. फिल्म में सिर्फ ‘एक थप्पड़’ के कारण रिश्तों और सम्मान के सवाल को उठाया गया है, जिसके लिए इसे खूब सराहना मिली. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की और वर्ल्ड वाइड 44 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया.
‘सांड की आंख’ फिल्म को भी नहीं भुलाया जा सकता है, जिसमें तापसी ने प्रकाशी तोमर का रोल निभाया था. यह फिल्म साठ साल की दो बहनों चंद्रो और प्रकाशी के जीवन पर बनी थी, जो 60 साल की उम्र के बाद निशानेबाजी में आई और कई पुरस्कार भी अपने नाम किए. फिल्म में पितृसत्तात्मक और रुढ़िवादी सोच को भी बखूबी दिखाया गया.
साल 2021 में आई ‘रश्मि रॉकेट’ भले ही पर्दे पर कमाल नहीं कर पाई, लेकिन फिल्म भारतीय महिला खिलाड़ियों के संघर्ष पर बनी है. फिल्म में छोटे से गांव से निकली रश्मि वीरा अपने सपनों को उड़ान देने के लिए कई संघर्षों से गुजरती है. फिल्म में महिला खिलाड़ियों के साथ होने वाले भेदभाव, जेंडर टेस्टिंग और हाइपरएंड्रोजेनिज्म के मुद्दों पर प्रकाश डाला गया है.
इसके अलावा लिस्ट में तापसी की ‘हसीन दिलरुबा’, ‘ब्लर’, ‘शाबाश मिठू’, और ‘नाम शबाना’ जैसी फिल्में भी शामिल हैं. इन फिल्मों के जरिए तापसी ने फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसी एक्ट्रेस को तौर पर स्थापित किया, जो कंटेंट को बिल्कुल अलग और मोटिवेशन को ध्यान में रखकर करती हैं.