जब संगीतकार की हालत देख रो पड़े आनंद बख्शी, एक्शन हीरो अजय देवगन के लिए लिखे ऐसे गाने, मूवी हुई मैसिव हिट – When Anand Bakshi burst into tears held Nusrat Fateh Ali Khan feet Ajay Devgn Saif Ali kachche dhaage movie know reason interesting story
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बड़े से बड़े कलाकार को सफलता का नशा हो जाता है. कामयाबी सिर चढ़कर बोलने लगती है. ईगो के चलते कई बार बनते हुए काम बिगड़ जाते हैं. बॉलीवुड भी इससे अछूता नहीं है. बॉलीवुड के मशहूर गीताकार आनंद बख्शी भी ईगो का शिकार हुए. जब उन्हें सच्चाई पता चली तो संगीतकार के सामने रोने लगे. उन्होंने संगीतकार के पैर पकड़कर माफी भी मांगी. फिर एक्शन हीरो के लिए ऐसे गाने लिखे तो पूरा जमाना झूम उठा. गाने तो सुपरहिट निकले ही, मूवी भी मैसिव हिट रही. पूरा किस्सा अजय देवगन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था.
साल 1999 में अजय देवगन-सैफ अली खान की एक्शन थ्रिलर फिल्म कच्चे धागे आई थी. मिलन लुथरिया के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अजय देवगन एक स्मगलर के रोल में थे. फिल्म की शूटिंग राजस्थान-पाकिस्तान बॉर्डर पर भी हुई थी. मूवी का प्रीमियर 19 फरवरी 1999 को मुंबई में हुआ था. कहानी अंजुम राजाबाली ने लिखी थी. डायलॉग संजय छैल-मिलन लुथरिया ने लिखे थे. टिप्स कंपनी के बैनर तले रमेश तौरानी ने फिल्म को प्रोड्यूस किया था. इस फिल्म का म्यूजिक पाकिस्तानी सिंगर नुसरत फतेह अली खान ने कंपोज किया था. इस फिल्म के निर्माण के दौरान एक मौका ऐसा भी आया जब ईगो के चलते गीतकार आनंद बख्शी संगीतकार नुसरत फतेह अली खान से मिलना ही नहीं चाहते थे. आइये जानते हैं दिलचस्प किस्सा…..
कच्चे धागे फिल्म 19 फरवरी 1999 को रिलीज हुई थी. मूवी में 50:59 मिनट की लेंग्थ के कुल 8 गाने रखे गए थे. फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म के पॉप्युलर गानों में ‘खाली दिल नहीं, जान भी है मंगदा’, ‘प्यार नहीं करना जहान सारा कहता है’, ‘दिल परदेसी हो गया’ शामिल थे. फिल्म का म्यूजिक पाकिस्तानी संगीतकार नुसरत फतेह अली खान ने कंपोज किया था.
नुसरत फतेह पाकिस्तान से मुंबई आए तो उन्हें एक होटल में ठहराया गया. वो महीनेभर होटल में म्यूजिक बनाने के लिए रुके थे. उन दिनों उनका वजन बहुत ज्यादा बढ़ गया था. वो ठीक से चल-फिर नहीं पाते थे. उन्हें लाने-ले जाने के लिए स्पेशल कार थी. चार-पांच आदमियों की मदद ही वो चल पाते थे. नुसरत फतेह अली खान ने अपने होटल के कमरे में ही गीतकार आनंद बक्शी के साथ सेशन रखा. सब लोग इंतजार ही करते रह गए बक्शी साहब नहीं आए. आनंद बक्शी का इंतजात करते-करते पांच दिन गुजर गए.
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नुसरत साहब को भी समझ में नहीं आ रहा था कि आनंद बक्शी सिटिंग के लिए क्यों नहीं आ रहे हैं. बख्शी साहब जो गाना लिखकर भेजते थे, उसे नुसरत साहब रिजेक्ट कर देते थे. नुसरत साहब जो ट्यून भेजते थे, उसे बख्शी साहब रिजेक्ट कर देते थे. 15 दिन यही चलता रहा. एक दिन नुसरत साहब ने बक्शी साहब से मिलने का फैसला किया.
डायरेक्टर मिलन लूथरिया के साथ आनंद बक्शी के पास बांद्रा पहुंचे. बख्शी साहब जिस सोसायटी में रहते थे, उसमें लिफ्ट नहीं थी. वो पहले फ्लोर पर रहा करते थे. नुसरत चार लोगों की मदद से बड़ी मुश्किल से सीढ़ियां चढ़ते हुए बक्शी साहब के घर पहुंचे. बक्शी ने खिड़की से जब नजारा देखा तो बहुत दुखी हो गए.
वो जल्दी से गेट पर पहुंचे और नुसरत साहब को देखते ही फूट-फूटकर रोने लगे. उनके पैरों में गिर पड़े. आनंद बक्शी ने कहा, ‘मैं एक अलग ही ईगो में जी रहा था कि एक आदमी आया है दूसरे देश से, वो क्या समझता है कि वो मेरे पास नहीं आ सकता. मुझे उसके पास आना पड़ेगा. मुझे माफ कर दीजिए. कल से मैं आपके पास आऊंगा.’
नुसरत फतेह अली खान की मौत अगस्त 1997 में हुई थी. कच्चे धागे फिल्म के ज्यादातर गाने उनकी मौत के बाद ही रिकॉर्ड हुए थे. यह उनकी तीसरी और अंतिम बॉलीवुड फिल्म थी. इससे पहले उन्होंने ‘और प्यार हो गया’ और ‘कारतूस’ मूवी के लिए भी म्यूजिक कंपोज किया था.
सबसे दिलचस्प फैक्ट यह है कि कच्चे धागे मिलन लुथरिया के निर्देशन में बनी पहली मूवी थी. इससे पहले 1973 में कच्चे धागे नाम से एक और फिल्म आई थी. इस फिल्म के डायरेक्ट राज खोसला थे. कम लोग इस बात को जानते हैं कि राज खोसला ही मिलन लुथरिया के बायोलोजिकल पिता थे.
कच्चे धागे इकलौती ऐसी फिल्म है जिसमें मनीषा कोईराला-सैफ अली खान एक साथ आए थे. यह अजय देवगन-सैफ अली खान की पहली साथ में फिल्म थी. 10 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 28.87 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक हिट फिल्म साबित हुई थी.