Phulera Dooj 2026 Vrat Katha and Significance। फुलेरा दूज 2026 पर पढ़ें राधा-कृष्ण व्रत कथा

Share to your loved once


Phulera Dooj 2026 Vrat Katha: फरवरी की हल्की ठंड, हवा में घुलती बसंती खुशबू और मंदिरों में गूंजती राधे-कृष्ण की धुन कुछ ऐसा ही माहौल आज देशभर में देखने को मिल रहा है. 19 फरवरी 2026 को फुलेरा दूज का पावन पर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है. यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि प्रेम, मिलन और नवआरंभ का उत्सव है. ब्रज में तो इस दिन से होली की आहट सुनाई देने लगती है. मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की पूजा करने तथा व्रत कथा सुनने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और रिश्तों में मधुरता आती है. आइए जानते हैं इस दिन की पौराणिक कथा और इसका महत्व.

फुलेरा दूज का आध्यात्मिक महत्व
फाल्गुन शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व प्रेम और भक्ति का प्रतीक है. खासकर ब्रज क्षेत्र जैसे वृंदावन और बरसाना में इसका उत्साह देखते ही बनता है. मंदिरों में फूलों की सजावट होती है और श्रद्धालु फूलों की होली खेलते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राधा-कृष्ण का स्मरण करने से वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है. कई परिवारों में नवविवाहित जोड़े इस दिन विशेष पूजा करते हैं. कुछ लोग इसे रिश्तों की नई शुरुआत का शुभ अवसर भी मानते हैं.

फुलेरा दूज व्रत कथा
राधा-कृष्ण के विरह और मिलन की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय ऐसा आया जब भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी का लंबे समय तक मिलन नहीं हो पाया. इस विरह ने राधा रानी को गहरे दुख में डुबो दिया. उनके मन की उदासी का असर पूरे वृंदावन पर दिखाई देने लगा. खिले हुए फूल मुरझाने लगे, पेड़-पौधे सूख गए, पक्षियों ने चहचहाना बंद कर दिया. मानो प्रकृति भी राधा के दुख में सहभागी हो गई हो. राधा रानी ने भोजन-जल त्याग दिया और केवल कान्हा के स्मरण में लीन रहने लगीं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

जब श्रीकृष्ण ने वृंदावन की यह दशा देखी, तो वे तुरंत वहां पहुंचे. जैसे ही राधा रानी को उनके आगमन का समाचार मिला, उनके चेहरे पर मुस्कान लौट आई. कृष्ण के वृंदावन पहुंचते ही प्रकृति भी जैसे जीवंत हो उठी. सूखे पेड़ हरे हो गए, फूल फिर से खिल उठे और वातावरण में मधुरता घुल गई. श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए राधा पर फूल बरसाए. राधा ने भी प्रेमपूर्वक फूलों की वर्षा की. देखते ही देखते गोपियां और ग्वाले भी इस आनंद में शामिल हो गए. उस दिन पूरे ब्रज में फूलों की होली खेली गई. तभी से इस दिन को फुलेरा दूज के नाम से जाना जाने लगा और ब्रज में होली उत्सव की शुरुआत इसी दिन से मानी जाती है.

फुलेरा दूज 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल द्वितीया तिथि की शुरुआत 18 फरवरी 2026 को शाम 4 बजकर 57 मिनट पर हुई. इसका समापन 19 फरवरी 2026 को दोपहर 3 बजकर 58 मिनट पर होगा. इसलिए फुलेरा दूज 19 फरवरी, गुरुवार को मनाई जा रही है. श्रद्धालु इस दिन सुबह स्नान के बाद राधा-कृष्ण की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित करते हैं, मिष्ठान का भोग लगाते हैं और व्रत कथा का पाठ करते हैं. कुछ स्थानों पर मंदिरों में विशेष कीर्तन और फूलों की होली का आयोजन भी होता है.

दांपत्य जीवन में क्यों माना जाता है खास?
फुलेरा दूज को प्रेम और सौहार्द का प्रतीक माना गया है. जिस तरह राधा-कृष्ण के मिलन से प्रकृति में फिर से बहार आई, उसी तरह जीवन में भी प्रेम का संचार हर कठिनाई को दूर कर सकता है.

आज के दौर में, जब रिश्तों में छोटी-छोटी बातों पर दूरियां आ जाती हैं, यह पर्व हमें संवाद, विश्वास और स्नेह की अहमियत याद दिलाता है. कई ज्योतिषाचार्य भी मानते हैं कि इस दिन व्रत कथा सुनने से वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाएं कम होती हैं और पारिवारिक सुख-समृद्धि बनी रहती है.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP