एक बार फिर चर्चा में पवन सिंह का नाम, इस बार विवादों में नहीं कयासों में… बिहार की राजनीति से जुड़ा है मामला
Last Updated:
Rajya Sabha election Pawan Singh BJP candidate: राज्यसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है. 16 मार्च को होने वाले चुनाव में 10 राज्यों की 37 सीटों पर मतदान होगा, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की पांच सीटों को लेकर है.इन सीटों में एक नाम तेजी से उभर रहा है, वह है भोजपुरी अभिनेता और गायक पवन सिंह. बिहार के राजनीतिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स में यह बात जोरों पर है कि भोजपुरी सिनेमा के पावर स्टार पवन सिंह को पार्टी से बड़ा इनाम मिल सकता है.

राज्यसभा चुनाव में पवन सिंह चर्चा में, भाजपा की रणनीति क्या है?
पटना. बिहार में इस बार राज्यसभा की पांच सीटों पर चुनाव होना है. मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर दो सीटें भाजपा के खाते में जाती दिख रही हैं. जदयू अपने दोनों मौजूदा सदस्यों को दोबारा भेज सकती है, जबकि एक सीट सहयोगी दल के हिस्से में जा सकती है. ऐसे में भाजपा के हिस्से आई संभावित दूसरी सीट को लेकर कयासबाजी तेज है और पवन सिंह का नाम बिहार की राज्यसभा सीटों के लिए तेजी से उभर रहा है. वहीं, राजद की दो सीटें खाली हो रही हैं, लेकिन मौजूदा आंकड़ों के अनुसार पार्टी के लिए दोनों सीटें बचा पाना मुश्किल माना जा रहा है. ऐसे में इसी गणित ने भाजपा खेमे में नए चेहरे की संभावनाओं को जन्म दिया है.
पवन सिंह का नाम क्यों चर्चा में?
बता दें कि 2025 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए धुआंधार प्रचार किया था. कई सीटों पर उनकी सभाओं में भारी भीड़ उमड़ी थी. राजनीतिक हलकों में तभी से चर्चा थी कि पार्टी उन्हें किसी बड़े मंच पर ला सकती है. सूत्रों के मुताबिक यह राज्यसभा टिकट की डील का हिस्सा था. अब जब राज्यसभा चुनाव की घोषणा हो गई है तो बीजेपी से पवन सिंह का नाम चर्चा में है. माना जा रहा है कि पार्टी भोजपुरी क्षेत्र में अपने जनाधार को और मजबूत करने के लिए पवन सिंह को मौका दे सकती है. कहा जा रहा है कि भोजपुरी सिनेमा में उनकी लोकप्रियता और पूर्वांचल में उनकी पकड़ को भाजपा राजनीतिक रूप से भुनाना चाहती है.
भाजपा के सामने क्या विकल्प?
हालांकि, पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अंदरखाने उनका नाम गंभीरता से लिया जा रहा है. वहीं, दूसरी ओर भाजपा के पास संगठन के वरिष्ठ नेताओं और जातीय समीकरण साधने वाले चेहरों की भी लंबी सूची है. ऐसे में पवन सिंह को टिकट देना राजनीतिक संदेश भी होगा और जोखिम भी. पार्टी को यह तय करना होगा कि वह अनुभवी नेता को भेजे या जनप्रिय चेहरे को. अगर पवन सिंह को मौका मिलता है तो यह उनके राजनीतिक करियर की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी. अब तक वे चुनाव लड़ने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन राज्यसभा का रास्ता अपेक्षाकृत आसान और रणनीतिक माना जाता है.
राज्यसभा चुनाव की तारीख और प्रक्रिया
About the Author
पत्रकारिता क्षेत्र में 22 वर्षों से कार्यरत. प्रिंट, इलेट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया में महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन. नेटवर्क 18, ईटीवी, मौर्य टीवी, फोकस टीवी, न्यूज वर्ल्ड इंडिया, हमार टीवी, ब्लूक्राफ्ट डिजिट…और पढ़ें