समोसे जलेबी के लिए मशहूर है गाजियाबाद की यह मार्केट, कमाल का स्वाद, 70 सालों से कायम है बादशाहत – Uttar Pradesh News
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गाजियाबाद के टाउन हॉल के पास गंदे नाले किनारे 70 साल पुरानी समोसा-जलेबी मार्केट आज भी लोगों की पसंद है. यहां सुबह 7 बजे से गरमा-गरम समोसे, जलेबी और इमरती तैयार होती हैं. 12 रुपए का समोसा, जलेबी 200 रुपए किलो और इमरती 280 रुपए किलो मिलती है. यहां की मशहूर लल्लूमन हलवाई दुकान चार पीढ़ियों से स्वाद बनाए हुए है. सुबह से रात 9 बजे तक बाजार गुलजार रहता है.
गाजियाबाद शहर में यूं तो खाने-पीने की कई मशहूर जगहें हैं. कहीं सुबह के नाश्ते की रौनक रहती है तो कहीं शाम को स्ट्रीट फूड का बाजार सजता है, लेकिन शहर के पुराने इलाके में टाउन हॉल के पास गंदे नाले के किनारे लगने वाली समोसा-जलेबी-इमरती की यह खास मार्केट पिछले करीब 70 सालों से लोगों के स्वाद की पहली पसंद बनी हुई है. सुबह जैसे ही घड़ी में सात बजते हैं यहां कढ़ाही में तेल खौलने लगता है और गरमा-गरम समोसे निकलने शुरू हो जाते हैं. सुनहरे और कुरकुरे समोसे हरी चटनी और लाल सोंठ के साथ परोसे जाते हैं. पास ही दूसरी कढ़ाही में जलेबी और इमरती छनती रहती है. मीठी खुशबू दूर तक फैल जाती है, जो राह चलते लोगों को भी अपनी ओर खींच लाती है.
यह बाजार सिर्फ स्वाद ही नहीं बल्कि परंपरा का भी प्रतीक है. यहां ₹12 में गरम समोसा मिल जाता है, जबकि जलेबी ₹200 प्रति किलो और इमरती ₹280 प्रति किलो के हिसाब से बिकती है. आम आदमी हो या शहर का कोई बड़ा कारोबारी हर कोई यहां बैठकर समोसे और जलेबी का स्वाद लेने पहुंचता है. नौकरी-पेशा लोग अक्सर ऑफिस जाने से पहले यहीं रुकते हैं. कई लोग सुबह की चाय के साथ समोसा खाना पसंद करते हैं, तो कुछ लोग शाम को काम से लौटते वक्त यहां मीठा-नमकीन नाश्ता कर दिन की थकान मिटाते हैं. यह जगह सिर्फ खाने की नहीं बल्कि लोगों के रोजमर्रा के जीवन का हिस्सा बन चुकी है.
सुबह 7 बजे से शुरू होकर रात 9 बजे तक यह बाजार गुलजार रहता है. दिनभर यहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है. पुरानी यादें पारंपरिक स्वाद और जेब पर हल्का खर्च यही इस 70 साल पुरानी समोसा-जलेबी मार्केट की असली पहचान है. गाजियाबाद की पहचान बन चुकी यह जगह आज भी हर उम्र के लोगों को अपने स्वाद से जोड़ रही है.
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पिछले एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं. 2010 में प्रिंट मीडिया से अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत की, जिसके बाद यह सफर निरंतर आगे बढ़ता गया. प्रिंट, टीवी और डिजिटल-तीनों ही माध्यमों म…और पढ़ें