मणिपुर केंद्रीय जेल में खूंखार कैदियों को किसने पहुंचाया मोबाइल, किससे करते थे बातें? हो गया एक्शन
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मणिपुर सेंट्रल जेल के वार्डर साहिद शाह कैदियों को मोबाइल देकर बाहर संगठनों से संपर्क करवा रहा था, यूपीआई से पैसे लेता था, पुलिस ने कई मोबाइल और सिम बरामद किए, जांच जारी है.

मोबाइल उपलब्ध कराने वाले वार्डन को गिरफ्तार किया गया.
इंफाल. मणिपुर केंद्रीय जेल के एक वार्डर को कैदियों को मोबाइल फोन देने के गंभीर आरोप में गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने गुरुवार को यह जानकारी दी. यह मामला जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. गिरफ्तार वार्डर की पहचान कैरंग मयाई लेइकाई निवासी साहिद शाह (35) के रूप में हुई है. वह साजिवा स्थित मणिपुर सेंट्रल जेल में तैनात था. पुलिस के अनुसार, शाह कैदियों को गुप्त रूप से मोबाइल फोन उपलब्ध करा रहा था. इससे कैदी बाहर से संपर्क कर पाते थे.
सबसे गंभीर बात यह है कि इन कैदियों में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत बंद कई खूंखार कैदी शामिल हैं. ऐसे कैदी संगठित अपराधों से जुड़े होते हैं. मोबाइल फोन से वे संगठनों से निर्देश ले रहे थे. जेल के बाहर षड्यंत्र रचे जा रहे थे.
इंफाल पूर्वी जिले के हिंगांग पुलिस थाने में शाह के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. पुलिस ने बताया कि पूछताछ में खुलासा हुआ कि वह कैदियों को फोन उपलब्ध कराने के बदले पैसे लेता था. यूपीआई के जरिए लेन-देन का सबूत मिला. बुधवार को गिरफ्तारी के समय उसके पास से कई मोबाइल फोन व सिम कार्ड बरामद हुए.
पुलिस का दावा है कि यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा था. शाह ने कबूल किया कि कैदियों को कॉल कराने व सुनाने में मदद करता था. जेल में सख्ती के बावजूद यह सेंधमारी सुरक्षा चूक दर्शाती है. यूएपीएम कैदियों का बाहर संपर्क राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा है.
जांच में शाह के अन्य साथियों का पता लगाया जा रहा. जेल प्रशासन पर भी सवाल उठे. कैदियों के पास फोन कैसे पहुंचे. साजिवा जेल में सघन तलाशी की जा रही है अौर कैदियों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे. मणिपुर में उग्रवाद व हिंसा का इतिहास रहा. जेल से संगठित अपराधों का कनेक्शन चिंता बढ़ा रहा है. पुलिस ने कहा, पूरी साजिश का पर्दाफाश होगा.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें