AI से जाएगी जॉब या बढ़ेंगे मौके? भारत सरकार के टॉप वैज्ञानिक अजय सूद ने दूर किए सारे भ्रम, खोले भविष्य के राज

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नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट भारत के भविष्य की डिजिटल रूपरेखा तय कर रहा है. न्यूज 18 इंडिया से विशेष बातचीत में भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) अजय कुमार सूद ने स्पष्ट किया कि भारत का लक्ष्य एआई तकनीक में दुनिया के टॉप 3 देशों में शामिल होना है. उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को किसी दूसरे देश की एआई तकनीक को कॉपी करने की जरूरत नहीं है बल्कि भारत का लाइट टच रेगुलेशन और समावेशी मॉडल ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों के लिए एक मिसाल बनेगा. इस संवाद में यूएस नेशनल साइंस फाउंडेशन के पूर्व डायरेक्टर सेतुरमन पंचनाथन ने भी भारत की भाषाई विविधता और एआई क्षमता की सराहना की.

इंटरव्‍यू के मुख्य प्‍वाइंट
· विकसित भारत 2047 का रोडमैप: अजय कुमार सूद के अनुसार, पीएम मोदी का विजन एआई को समाज के अंतिम व्यक्ति से जोड़ना है. भारत वर्तमान में टॉप 5 में है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर, हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर में निवेश बढ़ाकर टॉप 3 में पहुंचने का लक्ष्य है.

·  सख्त नहीं, ‘लाइट टच’ रेगुलेशन: भारत एआई के लिए बहुत कठोर कानून (Harsh Approach) नहीं चाहता ताकि इनोवेशन बाधित न हो. हाल ही में एआई सेफ्टी के लिए एक कानूनी दस्तावेज भी जारी किया गया है.

·   आम आदमी के जीवन में बदलाव:
* स्वास्थ्य: एआई मरीजों से उनकी भाषा में बात कर डॉक्टर के लिए पूरी समरी तैयार करेगा.

o    शिक्षा: राजस्थान के ‘padhai.ai’ प्रयोग से गणित का पास प्रतिशत 98% तक पहुंचा.

o    कृषि: किसान एआई के जरिए फसलों की बीमारियों का पता लगाकर तुरंत समाधान पाएंगे.

· रोजगार और ग्लोबल साउथ: सूद ने माना कि रूटीन जॉब्स का नुकसान होगा, लेकिन एआई से कई गुना अधिक नए रोजगार पैदा होंगे. उन्होंने कहा कि भारत का सरकारी निवेश मॉडल उन ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के लिए सर्वश्रेष्ठ है जहां निजी अरबपतियों की कमी है.

पूरा इंटरव्यू

सवाल 1 : पीएम मोदी ने कहा कि भारत को AI में सुपर पावर टॉप 3 देशों में होना चाहिए. क्या मायने है इसके?

पीएम मोदी के बयान के मायने है कि हम AI से समाज को कैसे जोड़ सकते है क्योंकि AI के दो पहलू है AI को Develop और Deploy कीजिए. पीएम मोदी के बयान का मायने है कि AI तकनीक विकसित भारत 2047 का रोडवे है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि हमें पहले तीन में आना है, हम पहले से टॉप 5 में हैं लेकिन हमें पहले टॉप तीन में आना है और इसके लिए हमें इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना होगा, हार्डवेयर और और सॉफ्टवेयर को बढ़ाना होगा.

सवाल 2: कृषि, शिक्षा और हेल्थकेयर में AI का इस्तेमाल कैसे कर सकते है और यूरोप और अमेरिका के AI के बीच भारत का AI कहां है?
AI के फ्रेमवर्क पर काफी चर्चा की है. एक हफ्ते पहले AI सेफ्टी के लिए हमने एक लीगल दस्तावेज निकाला है. लेकिन हमारा अप्रोच सख्त नहीं लाइट टच सोच है. भारत बहुत सख्‍त अप्रोच AI को लेकर नहीं चाहता, जिससे इनोवेशन बाधित हो. हमारे पीएम कह रहे है कि कैसे AI से हम सबको सशक्त कर सकते हैं.

सवाल 3: आम भारतीयों की बात करें तो AI सम्मेलन से कैसे लोगों के जीवन में सुधार आएगा ?
भारत में मोबाइल का penetration 88 प्रतिशत है और हमारा data सबसे सस्ता है. भारत में इससे AI को बढ़ावा मिलेगा. किसान AI का इस्तेमाल करके अपने फसलों में बीमारी का पता कर सकता है और समाधान भी बताएगा. हेल्थ की बात करे तो डॉक्टर के पास हमलोग जाते है तो मरीजों को बात करना जरूर होता है, मरीजों की शिकायत होती है कि डॉक्टर बात नहीं करते. इसलिए AI से पहली Interaction होगी और ये अपनी भाषा में होगा और फिर AI पूरी Summary डॉक्टर को देगा. ये एप्लीकेशन सोसायटी में होगा. शिक्षा में बच्चे अपनी रफ्तार से AI के जरिए सीख सकते है. राजस्थान में एक प्रयोग हुआ padhai.ai.. इसमें पता चला कि गणित में पास होने वाले का प्रतिशत 98% हो गया. AI के इस्तेमाल से क्योंकि सभी बच्चे अपने स्पीड से सीख सके.

सवाल 4: जॉब लॉस होगा AI से ?
कुछ रूटीन जॉब जाएंगी लेकिन बहुत ज्यादा जॉब आएंगी. हर नई तकनीक आती है तो जॉब जाती है लेकिन दूसरे जॉब ज्यादा पैदा होते है.

सवाल 5: ग्लोबल साउथ के देश में पहली बार AI सम्मेलन,  आउटकम दस्तावेज में क्या होगा ?
भारत में जो हमने किया है वह एक मॉडल हो सकता है ग्लोबल साउथ के देशों के लिए क्योंकि ग्लोबल साउथ में Billionaire तो है नहीं. AI में ज्यादा निवेश सरकार से आया है और अब प्राइवेट सेक्टर से आएगा. भारत का मॉडल ग्लोबल साउथ के लिए अच्छा मॉडल. भारत के पास AI के लिए संसाधन है, लेकिन भारत को AI कॉपी नहीं करना. भारत की ताकत इनोवेशन में है और AI सम्मेलन से हम बहुत लोग को प्रेरित कर पाएंगे. भारत का AI सम्मेलन ग्लोबल गुड के लिए है.

सेतुरमन पंचनाथन, पूर्व डायरेक्टर से बातचीत

सवाल 1: भारत में AI सम्मेलन को कैसे देखते है ?
जवाब : भारत के सम्मेलन को ग्लोबल AI सम्मेलन के तौर पर देखता हूं.

सवाल 2: यूरोप और अमेरिका के AI के मुकाबले भारत के AI को कैसे देखते हैं.
जवाब:  भारत ने अपना रास्ता बनाया है. AI में की कैसे AI भारत की समस्याएं, चुनौतियां और मौके को असर डाल सकता है. भारत में 22 भाषाएं और कई बोलियां है. AI संभव बना रहा है कि सभी के लिए सभी जगह समाधान हो. भारत में बहुत काबिलियत है.

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