भईया, हम सुरक्षित नहीं है… अधिवक्ताओं का छलका दर्द, कहा- राम भरोसे है सुल्तानपुर कोर्ट

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हाल ही में देश के कई राज्यों में धमकी भरे ईमेल मिले, जिनमें स्कूलों, कोर्ट, कोर्ट परिसर और अन्य संस्थानों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी. इस संबंध में सूचना मिलने के बाद पुलिस, बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीएस) और डॉग स्क्वाड ने बड़े स्तर तलाशी अभियान चलाया. मगर. सुल्तानपुर कोर्ट की सुरक्षा राम भरोसे है. ये हम नहीं बल्कि यहां के अधिवक्ताओं का कहना है.

भईया, हम सुरक्षित नहीं है... सुल्तानपुर के अधिवक्ताओं का छलका दर्दZoom

सुल्तानपुर कोर्ट के वकीलों की प्रतिक्रिया.

सुल्तानपुर: यूपी में कई दिनों से कोर्ट को उड़ाने की धमकी भरे ईमेल आ रहे हैं. इस पर अधिवक्ताओं में डर का माहौल है. ऐसे में, लोकल पुलिस से लेकर एटीएस और बम निरोधक दस्ता सभी एक्टिव हैं. इसके बाद भी सुल्तानपुर कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे हैं. यहां पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं. क्या कुछ यहां हालत है आइए जानते हैं अधिवक्ताओं की जुबानी…

मोहम्मद अकबर एडवोकेट ने बताया दीवानी कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है. यहां सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है. यहां लोग अंदर आते जाते रहते हैं. किस गेट से जाकर आ रहे हैं इसकी जानकारी किसी को कुछ नहीं हो पाती है. डॉग स्क्वॉड यहां पर आता है. पर एसपी यहां आईं या नहीं इसकी जानकारी नहीं है. अभी रामपुर और बाराबंकी में अधिवक्ता की हत्या हुई. ऐसी घटनाओं के बाद हम लोग सुरक्षित नहीं हैं.
मुकेश यादव ने कहा कि जिस तरह से हर एक न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी और पब्लिक प्लेस को दहलाने का प्रयास किया जा रहा है. धमकी भरे मेल आ रहे हैं ये बहुत ही चिंताजनक विषय है. अराजकतत्व चारों तरफ फैले हुए हैं. सुल्तानपुर दीवानी न्यायालय परिसर की जहां तक बात है यहां पर तीन एंट्री और एग्जिट प्वाइंट है. मगर, हर एक एग्जिट प्वाइंट और एंट्री प्वाइंट पर उतना चेक कर संभव नहीं है. हमारे बार अध्यक्ष और सचिव की भी कमी है कि यहां पर तमाम लोग ऐसे भी आ रहे हैं की लॉ के पहले और दूसरे सेमेस्टर के छात्र हैं. उनको भी दीवानी परिसर में आने की छूट है. ऐसे लोग अधिवक्ता के रूप में अपराधी हो सकते हैं. वास्तव में आम जनता है या अधिवक्ता या लॉ स्टूडेंट… कहा नहीं जा सकता.
उन्होंने आगे कहा कि बाराबंकी में अधिवक्ता के भेष में आकर गोली मारकर अधिवक्ता की हत्या कर दी गई. ऐसी परिस्थिति में हर एक काला कोट पहनकर आने वाला अधिवक्ता ही है. ऐसे में बीच-बीच में चेकिंग की जाए कि यहां पर जो भी आ रहे वो अराजकतत्व तो नहीं हैं. एक अन्य अधिवक्ता ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था लचर है और ये एक गंभीर विषय है. न्यायालय की सुरक्षा जिस तरह से सुरक्षा कर्मियों के द्वारा हमें सुरक्षा प्रदान की जा रही. इससे न्यायपालिका, प्रतिवादी, वादी तथा अधिवक्ता सभी असुरक्षित हैं. किसी भी समय कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है. जैसे की न्यायालय में कई कई सारे एगजिट और एंट्री प्वाइंट हैं जहां चेकिंग नहीं होती.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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