Why Blessings Given with Right Hand। सीधे हाथ से ही क्यों दिया जाता है आशीर्वाद

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Blessing By Right Hand: जब कोई बुजुर्ग हमारे सिर पर हाथ रखकर “खुश रहो” या “सदा सफल हो” कहता है, तो उस पल में एक अजीब-सी गर्माहट महसूस होती है. यह सिर्फ शब्दों का असर नहीं होता, बल्कि स्पर्श की वह ऊर्जा होती है जिसे हम बचपन से महसूस करते आए हैं. दिलचस्प बात यह है कि लगभग हर संस्कृति और हर घर में आशीर्वाद देने का यही तरीका दिखता है-दाहिने हाथ से. क्या आपने कभी सोचा कि ऐसा क्यों? क्या यह केवल परंपरा है, या इसके पीछे कोई गहरा अर्थ और तर्क भी छिपा है? दरअसल, भारतीय मान्यताओं में दाहिने हाथ से आशीर्वाद देने की परंपरा ज्योतिष, योग और व्यवहारिक विज्ञान तीनों से जुड़ी बताई जाती है. यही वजह है कि यह आदत पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और आज भी उतनी ही स्वाभाविक लगती है.

ज्योतिष में दाहिने हाथ का महत्व
भारतीय ज्योतिष में शरीर को भी ग्रहों से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि शरीर का दाहिना भाग सूर्य से प्रभावित होता है. सूर्य को ऊर्जा, आत्मविश्वास और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है. इसी कारण दाहिना भाग सक्रियता, नेतृत्व और सकारात्मक प्रभाव से जुड़ा माना गया है. जब कोई व्यक्ति दाहिने हाथ से आशीर्वाद देता है, तो मान्यता यह है कि वह अपनी सौर ऊर्जा सामने वाले तक पहुंचा रहा होता है. यही कारण है कि आशीर्वाद का स्पर्श सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि शुभ ऊर्जा का संचार माना जाता है. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

शुभ-अशुभ की सांस्कृतिक धारणा
भारतीय संस्कृति में दाहिने हाथ को शुभ कार्यों के लिए निर्धारित माना गया है. पूजा, हवन, प्रसाद देना, दान करना-इन सभी कार्यों में दाहिने हाथ का ही प्रयोग होता है. इसके पीछे एक सांस्कृतिक मनोविज्ञान भी है. दाहिने हाथ को सक्रिय और देने वाला माना गया, जबकि बाएं हाथ को ग्रहण करने या निजी कार्यों से जोड़ा गया.

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सामाजिक संकेत का असर
धीरे-धीरे यह आदत सामाजिक संकेत बन गई. किसी को सम्मान देना हो, हाथ मिलाना हो या कुछ सौंपना हो-दाहिने हाथ का प्रयोग शिष्टाचार का हिस्सा बन गया. आशीर्वाद भी इसी श्रेणी में शामिल हो गया. इससे परंपरा में एकरूपता बनी रही और समाज में सम्मान व्यक्त करने का एक तय तरीका बन गया.

योग विज्ञान: पिंगला नाड़ी का संबंध
योग और अध्यात्म में शरीर की तीन प्रमुख नाड़ियों-इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना-का वर्णन मिलता है. इनमें पिंगला नाड़ी दाहिने भाग से जुड़ी मानी जाती है. इसे ऊर्जा, गर्माहट और क्रियाशीलता की नाड़ी कहा जाता है. मान्यता है कि दाहिना हाथ अधिक सक्रिय प्राणशक्ति से जुड़ा होता है.

ऊर्जा के संचार की अवधारणा
जब किसी के सिर पर दाहिने हाथ से आशीर्वाद दिया जाता है, तो इसे ऊर्जा हस्तांतरण की प्रक्रिया के रूप में देखा जाता है. यही कारण है कि आशीर्वाद का स्पर्श लोगों को मानसिक रूप से आश्वस्त और भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस कराता है.

विज्ञान और मनोविज्ञान का नजरिया
आधुनिक विज्ञान इस परंपरा को अलग तरीके से समझाता है. शरीर का दाहिना भाग मस्तिष्क के बाएं हिस्से द्वारा नियंत्रित होता है, और मस्तिष्क का बायां भाग तर्क, भाषा और निर्णय क्षमता से जुड़ा माना जाता है. ज्यादातर लोग दाहिने हाथ से काम करते हैं, इसलिए यह हाथ अधिक नियंत्रित और सटीक होता है.

आत्मविश्वास का संकेत
मनोविज्ञान बताता है कि जब कोई व्यक्ति अपने प्रमुख हाथ से स्पर्श करता है, तो उसमें स्वाभाविक आत्मविश्वास और नियंत्रण का भाव होता है. सामने वाले व्यक्ति के लिए यह संकेत सुरक्षा और भरोसे का अनुभव कराता है. यही कारण है कि दाहिने हाथ से दिया गया आशीर्वाद अधिक प्रभावशाली महसूस होता है.

रोजमर्रा की जिंदगी में परंपरा का असर
आपने ध्यान दिया होगा कि घरों में बच्चे भी अनजाने में बड़ों का आशीर्वाद लेते समय सिर दाहिनी ओर झुकाते हैं, ताकि हाथ सही तरह से रखा जा सके. शादियों, त्योहारों और धार्मिक अनुष्ठानों में भी यही तरीका अपनाया जाता है.

पीढ़ियों से चलती आदत
यह केवल धार्मिक नियम नहीं, बल्कि सामाजिक आदत बन चुका है. जब हम बचपन से एक ही तरीका देखते हैं, तो वही स्वाभाविक लगता है. धीरे-धीरे यह परंपरा पहचान का हिस्सा बन जाती है.

परंपरा और तर्क का संगम
दाहिने हाथ से आशीर्वाद देने की परंपरा सिर्फ धार्मिक मान्यता नहीं है. इसमें ज्योतिष का प्रतीकवाद, योग की ऊर्जा अवधारणा और विज्ञान का व्यवहारिक तर्क तीनों जुड़ते हैं. यही कारण है कि यह अभ्यास आज भी उतना ही जीवंत है. जब कोई बुजुर्ग दाहिने हाथ से सिर पर हाथ रखता है, तो वह केवल संस्कार नहीं निभा रहा होता-वह पीढ़ियों से चली आ रही विश्वास की परंपरा को आगे बढ़ा रहा होता है.

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