समुद्री खीरा क्या है…ना सब्जी …ना फल …तब भी खूब खाया जाता है..आखिर क्या है ये फिर
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समुद्री खीरा को देखकर लगता है कि यह सब्जी या फल है, हालांकि इसको अंग्रेजी में सी कुकंबर कहते हैं. वैसे वास्तव में यह एक समुद्री जानवर है. वो स्टारफिश और समुद्री अर्चिन का रिश्तेदार है. दुनिया के सभी महासागरों में समुद्र तल पर पाया जाता है. खाने के शौकीन इसको बहुत मजे से खाते हैं. चीन में ये पारंपरिक दवाओं के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
वास्तव में समुद्री खीरा एक जानवर है. बेशक उसका नाम सब्जी का हो लेकिन वो समुद्री इंवेरटेब्रेट है. इसकी रीढ़ की हड्डी नहीं होती. इसका शरीर नरम, चमड़े जैसा और बेलनाकार होता है, जो वाकई में खीरे की तरह दिखता है. इसके मुंह के चारों ओर 8 से 30 तक तंतु होते हैं, जो भोजन पकड़ने में मदद करते हैं. लेकिन ये खाया भी जाता है. कई एशियाई देशों में इसके लजीज व्यंजन बनते हैं. इसके भोजन को राजसी और विलासी भोजन माना जाता है.
इनका शरीर लंबा और बेलनाकार होता है, जो देखने में बिल्कुल खाने वाले खीरे जैसा लगता है. इनकी त्वचा चमड़े जैसी सख्त होती है. समुद्री खीरे की दुनियाभर में करीब 1,700 प्रजातियां पाई जाती हैं. इनका आकार कुछ मिलीमीटर से लेकर 3 मीटर तक हो सकता है. यह जीव अपनी अनोखी आदतों और पारिस्थितिकी तंत्र में अहम भूमिका के लिए जाना जाता है.
एशिया, खासकर चीन में इसे बड़े चाव से खाया जाता है. इसे सुखाकर ‘बेच-डे-मेर’ या ‘त्रिपांग’ नामक महंगा व्यंजन बनाया जाता है. पारंपरिक चीनी चिकित्सा में इसका इस्तेमाल जोड़ों के दर्द, थकान और कमजोरी के इलाज के लिए सदियों से किया जा रहा है. इसमें ग्लूकोसामाइन और चोंड्रोइटिन सल्फेट जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो जोड़ों के लिए फायदेमंद माने जाते हैं. हालांकि इस पर वैज्ञानिक शोध अभी शुरुआती दौर में है.
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समुद्री खीरा समुद्र तल पर मिलने वाले जैविक कचरे, मृत जीवों के अवशेषों और गंदगी को खाता है. यह रेत और मिट्टी को मुंह में डालता है, उसमें से पोषक तत्व सोखता है और साफ रेत को बाहर निकाल देता है. यह प्रक्रिया समुद्री तल को साफ रखने और पोषक तत्वों के रिसायकिल करने में मदद करती है, ठीक वैसे ही जैसे केंचुए जमीन को उपजाऊ बनाते हैं. इसलिए इसे समुद्र का वैक्यूम क्लीनर भी कहा जाता है.
खतरा महसूस होने पर यह अजीबोगरीब हथियार का इस्तेमाल करता है. ये अपने शरीर के अंदरूनी हिस्से को गुदा के रास्ते बाहर निकाल फेंकता है. ये चिपचिपे धागे दुश्मन को उलझा देते हैं. इसकी कुछ प्रजातियां खतरे में ‘होलोथुरिन’ नाम का जहरीला रसायन भी छोड़ती हैं, जो दुश्मनों को मार सकता है. हैरानी की बात यह है कि ये अपने खोए हुए अंग कुछ ही हफ्तों में दोबारा उगा लेता है.
समुद्री खीरा अपने गुदा के जरिए पानी अंदर लेता है, जो उसके शरीर के अंदर मौजूद ‘श्वसन वृक्ष’ नामक अंगों तक पहुंचता है. ये समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का एक अहम हिस्सा है. लेकिन इसकी मांग के कारण कई प्रजातियां अब खतरे में हैं. इन्हें बचाने के लिए इनकी कृत्रिम खेती पर जोर दिया जा रहा है.
इनके शरीर में मछलियों की तरह हड्डियां नहीं होतीं. इसकी बजाय इनकी त्वचा के नीचे सूक्ष्म कैल्शियम के कण होते हैं जिन्हें ‘ओसिक्लेस’ कहा जाता है. ये जो मल त्यागते हैं, वह समुद्र के पीएच (pH) स्तर को संतुलित करने में मदद करता है. ये कोरल रीफ (मूंगा चट्टानों) को कैल्शियम देता है.
ये बहुत धीमी गति से चलते हैं. ये अपने छोटे-छोटे ‘ट्यूब फीट’ या शरीर की मांसपेशियों को सिकोड़कर रेंगते हैं.इनकी भारी मांग और ऊंची कीमत के कारण इनकी अवैध तस्करी बहुत ज्यादा होती है, इसी वजह से इनकी कई प्रजातियां अब खतरे में हैं.
इनकी ज्यादातर प्रजातियों का वजन 500 ग्राम से 2 किलोग्राम के बीच होता है. समुद्री खीरे के पास हमारी तरह आंखें नहीं होती हैं. इसकी त्वचा में विशेष कोशिकाएं होती हैं जो रोशनी और अंधेरे के बीच अंतर महसूस कर सकती हैं.वो देखने की बजाय स्पर्श और पानी में रसायनों के माध्यम से अपने आसपास के वातावरण को समझते हैं.
सामान्य तौर पर ये इंसानों के लिए खतरनाक नहीं हैं. यदि आप इन्हें छूते हैं, तो यह अपने चिपचिपे अंगों को बाहर निकाल सकते हैं, जो जानलेवा तो नहीं होता लेकिन इसे साफ करना बहुत मुश्किल होता है और त्वचा में हल्की जलन हो सकती है. ये शिकारी जीव नहीं हैं, इसलिए ये कभी इंसानों पर हमला नहीं करते.