महाभारत के नकुल की याद दिलाता नकुड़ का प्राचीन शिवालय, सहारनपुर का प्राचीन नकुलेश्वर महादेव मंदिर!

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सहारनपुर का प्राचीन कस्बा नकुड़ महाभारत काल से जुड़ी ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को आज भी संजोए हुए है. मान्यता है कि पांडव पुत्र नकुल ने यहां शिवलिंग की स्थापना कर नकुलेश्वर महादेव मंदिर की नींव रखी थी. कभी यमुना नदी से सटा यह स्थल आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है, जहां श्रावण मास में हजारों भक्त जलाभिषेक करने पहुंचते हैं और 40 दिन की पूजा-अर्चना से अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं.

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सहारनपुर. शुरू से ही धार्मिकता से जुड़ा हुआ रहा है, यहां महाभारत युद्ध के दौरान पांडवों ने विभिन्न स्थानों पर अपनी रणनीति तैयार की और भगवान शिव की आराधना भी की. इसी कड़ी में सहारनपुर का कस्बा नकुड़ आता है, जिसका नाम पांडव पुत्र नकुल के नाम पर पड़ा है. द्वापर युग में स्थापित पौराणिक नकुलेश्वर महादेव मंदिर ऐतिहासिक महत्व रखता है. महाभारत काल के दौरान पांडव पुत्र नकुल महाराज ने यहां अपनी सेना के साथ पड़ाव डाला था. उस समय यमुना नदी नगर नकुड़ से सटी हुई बहती थी. प्रमाण स्वरूप, यमुना में स्नान के लिए मंदिर के पीछे बनी पौड़ी आज भी विद्यमान है. बताया जाता है कि भगवान शिव के परम भक्त नकुल महाराज ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी और पास ही एक कुआं भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए खोदवाया था. महाराज नकुल के नाम पर ही इस नगर का नाम “नकुल” रखा गया था, जो बाद में बदलकर “नकुड़” हो गया.

शिवलिंग स्थापित होने के पश्चात पूजा-अर्चना के लिए मंदिर का निर्माण कराया गया, जहां हर वर्ष श्रावण मास में हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक करने आते हैं. इतना ही नहीं, सहारनपुर क्षेत्र सहित हरियाणा, पंजाब और आसपास के कई जनपदों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं. महाभारत युद्ध के दौरान पांडव पुत्र के नाम पर पड़ा था इस कस्बे का नाम. साहित्यकार डॉ. वीरेंद्र आज़म ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि नकुड़ सहारनपुर की पुरानी चार तहसीलों में से एक है. नकुड़ का इतिहास बहुत प्राचीन है और यह महाभारत काल से जुड़ा हुआ है, जब महाभारत का युद्ध हुआ, तो कुरुक्षेत्र हमारे यमुना पार के ही क्षेत्र में था. कुरुक्षेत्र के युद्ध में दोनों तरफ की बड़ी-बड़ी राजाओं की सेनाओं ने भाग लिया था.

नकुल, जो पांडवों में से एक थे, पांडव पुत्र थे, नकुल की सेना और कुरुक्षेत्र युद्ध की तैयारियां जहां होती थी, वह क्षेत्र नकुड़ था और नकुल के नाम पर ही इस कस्बे का नाम “नकुल” पड़ा था. नकुल भगवान शिव के बड़े भक्त थे, उन्होंने यहां पर एक शिवलिंग की स्थापना की थी और उस मंदिर को आज भी “नकुलेश्वर महादेव” के नाम से जाना जाता है. जितनी भी प्राकृतिक नदियां होती हैं, वे अपना रास्ता बदलती रहती हैं. माना जाता है कि यमुना नदी का जो प्रवाह था, वह नकुड़ से सटकर बहता था और आज भी मंदिर के पीछे नदी के तट पर बनी सीढ़ियां मौजूद हैं. ऐसा माना जाता है कि नदी में स्नान के लिए ये पौड़ी बनवाई गई थी. यह द्वापर युग का यह मंदिर और कस्बे का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व है. नकुल के नाम पर ही इस कस्बे का नाम “नकुल” पड़ा, जो बाद में बदलकर “नकुड़” कहलाया. यहां पर नकुलेश्वर महादेव की बहुत मान्यता है. जो भी व्यक्ति श्रद्धा भाव से यहां पर 40 दिन पूजा-पाठ करता है और दीपक जलाता है, उसकी मन्नत पूरी होती है.

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Monali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

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