डेंजरल, अनप्रिडिक्टेबल… जयशंकर ने दुनिया को चेताया, एक खतरनाक ट्विलाइट जोन में फंसने वाला है ग्लोबल ऑर्डर

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ग्लोबल लेवल पर हो रहे बड़े बदलावों को लेकर एक बार फिर अपनी बेबाक राय रखी है. मंगलवार को FECC के तीन दिवसीय ग्लोबल इकोनॉमिक को-ऑपरेशन समिट को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा कि हम एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रहे हैं जो न केवल ‘मैसी’ यानी उलझा हुआ है, बल्कि बेहद डेंजरस भी साबित हो सकता है. विदेश मंत्री ने वर्ल्‍ड ऑर्डर में आ रहे बदलावों को ट्विलाइट जोन यानी धुंधला दौर का नाम दिया. उन्होंने कहा कि स्थापित ग्लोबल ऑर्डर अब हमारी आंखों के सामने तेजी से बदल रहा है. जयशंकर ने आगाह किया कि पुरानी व्यवस्था का रिप्लेसमेंट ढूंढना या नई व्यवस्था बनाना बहुत कठिन काम है.

जयशंकर ने भविष्यवाणी की कि दुनिया अब एक लंबे ट्विलाइट जोन की ओर बढ़ रही है. इस दौर को लेकर उन्होंने चार बड़े शब्दों का इस्तेमाल किया: मैसी (Messy), रिस्की (Risky), अनप्रिडिक्टेबल(Unpredictable) और डेंजरस (Dangerous). उनके मुताबिक, हमने अलग-अलग जियोग्राफी में पहले ही इसके संकेत देखने शुरू कर दिए हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वर्तमान व्यवस्था के कुछ हिस्से नई उभरती व्यवस्था के तत्वों के साथ साथ-साथ बने रहेंगे.

AI और टेक्नोलॉजी का ‘ट्रांसफॉर्मेटिव’ दौर

जयशंकर ने भविष्य की चुनौतियों में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका को सबसे अहम बताया. उन्होंने कहा कि AI के इस युग में टेक्नोलॉजी पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ट्रांसफॉर्मेटिव होने वाली है. विदेश मंत्री ने एक बड़ा पॉइंट यह रखा कि अब फैसले लेते समय इकोनॉमिक्स को किनारे कर दिया जाएगा और उसकी जगह पॉलिटिक्स और सिक्योरिटी ले लेगी. यानी आने वाले समय में देश अपने आर्थिक हितों से ऊपर अपनी सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता को रखेंगे.

प्रोडक्शन और फाइनेंस का वेपनाइजेशन

दुनिया आज जिस दौर से गुजर रही है, उसमें व्यापार और पैसे को भी हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. जयशंकर ने इसे लेकर चिंता जताई और कहा कि आज हम ‘वेपनाइजेशन ऑफ प्रोडक्शन’ और फाइनेंस देख रहे हैं. उन्होंने बताया कि कैसे देश अब एक-दूसरे पर दबाव बनाने के लिए मार्केट शेयर का गलत फायदा उठा रहे हैं. एक्सपोर्ट कंट्रोल्स को कड़ा कर रहे हैं. ग्लोबल सप्लाई चेन और फाइनेंस को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहे हैं.

भारत का दम: ‘पोजीशन ऑफ स्ट्रेंथ’ से बातचीत

इन तमाम वैश्विक चुनौतियों के बीच जयशंकर ने भारत की मजबूत होती स्थिति का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज भारत इंटरनेशनल पार्टनर्स के साथ ‘पोजीशन ऑफ स्ट्रेंथ’ यानी मजबूत स्थिति से बात कर रहा है. भारत की इस बढ़ती ताकत का सबूत हाल ही में हुई कुछ बड़ी ट्रेड डील्स हैं.

अमेरिका के साथ समझौता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुई फोन पर बातचीत के बाद, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर मात्र 18 प्रतिशत करने का एलान किया है.

‘मदर ऑफ ऑल डील्स’: भारत और ईयू (EU) ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के लिए बातचीत पूरी कर ली है. यह समझौता दोनों पक्षों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाएगा.

बदलती दुनिया में भारत का रास्ता
जयशंकर के इस बयान से साफ है कि भारत वैश्विक अस्थिरता को भांप चुका है. जहां एक तरफ दुनिया ‘मैसी और डेंजरस’ मोड़ की तरफ जा रही है, वहीं भारत अपनी इकोनॉमिक पावर और डिप्लोमैटिक स्ट्रेंथ के जरिए अपने हितों को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर का संदेश स्पष्ट था क‍ि दुनिया बदल रही है, चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन भारत अब पहले से कहीं ज्यादा तैयार और मजबूत है.

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