बरेली रामगंगा आंखा मोड़ की स्पेशल चार्ट 47 साल से स्वाद का केंद्र.
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बरेली के रामगंगा किनारे आंखा मोड़ पर लगा एक साधारण-सा चाट का ठेला पिछले 47 वर्षों से स्वाद और विश्वास की मिसाल बना हुआ है. पिता और उनके तीन पुत्र देसी मसालों से तैयार स्पेशल चाट, मिर्ची वाली पकौड़ी और पानी के बताशों के जरिए तीन पीढ़ियों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही यह चाट आज भी गुणवत्ता, मेहनत और अपनापन के दम पर लोगों को अपनी ओर खींच रही है.
बरेली. शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच रामगंगा के शांत किनारे आंखा मोड़ पर लगा एक साधारण-सी चाट एक ही परिवार के चार सदस्य बेचते हैं. पिता और उनके तीन पुत्र चाट सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं और उनकी सशलत्ते मिर्ची वाली पकौड़ी, पानी के बताशे के साथ पांच प्रकार की स्पेशल चार्ट खिलाई जाती है. पिछले 47 वर्षों से लोगों के स्वाद और विश्वास का केंद्र बना हुआ है. देखने में भले ही यह एक छोटा-सा चाट का स्टॉल लेकर रोड पर ही स्पेशल चार्ट का पत्ता बेचते है. लेकिन इसके पीछे जुड़ी है.तीन पीढ़ियों की मेहनत, समर्पण और परंपरा की लंबी कहानी है. एक ही परिवार के पांच सदस्य मिलकर लगातार 47 साल से इस दुकान को चला रहे हैं. अपने खास देसी मसालों के दम पर इलाके में अलग पहचान बना चुके हैं.
इस ठेले की शुरुआत परिवार के बुजुर्ग सदस्य ने करीब पांच दशक पहले की थी. उस समय आसपास ज्यादा दुकानें नहीं थी और लोग घर के बने स्वाद की तलाश में रहते थे. धीरे-धीरे यहां की चाट का स्वाद लोगों की जुबान पर चढ़ गया. रामगंगा पर बिकने वाली स्पेशल चार्ट की पकौड़ी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी. साथ परिवार की नई पीढ़ी भी इस काम से जुड़ती गई और आज पांच सदस्य मिलकर इसे संभाल रहे हैं. सुबह से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं—दाल भिगोना, मसाले पीसना, चटनी तैयार करना और ताजे सामग्री की व्यवस्था करना. हर काम में सफाई और स्वाद का विशेष ध्यान रखा जाता है.
इस चाट की खासियत खुद के बनाए हुए मसालें
इस चाट की सबसे बड़ी खासियत है इसका शुद्ध देसी स्वाद परिवार खुद मसालों को चुनकर, सुखाकर और पीसकर तैयार करता है.बाजार के रेडीमेड मसालों की जगह घर में बने मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. जिससे स्वाद में अलग ही खुशबू और गहराई आती है. यहां मिलने वाले प्रमुख व्यंजनों में पानी के बताशे, मिर्च की चाट, पकौड़ी और दाल के पकौड़े शामिल हैं.खासकर पानी के बताशों का खट्टा-मीठा और मसालेदार पानी लोगों को बार-बार यहां खींच लाता है. दिन से लेकर शाम ढलते ही ठेले के आसपास चहल-पहल बढ़ने लगती है. कॉलेज के छात्र, दफ्तर से लौटते कर्मचारी और परिवार के साथ घूमने निकले लोग यहां रुककर चाट का आनंद लेते हैं. कई ग्राहक ऐसे भी हैं जो बचपन में अपने माता-पिता के साथ यहां आते थे. अब अपने बच्चों को वही स्वाद चखाने लाते हैं. यह ठेला सिर्फ खाने की जगह नहीं, बल्कि यादों का हिस्सा बन चुका है.
आखा मोड़ रामगंगा की फेमस स्पेशल चार्ट काउंटर के संचालक सोनू का कहना है. कि उनके लिए यह काम सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है. बदलते समय में जहां बड़े-बड़े रेस्टोरेंट और फूड डिलीवरी ऐप्स का दौर है. वहां एक छोटे चाट की रेडी का 47 साल तक टिके रहना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. उनका मानना है कि यदि गुणवत्ता और ईमानदारी बनाए रखी जाए तो ग्राहक कभी दूर नहीं जाते. रामगंगा पुल के क्रॉस होते ही अखा मोड पर हमारे छोटे-छोटे स्टॉल चार्ट के संचालित किए जाते हैं. पिता के साथ उनके तीन पुत्र भी इसी व्यापार में उतरे हुए हैं.और उनकी चार्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है. स्थानीय अधिवक्ता मुनिराज के अनुसार, “यहां की चाट में सिर्फ मसाले नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और अपनापन घुला हुआ है.” यही कारण है कि रामगंगा किनारे आंखा मोड़ का यह मशहूर चाट आज भी बरेली के स्वाद प्रेमियों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है.
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