चेक और डीडी में ज्यादा सुरक्षित कौन, राजपाल यादव से कोर्ट ने डिमांड ड्राफ्ट ही क्यों मांगा, चेक की तरह डीडी भी हो सकता है बाउंस!
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DD vs Cheque : बैंक चेक तो आपने भी कई बार जारी किए होंगे और डिमांड ड्राफ्ट भी बनवाई होगी. फिर तो आपको पता होगा कि दोनों में ज्यादा सुरक्षित क्या होता है और कोर्ट ने इस बार राजपाल यादव को क्यों चेक की जगह डीडी जारी करने के लिए कहा है. बैंक ने राजपाल यादव को 1.5 करोड़ की डीडी जमा कराने का आदेश दिया था, जिसे बनवाने पर कुछ रुपये शुल्क भी देना पड़ता है.

राजपाल यादव को बैंक ने डिमांड ड्राफ्ट बनवाने का आदेश दिया है.
नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्टर राजपाल यादव को आखिरकार जमानत मिल ही गई, लेकिन इस बार बैंक ने चेक के बजाय उन्हें बैंक डिमांड ड्राफ्ट यानी डीडी जमा करने का आदेश दिया है. सवाल यह उठता है कि आखिर दोनों में अंतर क्या है और दोनों में ज्यादा सुरक्षित किसे माना जाता है. क्या चेक की तरह डीडी भी बाउंस हो सकता है. इसके अलावा एक और सवाल है जो राजपाल यादव के फैंस और इस पूरे मामले पर नजर रखने वाले जानना चाहते हैं कि डीडी बनवाना चेक के मुकाबले ज्यादा खर्चीला होता है या नहीं.
सबसे पहले आपको यह बताते हैं कि राजपाल यादव को इस बार बैंक ने डीडी ही बनवाने के लिए क्यों बोला है. पिछली बार राजपाल यादव ने चेक दिया था जो बाउंस हो गया था. यह पूरा केस ही चेक बाउंस का है, जिसमें राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा है. शायद यही वजह है कि इस बार कोर्ट ने चेक के बजाय डीडी जमा करने का आदेश दिया है. डीडी को चेक के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. इसकी तकनीकी वजह भी है.
चेक और डीडी में सबसे बड़ा अंतर क्या
चेक और डिमांड ड्राफ्ट में सबसे बड़ा अंतर यही है कि चेक पर जारीकर्ता का नाम और हस्ताक्षर होता है, जिसके लिए पूरी तरह से चेक जारी करने वाला ही उत्तरदायी होता है. डीडी बैंक जारी करता है और इसके लिए बैंक ही जिम्मेदार होता है. चेक को कैश कराने के लिए बैंक में डाला जाता है, अगर चेक जारी करने वाले केक खाते में पैसे की कमी है तो उसका चेक बाउंस भी हो सकता है, जैसा कि राजपाल यादव के केस में हुआ है. लेकिन, डीडी के मामले में बाउंस होने का कोई खतरा नहीं होता है.
प्रीपेड होता है डीडी
चेक और डीडी में एक बड़ा अंतर ये भी है कि चेक एक तरह से पोस्ट पेड होता है, जिसमें पहले चेक जारी किया जाता है और उसे बैंक में जमा करने पर तब भुगतान होता है. यही वजह है कि चेक में बाउंस होने का खतरा ज्यादा रहता है. डीडी एक तरह से प्रीपेड व्यवस्था होती है, जिसमें पहले पैसे जमा होते हैं और फिर उसे जमा करके भुगतान करा लिया जाता है. लिहाजा डीडी के बाउंस होने का कोई खतरा नहीं होता है. इसके अलावा चेक में जारीकर्ता के हस्ताक्षर की भी जरूरत होती है, जबकि डीडी में ऐसी कोई जरूरत नहीं होती.
इसलिए भी डीडी ज्यादा सुरक्षित
- डीडी को हस्ताक्षर गलत होने या मेल नहीं खाने की वजह से रोका नहीं जा सकता है, जबकि चेक में इस तरह की समस्या रहती है.
- चेक को छोटे भुगतान के लिए जारी किया जाता है, जबकि डीडी को बड़े अमाउंट के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है.
- चेक और डीडी दोनों की ही वैलिडिटी 3-3 महीने की होती है. चेक खोने पर दुरुपयोग हो सकता है, जबकि डीडी में ऐसा कोई जोखिम नहीं होता है.
1.5 करोड़ की डीडी पर कितना खर्चा
कोर्ट ने राजपाल यादव को 1.5 करोड़ की डीडी बनवाकर जमा करने का आदेश दिया था. बैंक चेक जारी करने के लिए तो कोई शुल्क नहीं लेते हैं, लेकिन डीडी के लिए शुल्क लिया जाता है. एसबीआई में 1,000 रुपये की डीडी बनवाने के लिए 4 रुपये का शुल्क लगता है, जिसमें जीएसटी भी शामिल होती है. कुछ बैंक जीएसटी अलग से चार्ज करते हैं. 1.5 करोड़ की डीडी बनवाने पर 6 हजार रुपये का शुल्क देना पड़ेगा. वैसे एसबीआई की मैक्स सुविधा लेने पर अधिकतम चार्ज 2 हजार रुपये तक ही रहता है, भले ही आपकी डीडी का अमाउंट कितना भी हो. कुछ प्रीमियम अकाउंट के लिए बैंक फ्री में भी डीडी बनाकर देते हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें