मानसिक रोगी को आगरा के पागलखाना अस्पताल में एडमिट करने का क्या है प्रोसेस? निदेशक ने दी जानकारी
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Agra news: किसी भी मानसिक रोगी को भर्ती कराने के लिए छोटा सा लीगल प्रोसेस है. उसे पूरा कर उसका इलाज शुरू किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि समाज में कोई भी अति गंभीर ऐसा मानसिक रोगी जो अपनी या दूसरे की क्षति कर सकता है तो ऐसे मरीज के लिए मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के तहत धारा 100 के अंतर्गत उस मरीज को भर्ती कराया जा सकता है.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (पागलखाना) में किसी भी मानसिक रोगी का इलाज किया जा सकता है. संस्थान के डायरेक्टर ने बताया कि किसी भी मानसिक रोगी को भर्ती कराने के लिए छोटा सा लीगल प्रोसेस है. उसे पूरा कर उसका इलाज शुरू किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि समाज में कोई भी अति गंभीर ऐसा मानसिक रोगी जो अपनी या दूसरे की क्षति कर सकता है तो ऐसे मरीज के लिए मेंटल हेल्थ केयर एक्ट 2017 के तहत धारा 100 के अंतर्गत उस मरीज को भर्ती कराया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इसके लिए सम्बंधित पुलिस कोर्ट के जरिये मरीज को अस्पताल में भर्ती करवा सकती है. मरीज के भर्ती होने के बाद जब तक वह स्वथ्य नहीं हो जाता है उसका पूरा इलाज मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में किया जाता है.
मानसिक रोगियों का फ्री में होता है उपचार
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डायरेक्ट प्रो. डॉ. दिनेश सिंह राठौर ने बताया कि मरीज के अस्पताल में भर्ती होने के बाद उसका पूरा उपचार निशुल्क किया जाता है. उन्होंने कहा कि चाहें इलाज 10 दिन चले या 1 महीने से भी ज्यादा उसको अस्पताल में ही रखा जायेगा यहाँ पूरी व्यवस्था है. यही उसका इलाज होगा. मरीज को दवाएं भी दी जाएगी जरुरत पड़ने पर मरीज की काउंसलिंग भी की जाती है. उन्होंने कहा की अति गंभीर मरीज को इलेक्ट्रिक शॉक दिया जाता है, यह मानसिक रोगियों को जल्द स्वस्थ्य करने में सहायक होती है.
जरूरत पड़ने पर मरीज को दी जाती है ईसीटी
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के डायरेक्ट प्रो. डॉ. दिनेश सिंह राठौर ने बताया कि मरीज यदि अति गंभीर अवस्था में तो इसे ईसीटी यानि कि इलेक्ट्रॉकन्वेलसिव थेरेपी दी जाती है. यह मरीज के लिए बेहद लाभकारी होती है. उन्होंने कहा कि यह एक प्रमुख मनोरोग उपचार है, जिसका उपयोग गंभीर अवसाद (Depression), बाइपोलर डिसऑर्डर, और कैटाटोनिया के लिए किया जाता है, जब दवाएं काम नहीं करतीं. इसमें बेहोशी की हालत में मस्तिष्क में थोड़ी मात्रा में विद्युत प्रवाह प्रवाहित किया जाता है, जिससे बहुत कम समय के लिए दौरा पड़ता है. उसके बाद मरीज को तीव्र गति से आराम मिलना शुरू हो जाता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें