Amalaki Ekadashi kab hai 2026 Date muhurat 4 shubh yog parana time | significance of falgun shukla Ekadashi | आमलकी एकादशी कब है? बनेंगे 4 शुभ योग, जानें तारीख, मुहूर्त, व्रत पारण का समय, महत्व
Amalaki Ekadashi Kab Hai 2026 Date: आमलकी एकादशी को आमला एकादशी, आंवला एकादशी या फाल्गुन शुक्ल एकादशी कहते हैं. इस दिन रंगभरी एकादशी मनाई जाती है. यह दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी है. शिव की नगरी काशी में आमला एकादशी पर रंगभरी एकादशी मनाते हैं. इसमें शिव और गौरी की पूजा करके रंग और गुलाल अर्पित करते हैं. आमलकी एकादशी पर विष्णु पूजा करने से सभी प्रकार के पाप और दोष मिट जाते हैं. इस बार आमलकी एकादशी पर 4 शुभ योग भी बन रहे हैं. पंचांग के अनुसार हर साल फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी मनाते हैं. आइए जानते हैं कि आमलकी एकादशी कब है? आमलकी एकादशी का मुहूर्त, शुभ योग, पारण समय क्या है?
आमलकी एकादशी की तारीख
पंचांग के अनुसार, आमलकी एकादशी के लिए फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि 27 फरवरी को 12 बजकर 33 एएम पर शुरू होगी और इस तिथि का समापन 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर आमलकी एकादशी 27 फरवरी शुक्रवार को है. उस दिन रंगभरी एकादशी भी मनाई जाएगी.
4 शुभ योग में आमलकी एकादशी
इस बार की आमलकी एकादशी पर 4 शुभ योग बन रहे हैं. आमलकी एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान् योग और सौभाग्य योग बनेंगे. आमलकी एकादशी पर आयुष्मान् योग प्रात:काल से लेकर शाम 7:44 पी एम तक रहेगा, उसके बाद से सौभाग्य योग बनेगा.
इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह में 10 बजकर 48 ए एम से बनेगा, जो अगले दिन 28 फरवरी को 06:47 ए एम तक रहेगा. एकादशी पर रवि योग सुबह में 06 बजकर 48 ए एम से सुबह 10 बजकर 48 ए एम तक है. ये 4 योग अत्यंत ही शुभ फलदायी हैं. इसमें आप कोई शुभ कार्य, पूजा, पाठ आदि करते हैं, तो वह फलित होगा.
आमलकी एकादशी मुहूर्त
जो लोग आमलकी एकादशी का व्रत रखेंगे, वे भगवान विष्णु और आंवले के पेड़ की पूजा सुबह में 06:48 ए एम से लेकर 11:08 ए एम के बीच कर सकते हैं, उसके बाद से राहुकाल प्रारंभ हो जाएगा. इस मुहूर्त में लाभ-उन्नति मुहूर्त 08:15 ए एम से 09:41 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त
09:41 ए एम से 11:08 ए एम तक रहेगा.
आमलकी एकादशी पारण समय
आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी शनिवार को किया जाएगा. उस दिन व्रत पारण का समय सुबह में 06 बजकर 47 ए एम से 09 बजकर 06 ए एम तक है. उस दिन द्वादशी तिथि का समापन रात में 08 बजकर 43 पी एम पर होगा.
आमलकी एकादशी का महत्व
आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले का भी महत्व है. विष्णु जी की पूजा में आंवले का भोग लगाते हैं और उसके पेड़ की पूजा करते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, आंवले के पेड़ में भगवान विष्णु का वास होता है. आंवला एक अमृत फल है, इसके सेवन से सेहत उत्तम रहता है. इस दिन आंवले के पेड़ के नीचे पूजा, भोजन आदि करने से सेहत लाभ प्राप्त होता है. विष्णु कृपा से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है.