रेखा: 200+ फिल्मों में अभिनय, पद्मश्री और राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त

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बॉलीवुड की वो खूबसूरत अदाकारा जिसकी खूबसूरती और अदाकारी के लोग आज भी दीवाने हैं. उनकी गितनी बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन और मंझी हुई अभिनेत्रियों में होती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि करियर की शुरुआत में उनका एक्टिंग के प्रति बिलकुल भी झुकाव नहीं था.

भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन अभिनेत्रियों में शुमार इस सुपरस्टार ने अपने करियर में 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. अपने शानदार अभिनय कौशल और मनोरंजन जगत में योगदान के लिए इस अभिनेत्री को कई पुरस्कार मिले, जिनमें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री भी शामिल हैं.

इतनी जबरदस्त लोकप्रियता के बावजूद, वह कभी अभिनेत्री बनना नहीं चाहती थीं.दरअसल, उन्हें जबरन इस इंडस्ट्री में लाया गया था. ये अदाकारा और कोई नहीं बल्कि लाखों दिलों पर राज करने वाली रेखा हैं. साउथ इंडस्ट्री के नामी सितारों के घर जन्मी एक्ट्रेस ने महज 13 साल की उम्र में एक्टिंग में कदम रखा था.

दक्षिण भारत के मशहूर सितारों पुष्पावली और जेमिनी गणेशन की बेटी रेखा ने बचपन से ही मनोरंजन जगत को करीब से देखा. हाल ही में रेखा का बीबीसी के साथ पुराना इंटरव्यू वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने बताया कि वह कैसे अभिनेत्री बनीं.

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एक्ट्रेस ने फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने के बारे में बात करते हुए कहा था, ‘मैं 13 साल की थी. तब कुलजीत पाल और शत्रुजीत पाल हीरोइन की तलाश में मद्रास आए थे,किसी ने उन्हें मेरे बारे में बताया. उन्होंने यह भी याद किया कि उन्हें फिल्म में लेने की बात की गई, जबकि उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं थी और हिंदी भी नहीं आती थी’.

रेखा ने आगे बताया, ‘उन्होंने पूछा कि क्या मैं अभिनेत्री बनना चाहती हूं. मैंने कहा ‘नहीं’. उन्होंने पूछा कि क्या मुझे हिंदी आती है. मैंने कहा ‘नहीं’. फिर भी उन्होंने कहा कि वे कल वापस आकर मुझे साइन करेंगे’. रेखा के मुताबिक, उनकी मां ने उन्हें अभिनेत्री बनने के लिए प्रेरित किया.

दिग्गज अदाकारा ने आगे कहा, ‘मैं कभी अभिनेत्री नहीं बनना चाहती थी. लेकिन मुझे बहुत कोशिश करके अभिनेत्री बनाया गया’. बॉलीवुड में अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए रेखा ने एक बेहद कड़वा अनुभव साझा किया था. वो कहती हैं कि उन्हें यंग एज काफी कुछ झेलना पड़ा था. उन्होंने बताया कि फिल्म अंजना की शूटिंग के दौरान अचानक उनसे एक किस सीन करवाया गया, जिसकी जानकारी उन्हें पहले से नहीं दी गई थी.

उस घटना को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘वो सीन बिना मुझे बताए डाला गया था’. रेखा ने बताया कि वो सीन बिना उन्हें बताए डाला गया था और करीबन पांच मिनट तक वो सीन चलता रहा. एक्ट्रेस कहती हैं कि वो सीन खत्म होने के बाद वो बुरी तरह रोने लगी थीं.

रेखा ने आगे बताया कि वो शॉट के बाद रो-रोकर बेहाल हो गई थीं. वो इतना परेशान थीं कि वो रोते-रोते बेहोश हो गई थीं. एक्ट्रेस ने इस बात पर कहा था कि उस दौर में एक्ट्रेसेस की अनुमति पर ज्यादा जोर नहीं दिया जाता था. परेशान करने वाली शुरुआत और निजी अनिच्छा के बावजूद, रेखा भारतीय सिनेमा की सबसे आइकॉनिक अभिनेत्रियों में से एक बन गईं.

तेलुगू फिल्मों ‘इंटी गुत्तु’ और ‘रंगुला रत्नम’ में बाल कलाकार के रूप में डेब्यू करने के बाद, रेखा को 1969 में कन्नड़ फिल्म ‘ऑपरेशन जैकपॉट नल्ली सीआईडी 999’ में पहली बार लीड रोल मिला. उसी साल उन्होंने बॉलीवुड में ‘अंजना सफर’ से डेब्यू किया, लेकिन सेंसरशिप की वजह से फिल्म दस साल तक रिलीज नहीं हो सकी. रेखा की पहली हिंदी रिलीज ‘सावन भादों’ 1970 में आई, जिससे वह रातों-रात स्टार बन गईं. 1980 और 1990 के शुरुआती दौर में रेखा कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में नजर आईं, जिनमें ‘खूबसूरत’, ‘बसेरा’, ‘सिलसिला’ और ‘एक ही भूल’ शामिल हैं. इस दौरान रेखा ने आर्टहाउस फिल्मों में भी काम किया, जैसे ‘कलयुग’, ‘उमराव जान’, ‘विजेता’ और ‘उत्सव’.

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