mahashivratri 2026 char prahar puja start | char prahar muhurat pujan Vidhi and mantra | महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजन समय, पूजा विधि और मंत्र
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Mahashivratri 2026 Char Prahar Puja: महाशिवरात्रि की चार प्रहर की पूजा शुरू हो चुकी है. धर्माचार्यों के अनुसार चार प्रहर की पूजा केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मनियंत्रण का मार्ग है. प्रत्येक प्रहर में अलग-अलग सामग्री से अभिषेक जीवन के विविध अनुभवों और भावनाओं को भगवान शिव को समर्पित करने का प्रतीक है. आइए जानते हैं पूजा विधि, मंत्र और सभी पूजा का समय…

Mahashivratri 2026 Char Prahar Puja: महाशिवरात्रि पर इस बार 300 साल बाद ग्रह-नक्षत्रों का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे आज के दिन का महत्व भी बढ़ गया है. महाशिवरात्रि के व्रत में चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है और अब वह समय शुरू भी हो गया है. चार प्रहर की पहली पूजा का समय 6 बजकर 19 मिनट से शुरू हो गया है और रात्रि 9 बजकर 26 मिनट तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि की रात को चार भागों (प्रहर) में बांटकर भगवान शिव की उपासना करने से साधक को विशेष पुण्यफल प्राप्त होता है. मान्यता है कि महाशिवरात्रि की रात्रि को ही भगवान शिव पहली बार निराकार स्वरुप से से साकार स्वरूप में प्रकट हुए थे और सृष्टि का कल्याण किया था. साथ ही इसी रात्रि को शिव और माता पार्वती का दिव्य मिलन हुआ था.
चार प्रहर पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रात के चार प्रहर जीवन के चार चरण ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास का प्रतीक हैं. प्रत्येक प्रहर में की गई पूजा व्यक्ति के पापों का नाश कर उसे आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है. ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक चारों प्रहर में शिवलिंग का अभिषेक करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विशेष रूप से विवाह, संतान और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. चार प्रहर की पूजा करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है.
महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा शुभ मुहूर्त
- रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय – शाम 06 बजकर 39 मिनट से 09 बजकर 45 मिनट तक
- रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय – शाम 09 बजकर 45 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
- रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय – सुबह 12 बजकर 52 मिनट से 03 बजकर 59 मिनट तक
- रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय – सुबह 03 बजकर 59 मिनट से 07 बजकर 06 मिनट तक
महाशिवरात्रि चार प्रहर पूजा मंत्र
प्रथम प्रहर पूजा मंत्र – ॐ हीं ईशानाय नम:
द्वितीय प्रहर पूजा मंत्र – ॐ हीं अधोराय नम:
तृतीय प्रहर पूजा मंत्र – ॐ हीं वामदेवाय नम:
चतुर्थ प्रहर पूजा मंत्र – ॐ हीं सद्योजाताय नम:
चार प्रहर की पूजा विधि
महाशिवरात्रि की रात्रि में शिव भक्त चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है. आज पूरी रात्रि जागरण किया जाता है और चार प्रहरों की पूजा मंत्र, विधि और अभिषेक अलग अलग तरह से किया जाता है. अगर आप चार प्रहर की पूजा कर रहे हैं तो इसी पद्धति के साथ ही शिवलिंग का अभिषेक करें.
- महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर की पूजा में भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया जाता है.
- महाशिवरात्रि के द्वितीय प्रहर की पूजा में भगवान शिव का दधि स्नान अर्थात दही से अभिषेक किया जाता है.
- महाशिवरात्रि के तृतीय प्रहर की पूजा में भगवान शिव का घृत स्नान अर्थात घी से अभिषेक किया जाता है.
- महाशिवरात्रि के चतुर्थ प्रहर की पूजा में भगवान शिव का मधु स्नान अर्थात शहद और जल की धारा से अभिषेक किया जाता है.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें