सर्दियों में तोरई की अगेती खेती से शंकर को बढ़िया मुनाफा

Share to your loved once


होमफोटोकृषि

सर्दियों में तोरई की अगेती खेती से किसान शंकर को चार बीघा में दो लाख का फायदा

Last Updated:

Agriculture Tips: रामपुर के किसान शंकर सर्दियों में तोरई की अगेती खेती से बड़े मुनाफे कमा रहे हैं. पॉलीहाउस में बीजों की सुरक्षित अंकुरण से लेकर खेत में रोपाई तक की स्मार्ट तकनीक और सही बीज चयन से फरवरी-मार्च में जल्दी तुड़ाई, ऊंचे भाव और प्रति बीघा 50 हजार रुपये तक का लाभ सुनिश्चित होता है.

सर्दियों में तोरई की अगेती खेती करना किसानों के लिए फायदे का सौदा बन रहा है. दिसंबर-जनवरी में अगर सही तकनीक से पौध तैयार कर ली जाए तो फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में ही तुड़ाई शुरू हो जाती है. उस समय बाजार में सब्जी कम होती है इसलिए दाम बहुत अच्छे मिलते हैं यही वजह है कि रामपुर के किसान शंकर हर साल इस तकनीक को अपनाकर बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं.

किसान शंकर बताते हैं कि वह बीज सीधे खेत में नहीं बोते सबसे पहले खेत में छोटा पॉलीहाउस बनाते हैं. इससे ठंड से बचाव होता है और पौधे सुरक्षित रहते हैं बीजों को कोकोपीट और वर्मीकम्पोस्ट के मिश्रण में लगाया जाता है. इससे पौधे 25-30 दिन में मजबूत तैयार हो जाते हैं यह तरीका जर्मिनेशन बढ़ाता है और पौध बराबर निकलती है.

जब पौधे तैयार होने लगते हैं तो खेत में क्यारियां यानी रेज्ड बेड तैयार किए जाते हैं. इसके पहले मिट्टी में अच्छी सड़ी गोबर की खाद, कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट मिलाया जाता है. इससे मिट्टी उपजाऊ बनती है और पौधों को पूरा पोषण मिलता है बेड ऊंचा होने से पानी रुकता नहीं और जड़ें खराब नहीं होतीं यह तरीका पैदावार बढ़ाने में मदद करता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

किसान के मुताबिक वे जनवरी के आखिरी सप्ताह में बीज बोते हैं बीज लगाने से पहले 10-12 घंटे पानी में भिगो देते हैं. इससे अंकुरण तेजी से होता है और पौधे मजबूत निकलते हैं तोरई के बीजों को 25 से 35 डिग्री तापमान चाहिए होता है, इसलिए पॉलीथीन से ढककर गर्म रखा जाता है यह तरीका सर्दी में भी अच्छी ग्रोथ देता है.

जब पौधे 15-20 दिन के हो जाएं और उनमें दो पत्तियां आ जाएं तब उन्हें खेत में रोप दिया जाता है. पौधों के बीच 1.5 से 2 मीटर की दूरी रखी जाती है इससे बेल को फैलने की जगह मिलती है. सही दूरी रखने से फल ज्यादा आते हैं और रोग कम लगते हैं, यह स्टेप पैदावार बढ़ाने के लिए बेहद जरूरी है.

 सर्दियों में सबसे बड़ा खतरा पाला होता है इसलिए बचाने के लिए यह पॉलीहाउस बहुत काम आता है. इससे जमीन की नमी बनी रहती है और तापमान नियंत्रित रहता है. किसान ड्रिप सिंचाई का भी इस्तेमाल करते हैं इससे पानी की बचत होती है और पौधों को बराबर नमी मिलती है.

अगेती खेती के लिए हाइब्रिड और सर्दी सहन करने वाले बीजों का चयन करना जरूरी है. किसान शंकर ने 1 किलो बीज की बुवाई की है अच्छे बीज से पौधे मजबूत होते हैं और फलन जल्दी शुरू होता है. सही किस्म चुनने से बाजार में जल्दी माल पहुंचता है और भाव भी अच्छा मिलता है, यही इस खेती की असली ताकत है.

किसान शंकर चार बीघा में अगेती तोरई लगाते हैं. उनका कहना है कि समय से पहले बाजार में सब्जी पहुंचाने से प्रति बीघा करीब 50 हजार रुपये तक मुनाफा हो जाता है. यानी चार बीघा में दो लाख रुपये तक की कमाई संभव है. यही वजह है कि वह हर साल इसी तकनीक से खेती करते हैं और जबरदस्त फायदा उठाते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GET YOUR LOCAL NEWS ON NEWS SPHERE 24      TO GET PUBLISH YOUR OWN NEWS   CONTACT US ON EMAIL OR WHATSAPP