पत्नी बबीता से लिया उधार, प्रोड्यूसर्स से मांगा एडवांस, पाई-पाई जोड़कर जब रणधीर कपूर ने खरीदी गाड़ी
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कपूर खानदान के वारिस होने के बावजूद रणधीर कपूर को सफलता और अपनी पहली कार के लिए कड़ा स्ट्रगल करना पड़ा. उनके पिता राज कपूर ने उन्हें पैसों की कदर सिखाने के लिए बस-ट्रेन से सफर करने और खुद कमाकर गाड़ी खरीदने की नसीहत दी थी. एक भिखारी द्वारा छोटी कार पर टोंक मारे जाने के बाद रणधीर ने पत्नी बबीता से उधार और प्रोड्यूसर्स से एडवांस लेकर अपनी पहली बड़ी गाड़ी खरीदी. राज कपूर ने उनकी इस मेहनत की तारीफ की, पर खुद बड़ी कार लेने से मना करते हुए कहा कि उनकी पहचान गाड़ी से नहीं, उनके नाम से है.

रणधीर कपूर की जिंदगी का दिलचस्प किस्सा. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: मशहूर एक्टर रणधीर कपूर का जन्म 15 फरवरी 1947 को कपूर खानदान की विरासत में हुआ था, लेकिन उनके लिए सफलता की राह इतनी आसान नहीं थी. राज कपूर के सबसे बड़े बेटे होने के बावजूद, उन्हें फिल्मी दुनिया में अपनी जगह बनाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा. उन्होंने बचपन में ‘श्री 420’ जैसी फिल्म में काम तो किया, लेकिन असल पहचान उन्हें 1971 की फिल्म ‘कल आज और कल’ से मिली, जिसका उन्होंने निर्देशन भी किया था. 70 के दशक में उन्होंने ‘जवानी दीवानी’ और ‘रामपुर का लक्ष्मण’ जैसी कई हिट फिल्में देकर खुद को एक रोमांटिक और कॉमेडी हीरो के रूप में स्थापित किया. भले ही आज वे करिश्मा और करीना कपूर के पिता के रूप में जाने जाते हों, लेकिन अपने दौर में उनकी अपनी एक जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी.
हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े खानदान का वारिस होने के बाद भी रणधीर कपूर को अपनी पहली कार खरीदने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी थी. उनके पिता राज कपूर ने उन्हें बचपन से ही पैसों की कदर करना सिखाया था. राज कपूर का साफ कहना था कि अगर गाड़ी चाहिए, तो उसे खुद अपनी कमाई से खरीदो. रणधीर ने एक मजेदार किस्सा सुनाते हुए बताया था कि शुरुआत में वे बस और ट्रेन से सफर करते थे और काफी समय तक घर की एक छोटी सी गाड़ी इस्तेमाल करते रहे. एक बार तो हद ही हो गई जब सिग्नल पर एक भिखारी ने उन्हें छोटी गाड़ी में देखकर टोक दिया कि फिल्मों में तो आप बड़ी कारों में घूमते हो और असल में इसमें! इस बात ने रणधीर के दिल को छू लिया और उन्होंने ठान लिया कि अब तो बड़ी गाड़ी ही लेनी है.
पाई-पाई जोड़कर खरीदी गाड़ी
रणधीर ने उस पहली शानदार गाड़ी को खरीदने के लिए सचमुच पाई-पाई जोड़ी. उनके पास इतने पैसे नहीं थे, इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी बबीता से उधार मांगा और कुछ फिल्म प्रोड्यूसर्स से अपनी अगली फिल्मों के लिए एडवांस पैसे लिए. काफी मेहनत के बाद जब वे चमचमाती लेटेस्ट कार लेकर घर पहुँचे, तो राज कपूर बहुत खुश हुए और उन्हें खूब तरक्की करने का आशीर्वाद दिया. रणधीर ने जब अपने पिता को भी वैसी ही गाड़ी लेने की सलाह दी, तो राज कपूर ने एक ऐसा जवाब दिया जो आज भी मिसाल है. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें बड़ी गाड़ी की जरूरत नहीं है, क्योंकि अगर वे बस में भी बैठेंगे तो लोग यही कहेंगे कि ‘देखो राज कपूर जा रहा है’. यह कहानी सिखाती है कि कपूर खानदान की साख सिर्फ पैसों से नहीं, बल्कि उनके व्यक्तित्व और मेहनत से बनी थी.
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अभिषेक नागर News 18 Digital में Senior Sub Editor के पद पर काम कर रहे हैं. वे News 18 Digital की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. वे बीते 6 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे News 18 Digital से पहल…और पढ़ें