India AI Impact Summit 2026 PM Modi Invites China Bangladesh but Snubs Pakistan Delhi Challenge Western Tech Monopoly

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नई दिल्ली: भारत की राजधानी में AI का ऐतिहासिक महाकुंभ होने जा रहा है. दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित किया गया ये एआई समिट (India AI Impact Summit) केवल एक सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक AI गवर्नेंस की मेज पर भारत की मजबूत दावेदारी का सबूत बनेगा. विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस समिट के लिए 100 से अधिक देशों को न्योता भेजा गया है, जिसमें कई पड़ोसी शामिल हैं लेकिन पाकिस्तान को आउट कर दिया गया है. यूके, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बाद भारत ऐसे शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला चौथा देश बन गया है. आगे जानें इस AI समिट से जुड़े हर एक सवाल का जवाब-

AI समिट का पूरा शेड्यूल: कब क्या होगा?

दिल्ली के भारत मंडपम में ये आलीशान AI Summit 16 फरवरी से लेकर 20 फरवरी तक चलेगा. ये पांच दिवसीय महाकुंभ दुनिया भर के पॉलिसी मेकर्स, टेक दिग्गजों और शोधकर्ताओं को एक छत के नीचे लाएगा. इस समिट की थीम पर भारत का विजन साफ है- ‘तकनीक ऐसी हो जो सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के मंत्र को साकार करे.

पहले दिन क्या होगा?

16 फरवरी को समिट की औपचारिक शुरुआत होगी. इसमें अलग-अलग थीम पर सत्रों और पैनल डिस्कशन के जरिए एआई के नैतिक इस्तेमाल और इस तकनीकि के तहत सामने आने वाली चुनौतियों पर मंथन किया जाएगा.

18 फरवरी को क्या होगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे. यहां तकनीक के साथ-साथ भारत के साथ कई देश के आपसी रिश्तों को मजबूत करने पर जोर होगा.

19 फरवरी को क्या होगा?

यह समिट का सबसे महत्वपूर्ण दिन होगा, जिसमें प्रमुख देशों के लीडर्स एक मंच पर आकर AI के भविष्य की रूपरेखा तैयार करेंगे.

20 फरवरी को क्या होगा?

समिट का अंत और भी भव्य होगा. पीएम मोदी की उच्च स्तरीय बैठकों के साथ ही उन निष्कर्षों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिनका इंतजार पूरी दुनिया कर रही है. ये सिर्फ एक मीटिंग नहीं, बल्कि 100 देशों का वो साझा संकल्प है, जो तकनीक के चेहरे को हमेशा के लिए बदल देगा.

ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज बनेगा भारत

यह शिखर सम्मेलन भारत को ‘ग्लोबल AI गवर्नेंस’ की ड्राइविंग सीट पर बिठाने का काम करेगा. जहां से दुनिया की तकनीक और नीतियों की दिशा तय होगी. भारत का विजन बेहद साफ और सबको एक साथ लेकर चलने वाला है- एआई जैसी क्रांतिकारी तकनीक पर अब मुट्ठी भर अमीर देशों की जागीरदारी नहीं चलेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत यह सुनिश्चित करने के लिए कमर कस चुका है कि ‘ग्लोबल साउथ’ यानी विकासशील देशों को भी इस डिजिटल क्रांति का उतना ही हक मिले, जितना किसी विकसित राष्ट्र को.

दिल्ली का यह समिट यूके, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बाद दुनिया का चौथा वैश्विक AI समिट है. ये कितने बड़े स्तर पर होने वाला है, ये बात नीचे दिए गए आंकड़ों से समझी जा सकती है.
  • 20 राष्ट्र प्रमुख: दुनिया के 20 शीर्ष नेता इस कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे.
  • 45 देशों के प्रतिनिधिमंडल: AI समिट में पॉलिसी मेकर्स और विशेषज्ञों का बड़ा जमावड़ा लगेगा.
  • 2 लाख पंजीकरण: AI समिट में युवाओं और प्रोफेशनल्स बढ़ चढ़कर हिस्सा लेंगे.

बांग्लादेश-चीन को बुलाया पाकिस्तान को कहा ‘नो एंट्री’

विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि दिल्ली में होने वाले इस महाकुंभ में पाकिस्तान को आमंत्रित नहीं किया गया है. जहां एक ओर बांग्लादेश, चीन, भूटान, श्रीलंका और मालदीव जैसे पड़ोसी देशों को न्योता भेजा गया है, वहीं पाकिस्तान की अनुपस्थिति वैश्विक मंच पर उसकी स्थिति को दर्शाती है.

भारत ने क्षेत्रीय स्थिरता और तकनीकी सहयोग को प्राथमिकता देते हुए अपने अधिकांश पड़ोसियों को जगह दी है. चीन की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भारत एआई के वैश्विक मानकों पर चर्चा के लिए प्रतिस्पर्धियों को भी साथ बिठाने की क्षमता रखता है.

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